19 जुलाई 2026
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क्या देहरादून में त्रिपुरा के छात्र की हत्या के लिए न्याय की मांग में कैंडल मार्च आयोजित किया गया?

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क्या देहरादून में त्रिपुरा के छात्र की हत्या के लिए न्याय की मांग में कैंडल मार्च आयोजित किया गया?

सारांश

अगरतला में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की हत्या के खिलाफ कैंडल मार्च का आयोजन किया गया। युवा संगठनों ने केंद्र सरकार से पूर्वोत्तर के लोगों की सुरक्षा के लिए कड़े कानून बनाने की मांग की। इस घटना की व्यापक निंदा की गई है। क्या यह घटनाएँ नस्लीय भेदभाव की ओर इशारा करती हैं?

मुख्य बातें

एंजेल चकमा की हत्या ने नस्लीय भेदभाव के मुद्दे को उजागर किया।
कैंडल मार्च ने युवा संगठनों की एकजुटता का परिचय दिया।
केंद्र सरकार से सुरक्षा कानूनों की मांग की गई है।
नेताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा की।
जांच में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

अगरतला, 28 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा पर हुए क्रूर हमले और उसके बाद हुई मौत के खिलाफ रविवार को अगरतला में विभिन्न युवा और छात्र संगठनों ने कैंडल मार्च का आयोजन किया।

अधिकारियों के अनुसार, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के एक कांस्टेबल के 24 वर्षीय पुत्र एंजेल चकमा ने 26 दिसंबर को देहरादून के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया। 9 दिसंबर को बदमाशों के हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

एंजेल चकमा के लिए न्याय की मांग करते हुए, टिपरा स्वदेशी छात्र संघ (टीआईएसएफ) और अन्य संगठनों द्वारा आयोजित कैंडल मार्च स्वामी विवेकानंद स्टेडियम से शुरू हुआ और शहर के कई हिस्सों से गुजरा। प्रतिभागियों ने केंद्र सरकार से देश के विभिन्न हिस्सों, विशेष रूप से उत्तर भारत में रहने वाले पूर्वोत्तर के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कानून बनाने का आग्रह किया।

टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) की युवा शाखा, यूथ टिपरा फेडरेशन (वाईटीएफ) के अध्यक्ष सूरज देबबर्मा ने कहा कि पूर्वोत्तर के कई युवाओं को पहले भी विभिन्न राज्यों में गंभीर हमलों और नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ा है, जो मजबूत सुरक्षा उपायों की तत्काल आवश्यकता को उजागर करता है।

इस घटना की मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा और उनकी पार्टी नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) ने भी कड़ी निंदा की। अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर एक पोस्ट में संगमा ने इस घटना को दिल दहला देने वाला और अस्वीकार्य बताया और इस बात पर जोर दिया कि नस्लीय हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के लोग भी इस देश के हर नागरिक की तरह ही भारतीय हैं।

एनपीपी के कार्यकारी अध्यक्ष और मेघालय के पूर्व मंत्री जेम्स संगमा ने इस घटना को बेहद चौंकाने वाला बताया और इसे नस्लीय भेदभाव, नफरत फैलाने वाले भाषण और लक्षित हिंसा के खिलाफ मजबूत कानूनी, संस्थागत और सामाजिक उपायों की चेतावनी कहा। उन्होंने न्याय सुनिश्चित करने के लिए त्वरित और अनुकरणीय कार्रवाई की मांग की।

इस बीच, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने शनिवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इस घटना के संबंध में बात की। मुख्यमंत्री धामी ने साहा को बताया कि पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और आगे की जांच जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि इस प्रकार की घटनाएँ हमारे समाज में गहरी जड़ें जमा चुकी नस्लीय भेदभाव का संकेत देती हैं। हमें इस पर विचार करने की आवश्यकता है कि हमारे समाज में सभी नागरिकों के प्रति समानता का भाव कैसे स्थापित किया जाए।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कैंडल मार्च का उद्देश्य क्या था?
कैंडल मार्च का उद्देश्य एंजेल चकमा के लिए न्याय की मांग करना और पूर्वोत्तर के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कानून बनाना था।
इस घटना पर नेताओं की क्या प्रतिक्रिया थी?
नेताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा की और नस्लीय हिंसा के खिलाफ मजबूत कदम उठाने की मांग की।
राष्ट्र प्रेस
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