क्या छगन भुजबल को मिली बड़ी राहत? ईडी के मामले में कोर्ट ने निर्दोष करार दिया

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क्या छगन भुजबल को मिली बड़ी राहत? ईडी के मामले में कोर्ट ने निर्दोष करार दिया

सारांश

छगन भुजबल को मिली कोर्ट से बड़ी राहत, ईडी के मामले में उन्हें निर्दोष करार दिया गया। जानिए इस मामले की खास बातें और क्या होगा आगे।

मुख्य बातें

छगन भुजबल को कोर्ट से राहत मिली।
कोर्ट ने कहा कि मूल अपराध साबित नहीं हुआ।
ईडी की कार्रवाई को खारिज किया गया।

मुंबई, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र सदन घोटाले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख नेता छगन भुजबल को एक महत्वपूर्ण राहत मिली है। एंटी करप्शन ब्यूरो के बाद, अब प्रवर्तन निदेशालय के मामले में भी कोर्ट ने उन्हें निर्दोष करार दिया है।

विशेष कोर्ट ने छगन भुजबल और अन्य आरोपियों की डिस्चार्ज (निर्दोष मुक्तता) की याचिका को स्वीकृति दे दी है। यह निर्णय विशेष कोर्ट के न्यायाधीश सत्यनारायण नवंदर ने सुनाया।

कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जब इस मामले में कोई प्रेडिकेट ऑफेंस (मूल अपराध) अस्तित्व में नहीं है, तो उसके आधार पर ईडी का मनी लॉन्ड्रिंग का मामला भी नहीं टिक सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने ईडी की कार्रवाई को खारिज करते हुए भुजबल और अन्य आरोपियों को बरी कर दिया।

वास्तव में, महाराष्ट्र सदन घोटाले से संबंधित मामले में पहले ही एसीबी द्वारा दर्ज केस में भुजबल को राहत मिल चुकी थी। ईडी ने उसी मामले को आधार बनाकर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था, लेकिन अब कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब मूल अपराध ही साबित नहीं होता, तो ईडी की जांच और केस की कोई कानूनी आधार नहीं होती।

कानून के अनुसार, यदि मूल अपराध समाप्त हो जाता है या आरोपी बरी हो जाता है, तो उस आधार पर ईडी का मनी लॉन्ड्रिंग का मामला भी नहीं टिक सकता।

यह मामला वर्ष 2005 का है, जब छगन भुजबल राज्य के उपमुख्यमंत्री और लोक निर्माण मंत्री के पद पर थे। उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने बिना किसी बोली प्रक्रिया के दिल्ली में महाराष्ट्र सदन के निर्माण का ठेका चमनकर एंटरप्राइजेज को दे दिया था। जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया था कि भुजबल ने अपने पद का दुरुपयोग करके अपने परिवार और अपनी स्वामित्व वाली कंपनियों को आर्थिक लाभ पहुंचाया था।

11 जून, 2015 को काला धन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दो मामले दर्ज किए गए थे। छगन भुजबल के साथ समीर भुजबल, पंकज भुजबल और 52 अन्य लोग भी इसमें शामिल थे। आरोप था कि छगन भुजबल ने विभिन्न कंपनियों के माध्यम से लगभग 13.5 करोड़ रुपए की रिश्वत ली थी।

मार्च 2016 में ईडी ने छगन भुजबल से 10 घंटे तक पूछताछ की और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उन्हें 2016 से 2018 के बीच लगभग दो साल जेल में बिताने पड़े थे।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो आगे की कोई कार्रवाई भी वैध नहीं हो सकती। यह सभी के लिए एक महत्वपूर्ण पाठ है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छगन भुजबल को मिली राहत का क्या कारण है?
कोर्ट ने कहा कि इस मामले में कोई मूल अपराध साबित नहीं हुआ, इसलिए ईडी का मामला भी नहीं टिक सकता।
क्या छगन भुजबल को पहले भी राहत मिली थी?
हाँ, एसीबी द्वारा दर्ज केस में भी उन्हें पहले राहत मिली थी।
इस मामले में आगे क्या होगा?
कोर्ट के निर्णय के बाद ईडी की कार्रवाई को चुनौती दी जा सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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