14 जुलाई 2026
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शिमला सीबीआई कोर्ट का फैसला: बैंक धोखाधड़ी में चार दोषियों को 2 साल की जेल, ₹80,000 जुर्माना

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शिमला सीबीआई कोर्ट का फैसला: बैंक धोखाधड़ी में चार दोषियों को 2 साल की जेल, ₹80,000 जुर्माना

सारांश

शिमला की CBI अदालत ने SBI डेहरा से जुड़े KCC ऋण घोटाले में चार आरोपियों को दोषी करार देते हुए 2 साल की जेल और ₹80,000 जुर्माने की सजा सुनाई। 2013 में दर्ज यह मामला जाली दस्तावेजों के जरिए बैंक से ऋण लेकर न चुकाने से जुड़ा है।

मुख्य बातें

शिमला CBI विशेष अदालत ने 14 जुलाई 2026 को चार आरोपियों को 2 साल की जेल और ₹80,000 जुर्माने की सजा सुनाई।
दोषी करार दिए गए आरोपी हैं: बचित्तर सिंह , रोशन लाल , हरकिरत सिंह और शम्मी ।
मामला SBI की डेहरा शाखा (जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश) से KCC ऋण में नकली दस्तावेज़ों के जरिए धोखाधड़ी से संबंधित है।
CBI ने 22 फरवरी 2013 को मामला दर्ज किया था; अदालत में 20 + 19 अलग चार्जशीट दाखिल की गई थीं।
अदालत ने 6 जुलाई को दोषसिद्धि और 14 जुलाई को सजा सुनाई।

शिमला की सीबीआई विशेष अदालत ने 14 जुलाई 2026 को भारतीय स्टेट बैंक (SBI), डेहरा से जुड़े बैंक धोखाधड़ी के तीन मामलों में चार आरोपियों — बचित्तर सिंह, रोशन लाल, हरकिरत सिंह और शम्मी — को दो वर्ष के कारावास और कुल ₹80,000 के जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने 6 जुलाई को इन चारों को दोषी करार दिया था और आठ दिन बाद सजा का ऐलान किया।

मामले की पृष्ठभूमि

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 22 फरवरी 2013 को यह मामला दर्ज किया था। आरोप था कि राज कुमार कैंथ (तत्कालीन शाखा प्रबंधक, SBI डेहरा), कुलदीप सिंह भटोआ (तत्कालीन फील्ड ऑफिसर, SBI डेहरा), एस.एम. पॉल (तत्कालीन शाखा प्रबंधक, SBI डेहरा), मोहिंदर (तत्कालीन प्रबंधक PBD, SBI डेहरा), सुरेश कुमार (निजी व्यक्ति) और अन्य अज्ञात अधिकारियों व निजी व्यक्तियों ने मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रचा।

जांच के अनुसार इन लोगों ने नकली और जाली दस्तावेजों के आधार पर SBI की डेहरा शाखा (जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश) से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ऋण हासिल किए और उन्हें चुकाने से इनकार कर बैंक के साथ धोखाधड़ी की।

चार्जशीट और न्यायिक प्रक्रिया

जांच पूरी होने के बाद CBI ने बैंक अधिकारियों और निजी उधारकर्ताओं के खिलाफ शिमला स्थित CBI विशेष न्यायाधीश की अदालत में अलग-अलग 20 चार्जशीट दाखिल कीं। इसके अतिरिक्त, केवल निजी व्यक्तियों के खिलाफ विशेष मजिस्ट्रेट-सह-मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की अदालत में 19 अलग चार्जशीट भी दाखिल की गईं।

गौरतलब है कि यह मामला एक दशक से अधिक समय से न्यायिक प्रक्रिया में था। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने चारों आरोपियों को दोषी पाया और सजा सुनाई।

सजा का विवरण

अदालत ने बचित्तर सिंह, रोशन लाल, हरकिरत सिंह और शम्मी — इन चारों निजी व्यक्तियों को — दो-दो वर्ष के कारावास की सजा दी। इसके साथ ही कुल ₹80,000 का जुर्माना भी लगाया गया। यह सजा बैंक धोखाधड़ी और जाली दस्तावेज़ीकरण के आरोपों में दी गई है।

व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी बैंकों में KCC ऋण घोटालों पर CBI की निगरानी पूरे देश में बढ़ी है। हिमाचल प्रदेश में भी पिछले कुछ वर्षों में कृषि ऋण धोखाधड़ी के कई मामले सामने आए हैं। CBI की यह कार्रवाई संस्थागत ऋण प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आगे की सुनवाई में अन्य आरोपियों के मामलों का भी निपटारा अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ जाली दस्तावेज़ों की जाँच की ज़िम्मेदारी अक्सर अस्पष्ट रहती है। इस मामले में बैंक अधिकारियों के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल हुई थी, लेकिन सजा केवल निजी व्यक्तियों को मिली — यह सवाल उठाता है कि संस्थागत जवाबदेही कहाँ तक पहुँची। जब तक ऐसे मामलों में बैंक कर्मियों को भी समान गति से दोषसिद्धि नहीं मिलती, निवारण का संदेश अधूरा रहेगा।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिमला CBI कोर्ट ने किन आरोपियों को सजा सुनाई?
अदालत ने बचित्तर सिंह, रोशन लाल, हरकिरत सिंह और शम्मी — इन चार निजी व्यक्तियों को 2 साल की जेल और कुल ₹80,000 जुर्माने की सजा सुनाई। यह सजा 14 जुलाई 2026 को सुनाई गई, जबकि दोषसिद्धि 6 जुलाई को हुई थी।
SBI डेहरा बैंक धोखाधड़ी मामला क्या है?
यह मामला जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश स्थित SBI की डेहरा शाखा से जुड़ा है, जहाँ आरोपियों ने नकली और जाली दस्तावेजों के आधार पर किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ऋण लिए और उन्हें नहीं चुकाया। CBI ने यह मामला 22 फरवरी 2013 को दर्ज किया था।
इस मामले में CBI ने कितनी चार्जशीट दाखिल कीं?
CBI ने बैंक अधिकारियों और निजी उधारकर्ताओं के खिलाफ CBI विशेष न्यायाधीश की अदालत में 20 अलग चार्जशीट और केवल निजी व्यक्तियों के खिलाफ विशेष मजिस्ट्रेट-सह-CJM की अदालत में 19 अतिरिक्त चार्जशीट दाखिल कीं।
इस मामले में कौन-कौन से बैंक अधिकारी आरोपी थे?
CBI ने राज कुमार कैंथ (तत्कालीन शाखा प्रबंधक), कुलदीप सिंह भटोआ (तत्कालीन फील्ड ऑफिसर), एस.एम. पॉल (तत्कालीन शाखा प्रबंधक), मोहिंदर (तत्कालीन प्रबंधक PBD) सहित SBI डेहरा के अन्य अज्ञात अधिकारियों को भी आरोपी बनाया था।
क्या इस मामले में अन्य आरोपियों पर भी सुनवाई जारी है?
हाँ, इस मामले में बड़ी संख्या में चार्जशीट दाखिल की गई हैं और अन्य आरोपियों — जिनमें बैंक अधिकारी भी शामिल हैं — पर सुनवाई अभी जारी है। 14 जुलाई का फैसला केवल चार निजी व्यक्तियों से संबंधित था।
राष्ट्र प्रेस
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