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एमएसपी खरीद में बड़ा कदम: छत्तीसगढ़ में बढ़ोतरी, बिहार में पहली बार मसूर दाल की संगठित खरीद शुरू

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एमएसपी खरीद में बड़ा कदम: छत्तीसगढ़ में बढ़ोतरी, बिहार में पहली बार मसूर दाल की संगठित खरीद शुरू

सारांश

केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ में एमएसपी खरीद तेज की और बिहार में पहली बार मसूर दाल की संगठित सरकारी खरीद शुरू की। 32,000 MT लक्ष्य के साथ 59 किसान जुड़े, 100.4 MT खरीद पूरी। एनसीसीएफ और नैफेड दोनों राज्यों में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।

मुख्य बातें

छत्तीसगढ़ में पीएम-आशा योजना के तहत एमएसपी खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि, 85 पीएसीएस केंद्र सक्रिय।
बिहार में पहली बार एनसीसीएफ द्वारा मसूर दाल की संगठित सरकारी खरीद शुरू, 32,000 मीट्रिक टन का लक्ष्य।
बिहार में 16 पीएसीएस/एफपीओ पंजीकृत, 59 किसान जुड़े और 100.4 मीट्रिक टन खरीद पूरी।
सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के डब्ल्यूडीआरए-मान्यता प्राप्त गोदामों में वैज्ञानिक भंडारण सुनिश्चित।
'ई-सम्युक्ति पोर्टल' से किसानों की डिजिटल भागीदारी बढ़ाई जा रही है, दूरदर्शन से जागरूकता अभियान।
जल्द ही सरगुजा, कोंडागांव और कोरिया जिलों में भी खरीद विस्तार की योजना।

नई दिल्ली, 23 अप्रैल 2025 — केंद्र सरकार ने गुरुवार को घोषणा की कि छत्तीसगढ़ में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसल खरीद को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया गया है। इसके साथ ही बिहार में 'आत्मनिर्भर दलहन मिशन' के अंतर्गत पहली बार मसूर दाल की संगठित सरकारी खरीद का शुभारंभ किया गया है। यह पहल देश की खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने और किसानों को उचित मूल्य दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।

छत्तीसगढ़ में एमएसपी खरीद को मिली रफ्तार

छत्तीसगढ़ सरकार ने पीएम-आशा योजना के तहत एमएसपी खरीद प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ किया है। इस कार्य में नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनसीसीएफ) और नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (नैफेड) अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।

राज्य में 85 पीएसीएस केंद्र फिलहाल सक्रिय हैं और धमतरी, दुर्ग, बालोद, बलौदाबाजार, रायपुर, रायगढ़ और सारंगढ़ जिलों में खरीद जारी है। शीघ्र ही सरगुजा, कोंडागांव और कोरिया जिलों में भी यह प्रक्रिया विस्तारित की जाएगी।

'ई-सम्युक्ति पोर्टल' के माध्यम से किसानों की डिजिटल भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा रहा है। दूरदर्शन सहित अन्य माध्यमों से जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं ताकि अधिक से अधिक किसान इस योजना का लाभ उठा सकें।

बिहार में ऐतिहासिक पहल: पहली बार मसूर की संगठित खरीद

एनसीसीएफ ने बिहार में पहली बार मसूर दाल की संगठित सरकारी खरीद शुरू की है। 22 अप्रैल 2026 तक 32,000 मीट्रिक टन मसूर खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

अब तक 16 पीएसीएस/एफपीओ पंजीकृत किए जा चुके हैं और 59 किसानों को इस योजना से जोड़ा गया है। प्रारंभिक चरण में 100.4 मीट्रिक टन मसूर की खरीद सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है।

नैफेड भी राज्य में अपने नेटवर्क के जरिए 'प्राइस सपोर्ट स्कीम' के तहत खरीद को और विस्तार देने की तैयारी में है, जिससे किसानों को और अधिक लाभ मिलेगा।

वैज्ञानिक भंडारण और डिजिटल पारदर्शिता

उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार, यह पहल उन्नत वैज्ञानिक भंडारण प्रणाली से जुड़ी है। सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के सहयोग से डब्ल्यूडीआरए-मान्यता प्राप्त गोदामों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे अनाज की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

खरीद से संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म और बुनियादी ढांचे के विस्तार से प्रक्रिया में पारदर्शिता, दक्षता और किसानों तक पहुंच में और सुधार की उम्मीद है।

आत्मनिर्भर भारत और खाद्य सुरक्षा की दिशा में प्रयास

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ये सभी कदम एमएसपी आधारित खरीद व्यवस्था को सशक्त बनाने, किसानों को उचित मूल्य दिलाने और उन्हें औपचारिक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने के उद्देश्य से उठाए गए हैं।

एनसीसीएफ और नैफेड दोनों संस्थाओं ने दोनों राज्यों में अपने कार्यों को और विस्तार देने की प्रतिबद्धता जताई है। इससे न केवल देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि बाजार में कीमतों को स्थिर रखने में भी सहायता मिलेगी।

आने वाले महीनों में छत्तीसगढ़ के नए जिलों और बिहार में खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाने की योजना है, जो 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो अन्य राज्यों में भी इसका विस्तार 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में पहली बार मसूर दाल की संगठित खरीद कब और किसने शुरू की?
बिहार में पहली बार मसूर दाल की संगठित सरकारी खरीद एनसीसीएफ ने 'आत्मनिर्भर दलहन मिशन' के तहत अप्रैल 2025 में शुरू की। 22 अप्रैल 2026 तक 32,000 मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य रखा गया है और अब तक 100.4 मीट्रिक टन की खरीद पूरी हो चुकी है।
छत्तीसगढ़ में एमएसपी खरीद के लिए कौन से जिले शामिल हैं?
छत्तीसगढ़ में धमतरी, दुर्ग, बालोद, बलौदाबाजार, रायपुर, रायगढ़ और सारंगढ़ जिलों में एमएसपी खरीद जारी है। जल्द ही सरगुजा, कोंडागांव और कोरिया जिलों में भी यह प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
पीएम-आशा योजना क्या है और इसका किसानों को क्या फायदा है?
पीएम-आशा (प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान) योजना के तहत सरकार किसानों की फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदती है। इससे किसानों को बाजार में कीमत गिरने पर भी उचित मूल्य मिलता है और वे आर्थिक नुकसान से बचते हैं।
एनसीसीएफ और नैफेड की इस खरीद प्रक्रिया में क्या भूमिका है?
एनसीसीएफ बिहार में मसूर दाल की संगठित खरीद और छत्तीसगढ़ में एमएसपी खरीद में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। नैफेड 'प्राइस सपोर्ट स्कीम' के तहत बिहार में खरीद नेटवर्क विस्तार की तैयारी कर रहा है।
बिहार में मसूर खरीद के लिए कितने किसान और केंद्र पंजीकृत हैं?
बिहार में मसूर खरीद के लिए अब तक 16 पीएसीएस/एफपीओ पंजीकृत किए गए हैं और 59 किसानों को योजना से जोड़ा गया है। सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के डब्ल्यूडीआरए-मान्यता प्राप्त गोदामों में वैज्ञानिक भंडारण की व्यवस्था की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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