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पश्चिम बंगाल में लागू होंगी विज्ञान, नवाचार और स्टार्टअप की केंद्रीय योजनाएँ: डॉ. जितेंद्र सिंह

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पश्चिम बंगाल में लागू होंगी विज्ञान, नवाचार और स्टार्टअप की केंद्रीय योजनाएँ: डॉ. जितेंद्र सिंह

सारांश

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की कोलकाता बैठक में विज्ञान, नवाचार और स्टार्टअप की सभी प्रमुख केंद्रीय योजनाएँ तत्काल लागू करने का निर्णय हुआ। आर्सेनिक अध्ययन, कैंसर अनुसंधान और छात्र-महिला योजनाओं के विस्तार पर भी सहमति बनी।

मुख्य बातें

जितेंद्र सिंह और सुवेंदु अधिकारी की 26 मई 2026 को कोलकाता में बैठक हुई।
विज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और स्टार्टअप की सभी प्रमुख केंद्रीय योजनाएँ पश्चिम बंगाल में तत्काल लागू होंगी।
CSIR संस्थानों के ज़रिए आर्सेनिक-प्रभावित जिलों में विशेष अध्ययन शुरू होगा।
कैंसर और रोगाणुरोधी उपचारों पर मेडिकल कॉलेजों व एम्स नेटवर्क के साथ सहयोगात्मक अनुसंधान होगा।
इंस्पायर , विज्ञान ज्योति और किरण योजनाओं का समन्वित विस्तार तय।
कार्यान्वयन रोडमैप के लिए प्रारंभिक समन्वय बैठक अगले कुछ दिनों में होगी।

केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 26 मई 2026 को कोलकाता में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की, जिसमें तय किया गया कि विज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और स्टार्टअप से जुड़ी सभी प्रमुख केंद्रीय योजनाओं को पश्चिम बंगाल में तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा। यह बैठक पूर्वी भारत में विज्ञान-आधारित विकास को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

बैठक के प्रमुख निर्णय

बैठक में दो क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को विशेष महत्व दिया गया। पहला निर्णय यह रहा कि सीएसआईआर (CSIR) संस्थानों के माध्यम से पश्चिम बंगाल के आर्सेनिक-प्रभावित जिलों में एक विशेष अध्ययन शुरू किया जाएगा, जो इस गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के समाधान की दिशा में काम करेगा। दूसरा निर्णय यह था कि प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों, सरकारी मेडिकल कॉलेजों, कैंसर अस्पतालों और एम्स से जुड़े मेडिकल नेटवर्कों को शामिल करते हुए कैंसर और रोगाणुरोधी उपचारों पर सहयोगात्मक नैदानिक एवं दवा परीक्षण अनुसंधान आरंभ किया जाएगा।

छात्र और महिला-केंद्रित योजनाओं का विस्तार

बैठक में पश्चिम बंगाल के स्कूलों और कॉलेजों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) की छात्र-केंद्रित और महिला-केंद्रित योजनाओं के कार्यान्वयन पर विशेष चर्चा हुई। इंस्पायर, विज्ञान ज्योति और किरण योजनाओं का समन्वित तरीके से विस्तार करने का निर्णय लिया गया, ताकि युवाओं और महिलाओं में वैज्ञानिक सोच तथा विज्ञान-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में भागीदारी को बल मिले।

पूर्वी भारत में विज्ञान विकास का नया मॉडल

डॉ. सिंह ने कहा कि पश्चिम बंगाल के पास एक सुदृढ़ वैज्ञानिक और शैक्षणिक पारिस्थितिकी तंत्र है, जिसमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले संस्थान पहले से ही राज्यभर में सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक संस्थानों, शिक्षा जगत, स्वास्थ्य सेवा बुनियादी ढाँचे और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के संयोजन से पूर्वी भारत में विज्ञान-आधारित क्षेत्रीय विकास का एक नया मॉडल तैयार किया जा सकता है।

अगले चरण की तैयारी

बैठक में यह भी तय हुआ कि कार्यान्वयन का रोडमैप तैयार करने के लिए राज्य के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग तथा केंद्रीय वैज्ञानिक मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों की एक प्रारंभिक समन्वय बैठक अगले कुछ दिनों के भीतर बुलाई जाएगी। यह कदम योजनाओं के धरातल पर उतरने की प्रक्रिया को गति देने के लिए उठाया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर राज्यों में इनकी पहुँच और उपयोग दर असमान रही है — पश्चिम बंगाल में इनका प्रभावी क्रियान्वयन पहले सीमित रहा है। आर्सेनिक विषाक्तता का मुद्दा दशकों पुराना है और CSIR-स्तरीय अध्ययन की घोषणा स्वागत योग्य है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि यह अध्ययन ज़मीनी राहत में कब और कैसे तब्दील होता है। समन्वय बैठक की समयसीमा 'अगले कुछ दिनों' तक सीमित रखना और ठोस बजट या लक्ष्य का उल्लेख न होना इस घोषणा की सबसे बड़ी कमज़ोरी है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में कौन-सी केंद्रीय विज्ञान योजनाएँ लागू होंगी?
इंस्पायर, विज्ञान ज्योति और किरण सहित विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की सभी प्रमुख छात्र-केंद्रित और महिला-केंद्रित योजनाएँ पश्चिम बंगाल में समन्वित तरीके से लागू की जाएंगी। इसके अलावा नवाचार और स्टार्टअप से जुड़ी केंद्रीय योजनाएँ भी शामिल हैं।
पश्चिम बंगाल में आर्सेनिक अध्ययन क्यों शुरू किया जा रहा है?
पश्चिम बंगाल के कई जिलों में भूजल में आर्सेनिक की अधिक मात्रा एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या रही है। CSIR संस्थानों के माध्यम से प्रभावित जिलों में विशेष अध्ययन शुरू करने का निर्णय इसी समस्या के वैज्ञानिक समाधान की दिशा में उठाया गया कदम है।
कैंसर और रोगाणुरोधी अनुसंधान में कौन-से संस्थान शामिल होंगे?
इस सहयोगात्मक अनुसंधान में प्रमुख वैज्ञानिक संस्थान, सरकारी मेडिकल कॉलेज, कैंसर अस्पताल और एम्स से जुड़े मेडिकल नेटवर्क शामिल होंगे। इसका उद्देश्य नैदानिक एवं दवा परीक्षण अनुसंधान को साझा मंच पर आगे बढ़ाना है।
इन योजनाओं के कार्यान्वयन का अगला कदम क्या होगा?
बैठक में तय हुआ कि अगले कुछ दिनों के भीतर राज्य के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग तथा केंद्रीय वैज्ञानिक मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों की एक प्रारंभिक समन्वय बैठक बुलाई जाएगी, जो कार्यान्वयन का रोडमैप तैयार करेगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने पश्चिम बंगाल की वैज्ञानिक क्षमता के बारे में क्या कहा?
डॉ. सिंह ने कहा कि पश्चिम बंगाल के पास एक मज़बूत वैज्ञानिक और शैक्षणिक पारिस्थितिकी तंत्र है और यहाँ वैज्ञानिक संस्थानों, स्वास्थ्य सेवा और नवाचार के संयोजन से पूर्वी भारत में विज्ञान-आधारित क्षेत्रीय विकास का एक नया मॉडल तैयार किया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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