केंद्रीय मंत्रालय ने एनआईटी राउरकेला में 2,000 पेड़ों की कटाई पर ओडिशा सरकार से मांगी रिपोर्ट
सारांश
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भुवनेश्वर, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राउरकेला में स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) में एक नई इमारत के निर्माण हेतु 2,000 से अधिक वृद्ध पेड़ों की कटाई के प्रस्ताव पर ओडिशा के वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।
आरटीआई और पर्यावरण कार्यकर्ता अलाया सामंतराय की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने 20 मार्च को ओडिशा के वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को पत्र लिखा। मंत्रालय ने कहा कि मामले में नियमों के अनुसार तुरंत कार्रवाई की जाए।
पत्र में कहा गया कि शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिस क्षेत्र में नई भवन निर्माण की योजना है, वहां घना हरित क्षेत्र है। यह स्थान पर्यावरण के लिए सुरक्षा कवच जैसा कार्य करता है और स्थानीय पेड़-पौधों तथा जीव-जंतुओं का आश्रय स्थल भी है। कैंपस के भीतर एक अन्य स्थान पर, जहां सिविल इंजीनियरिंग विभाग के लिए पहले ही नींव का कार्य आरंभ हो चुका है, वहां पेड़ों की संख्या कम है। इस प्रकार, बड़े पैमाने पर पेड़ काटने से बचने के लिए उस स्थान पर विचार किया जा सकता है।
मंत्रालय ने विभाग से कहा कि वह इस मामले की गहन जांच करे और नियमों के अनुसार आवश्यक कदम उठाए। साथ ही, कार्रवाई की रिपोर्ट भी जल्द भेजने को कहा।
शिकायतकर्ता सामंतराय ने कहा कि औद्योगिक नगर राउरकेला में हरे-भरे क्षेत्र में फैला एनआईटी राउरकेला न केवल कैंपस के लिए, बल्कि पूरे स्टील सिटी के लिए फेफड़ों की तरह कार्य करता है। उन्होंने कहा कि कैंपस की हरियाली विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं के लिए स्वर्ग के समान है।
उन्होंने यह भी बताया कि पहले भी कैंपस में निर्माण कार्यों के लिए पेड़ काटे गए हैं, लेकिन इस बार 2,000 से अधिक बड़े पेड़ों की कटाई का प्रस्ताव न तो आवश्यक है और न ही उचित। उनका तर्क है कि सिविल इंजीनियरिंग विभाग के लिए पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र में रखी गई जमीन पर ही नई इमारतें आसानी से बनाई जा सकती हैं। इसके बावजूद, एनआईटी प्रशासन किसी अन्य स्थान पर पेड़ काटने की योजना बना रहा है।
पर्यावरण कार्यकर्ता ने राउरकेला के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर से भी अनुरोध किया है कि दी गई अनुमति पर पुनर्विचार किया जाए। साथ ही, एनआईटी प्रशासन को भवन योजना का पुनरावलोकन करने और ऐसी जगह तलाशने को कहा जाए, जहां कम से कम पेड़ काटने पड़ें।