कनाडा में वर्क परमिट अस्वीकृति: पंजाब मंत्री रवजोत सिंह ने जयशंकर को लिखा पत्र, 1,500 छात्र प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के प्रवासी मामलों के मंत्री रवजोत सिंह ने 7 अगस्त 2026 को चंडीगढ़ में मीडिया को संबोधित करते हुए कनाडा में पोस्ट-स्टडी वर्क परमिट अस्वीकृति की बड़ी समस्या पर गहरी चिंता जताई, जिससे लगभग 1,500 पंजाबी छात्र प्रभावित हैं। उन्होंने केंद्रीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर शीघ्र बैठक का समय माँगा है।
संकट की पृष्ठभूमि
प्रभावित छात्रों ने कनाडा में दो वर्षीय शैक्षणिक कार्यक्रमों में प्रवेश के समय यह आश्वासन प्राप्त किया था कि पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद वे पोस्ट-स्टडी वर्क परमिट के लिए पात्र होंगे। इन छात्रों ने अपने और अपने परिवार के बेहतर भविष्य की उम्मीद में औसतन ₹20 लाख तक खर्च किए। अब वर्क परमिट के बड़े पैमाने पर अस्वीकृति के कारण ये छात्र गंभीर मानसिक, वित्तीय और कानूनी कठिनाइयों में घिर गए हैं।
गौरतलब है कि यह संकट ऐसे समय में उभरा है जब कनाडा सरकार ने हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय छात्रों और अस्थायी निवासियों के लिए अपनी आव्रजन नीतियों को कड़ा किया है, जिसका सबसे अधिक असर पंजाब जैसे उन राज्यों पर पड़ा है जहाँ से कनाडा जाने वाले छात्रों की संख्या परंपरागत रूप से अधिक रही है।
मंत्री की माँग और सरकार की प्रतिक्रिया
रवजोत सिंह ने विधानसभा में अपने बयान के बाद मीडिया से कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रभावित छात्रों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने केंद्रीय विदेश मंत्री को लिखे पत्र में भारत सरकार से आग्रह किया है कि वह राजनयिक चैनलों के माध्यम से इस मुद्दे को कनाडा सरकार के समक्ष उठाए ताकि प्रभावित छात्रों को समय पर राहत मिल सके।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो पंजाब सरकार उचित कानूनी सलाहकारों की नियुक्ति कर प्रभावित छात्रों के लिए सामूहिक कानूनी प्रतिनिधित्व की व्यवस्था करने पर विचार करेगी।
कानूनी कार्यवाही और अंतरराष्ट्रीय अपील
मंत्री रवजोत सिंह के अनुसार, प्रभावित छात्रों की एक बड़ी संख्या ने कनाडा की संघीय अदालत में कानूनी कार्यवाही पहले ही शुरू कर दी है। उन्होंने कनाडा में पंजाबी मूल के सांसदों से भी विशेष अपील करते हुए कहा कि वे राजनीतिक संबद्धताओं से ऊपर उठकर इस मानवीय मुद्दे को कनाडा सरकार के समक्ष सामूहिक रूप से उठाएं।
यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत-कनाडा राजनयिक संबंध पहले से ही तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं, जिससे इस मुद्दे पर द्विपक्षीय संवाद की जटिलता और बढ़ जाती है।
आम जनता और परिवारों पर असर
मंत्री ने कहा कि बड़ी संख्या में प्रभावित छात्रों ने सहायता के लिए सीधे उनसे संपर्क किया है। उन्होंने स्वीकार किया कि ये परिवार आर्थिक रूप से भारी दबाव में हैं — अधिकांश ने जमीन-जायदाद बेचकर या कर्ज लेकर अपने बच्चों को कनाडा भेजा था। वर्क परमिट अस्वीकृति से न केवल इन छात्रों का भविष्य, बल्कि उनके परिवारों की वित्तीय स्थिरता भी संकट में आ गई है।
आगे की राह
राज्य सरकार फिलहाल स्थिति पर नज़र बनाए हुए है और केंद्र से राजनयिक हस्तक्षेप की प्रतीक्षा कर रही है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की ओर से बैठक की तारीख की घोषणा अभी बाकी है। कानूनी और राजनयिक दोनों मोर्चों पर एक साथ प्रयास जारी हैं, और अगले कुछ हफ्तों में इस मुद्दे पर केंद्र-राज्य समन्वय की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।