गरियाबंद में खाद संकट: किसानों ने NH-30 जाम किया, डीएपी-यूरिया की कमी पर सरकार को चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में डीएपी और यूरिया खाद की गंभीर किल्लत से त्रस्त किसानों ने 30 मई 2026 को पाण्डुका में नेशनल हाईवे 30 पर चक्का जाम कर दिया। करीब दो घंटे तक यातायात पूरी तरह ठप रहा और प्रदर्शनकारी किसानों ने राज्य सरकार तथा क्षेत्रीय विधायक के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
मुख्य घटनाक्रम
खरीफ फसल की बुवाई का यह सबसे अहम मौसम है, लेकिन किसानों का आरोप है कि सहकारी समितियों और खाद केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान खाद के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। प्रदर्शन में शामिल एक किसान ने बताया कि उनके पास 3 एकड़ खेत है, जबकि उन्हें मात्र 2 बोरी खाद ही मिली है — जो खेती के लिए बिल्कुल नाकाफी है।
किसानों की माँग है कि सरकार प्रति एकड़ कम से कम 2 बोरी यूरिया और 2 बोरी डीएपी उपलब्ध कराए। उनका कहना है कि पहले की सरकारों में खाद की पर्याप्त आपूर्ति होती थी, लेकिन अब स्थिति बिगड़ती जा रही है।
कालाबाजारी की शिकायतें
खाद की अनुपलब्धता के बीच कथित तौर पर कालाबाजारी और अवैध रूप से अधिक कीमत पर खाद बेचने की शिकायतें भी सामने आई हैं। किसानों के अनुसार कुछ व्यापारी उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर मनमाने दाम वसूल रहे हैं। इसका सबसे अधिक नुकसान छोटे और गरीब किसानों को हो रहा है, जिनकी आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर है।
किसानों की माँगें
प्रदर्शनकारी किसानों ने छत्तीसगढ़ सरकार और मुख्यमंत्री से निम्नलिखित माँगें रखी हैं:
सभी सहकारी समितियों एवं खाद केंद्रों पर पर्याप्त खाद की तत्काल उपलब्धता; उचित मूल्य पर समय पर वितरण सुनिश्चित करना; कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई; जरूरतमंद किसानों को प्राथमिकता के आधार पर आपूर्ति; और खाद संकट से निपटने के लिए विशेष आपूर्ति अभियान चलाना।
सरकार की प्रतिक्रिया
फिलहाल राज्य सरकार या कृषि विभाग की ओर से इस प्रदर्शन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह ऐसे समय में आया है जब खरीफ सीजन 2026 की बुवाई पूरे प्रदेश में शुरू हो चुकी है और खाद की माँग अपने चरम पर है।
आगे क्या होगा
किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी माँगें जल्द पूरी नहीं की गईं तो बड़े आंदोलन और व्यापक प्रदर्शन किए जाएँगे। गरियाबंद जिले में यह असंतोष आने वाले दिनों में और गहरा हो सकता है, खासकर तब जब बुवाई की समयसीमा निकलती जा रही है।