1 अक्टूबर 2026
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नोएडा में कनाडा वर्क वीजा ठगी का भंडाफोड़: तीन गिरफ्तार, 5 पासपोर्ट और थार कार बरामद

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नोएडा में कनाडा वर्क वीजा ठगी का भंडाफोड़: तीन गिरफ्तार, 5 पासपोर्ट और थार कार बरामद

सारांश

नोएडा पुलिस ने कनाडा वर्क वीजा के नाम पर लाखों की ठगी करने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। संदीप सिंह 'अरमान' बनकर और पूजा महाजन 'क्रिस्टन जेनिफर' बनकर फर्जी कनाडाई नंबर से झाँसा देते थे। 5 पीड़ितों के पासपोर्ट, 7 मोबाइल और थार कार बरामद।

मुख्य बातें

नोएडा थाना फेस-1 पुलिस ने 1 अक्टूबर 2026 को कनाडा वर्क वीजा ठगी गैंग के 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
आरोपियों की पहचान राहुल कुमार चौहान (31) , संदीप सिंह (44) और पूजा महाजन (43) के रूप में हुई।
प्रत्येक पीड़ित से पहले ₹25,000 , फिर ₹12.50 लाख अतिरिक्त की माँग की गई।
संदीप सिंह 'माई सेकंड लाइन' ऐप से कनाडा का फर्जी वर्चुअल नंबर इस्तेमाल करता था।
बरामदगी में 7 मोबाइल फोन , 1 थार कार और 5 पीड़ितों के पासपोर्ट शामिल।
जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है; गिरोह के अन्य सदस्यों और पूर्व ठगी की पड़ताल जारी।

नोएडा के थाना फेस-1 पुलिस ने 1 अक्टूबर 2026 को कनाडा का वर्क वीजा दिलाने और विदेश भेजने का झांसा देकर लोगों से लाखों रुपये ठगने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया। इस कार्रवाई में राहुल कुमार चौहान (31), संदीप सिंह (44) और पूजा महाजन (43) — कुल तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने इनके कब्जे से 7 मोबाइल फोन, एक थार कार और 5 पीड़ितों के पासपोर्ट बरामद किए हैं।

कैसे काम करता था यह गिरोह

जांच में सामने आया कि सेक्टर-2, नोएडा स्थित सी-7 ग्राउंड फ्लोर पर एक एजुकेशन कंसल्टेंसी कंपनी संचालित की जा रही थी। आरोपी संदीप सिंह 'अरमान' नाम से और पूजा महाजन 'क्रिस्टन जेनिफर' नाम से खुद को विदेशी नागरिक बताकर इस कंसल्टेंसी से संपर्क करते थे।

पुलिस के अनुसार, संदीप सिंह 'माई सेकंड लाइन' नामक ऐप के ज़रिए कनाडा का वर्चुअल फोन नंबर इस्तेमाल करता था, ताकि कनाडा से बात करने का भ्रम पैदा किया जा सके। इस तरह कंसल्टेंसी को विश्वास दिलाया जाता था कि वे वास्तव में कनाडा-स्थित एजेंट हैं।

पीड़ितों से ठगी का तरीका

आरोप है कि कंसल्टेंसी के ज़रिए पाँच ग्राहकों की जानकारी और उनके पासपोर्ट हासिल किए गए। शुरुआत में प्रत्येक ग्राहक से पेपर वर्क, बायोमेट्रिक्स और मेडिकल के नाम पर ₹25,000 वसूले गए।

इसके बाद आरोपियों ने टेंपरेरी रेजिडेंस वीजा दिलाने का आश्वासन देते हुए प्रत्येक ग्राहक से ₹12.50 लाख अतिरिक्त की माँग की। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इससे पहले कितने लोग इस जाल में फँसे और कुल कितनी रकम की ठगी हुई।

पुलिस की कार्रवाई

थाना फेस-1 की पुलिस टीम ने मैनुअल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के आधार पर यह कार्रवाई की। तीनों आरोपियों को सेक्टर-2, नोएडा स्थित परिसर से दबोचा गया। बरामद मोबाइल फोन में वह ऐप भी पाया गया जिससे कनाडा का फर्जी नंबर दिखाया जाता था।

पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ थाना फेस-1 में मुकदमा दर्ज कर लिया है। जांच का दायरा अब बढ़ाया जा रहा है — गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और अब तक हुई समस्त ठगी की पड़ताल जारी है।

आम जनता पर असर और सावधानी

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब कनाडा वर्क वीजा के नाम पर ऑनलाइन और ऑफलाइन धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। गौरतलब है कि आरोपी गूगल सर्च के ज़रिए कंसल्टेंसियों तक पहुँचते थे, जो इस तरह के फर्जी एजेंटों की पहुँच की गंभीरता को दर्शाता है।

पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि विदेश भेजने या वीजा दिलाने का दावा करने वाली किसी भी एजेंसी से लेनदेन से पहले उसकी पूरी जाँच-पड़ताल करें और पासपोर्ट किसी अनजान व्यक्ति को न सौंपें। जांच में आगे और खुलासे होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिससे पुलिस की पारंपरिक जांच पद्धति चुनौती में पड़ती है। असली सवाल यह है कि कंसल्टेंसी कंपनियाँ — जो इस गिरोह के लिए ग्राहकों और पासपोर्ट का पाइपलाइन बनीं — क्या उनकी भी जांच होगी, या केवल तीन 'ऑपरेटर' ही सज़ा पाएँगे? वीजा धोखाधड़ी रोकने के लिए कंसल्टेंसी पंजीकरण और सत्यापन का कोई राष्ट्रीय ढाँचा न होना इस समस्या की असली जड़ है।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा कनाडा वर्क वीजा ठगी मामले में क्या हुआ?
नोएडा के थाना फेस-1 पुलिस ने 1 अक्टूबर 2026 को कनाडा वर्क वीजा दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के तीन सदस्यों — राहुल कुमार चौहान, संदीप सिंह और पूजा महाजन — को गिरफ्तार किया। आरोपियों ने फर्जी विदेशी पहचान अपनाकर पाँच पीड़ितों से लाखों रुपये ठगे।
आरोपियों ने पीड़ितों से कितनी रकम ठगी?
आरोपियों ने पहले प्रत्येक पीड़ित से पेपर वर्क, बायोमेट्रिक्स और मेडिकल के नाम पर ₹25,000 वसूले। इसके बाद वीजा प्रक्रिया आगे बढ़ाने के नाम पर प्रत्येक से ₹12.50 लाख अतिरिक्त की माँग की गई। कुल ठगी की रकम की जांच अभी जारी है।
'माई सेकंड लाइन' ऐप का इस्तेमाल कैसे किया गया?
आरोपी संदीप सिंह इस ऐप के ज़रिए कनाडा का वर्चुअल फोन नंबर दिखाता था, ताकि वह कनाडा से बात करने का झूठा प्रभाव दे सके। इससे कंसल्टेंसी कंपनियों और पीड़ितों को लगता था कि वे वास्तव में कनाडा-स्थित एजेंट से संपर्क में हैं।
पुलिस ने इस गैंग को कैसे पकड़ा?
पुलिस ने मैनुअल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के आधार पर कार्रवाई की और सेक्टर-2, नोएडा स्थित कंसल्टेंसी परिसर से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। बरामद मोबाइल फोन में वह ऐप भी मिला जिससे फर्जी नंबर इस्तेमाल किया जाता था।
वीजा धोखाधड़ी से बचने के लिए क्या सावधानी बरतें?
पुलिस ने सलाह दी है कि विदेश भेजने या वीजा दिलाने का दावा करने वाली किसी भी एजेंसी की पूरी जाँच-पड़ताल पहले करें। किसी भी अनजान एजेंट या कंसल्टेंसी को पासपोर्ट न सौंपें और वीजा प्रक्रिया के लिए हमेशा सरकारी या आधिकारिक चैनलों का ही उपयोग करें।
राष्ट्र प्रेस
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