कृषि मंत्री शाही ने बताया: 7 अप्रैल से एमएसपी पर दलहन-तिलहन की खरीद होगी शुरू
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। रबी सीजन 2026-27 के दौरान किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ मिलने जा रहा है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने मंगलवार को लोक भवन में मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि चना, मसूर, और सरसों की खरीद प्रक्रिया 7 अप्रैल से 30 जून तक चलेगी।
इस अवधि में पारदर्शी डिजिटल प्रणाली, डीबीटी भुगतान और विस्तृत खरीद नेटवर्क के माध्यम से किसानों को सीधा लाभ पहुंचाने का उद्देश्य है। सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानों की आय में वृद्धि, फसलों का उचित मूल्य सुनिश्चित करने और कृषि क्षेत्र को सशक्त करने हेतु निरंतर प्रयासरत है।
एमएसपी पर दलहन और तिलहन की खरीद की इस योजना से किसानों को लाभ होगा और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि प्रदेश में उर्वरक की कोई कमी नहीं है और 75 जनपदों में उर्वरकों की आपूर्ति सुचारु रूप से हो रही है। कृषि मंत्री ने कहा कि मूल्य समर्थन योजना किसानों के लिए सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करती है। चने का एमएसपी 5875 रुपये प्रति क्विंटल, मसूर का 7000 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों का 6200 रुपये प्रति क्विंटल और अरहर का 8000 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जिससे किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य प्राप्त हो सके।
सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार ने फसलों की खरीद के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय किए हैं। उन्होंने बताया कि चने के लिए 2.24 लाख मीट्रिक टन, मसूर के लिए 6.77 लाख मीट्रिक टन, और सरसों के लिए 5.30 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य रखा गया है। कृषि मंत्री ने कहा कि इस वर्ष एमएसपी दरों में वृद्धि कर किसानों को अतिरिक्त लाभ देने का प्रयास किया गया है। उन्होंने बताया कि चने पर 225 रुपये, मसूर पर 300 रुपये और सरसों पर 250 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है, जिससे किसानों की आय में सीधा इजाफा होगा।
सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है और एमएसपी में यह वृद्धि उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कृषि मंत्री ने बताया कि खरीद प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी बनाने के लिए सभी क्रय केंद्रों पर आधार-सक्षम पीओएस मशीनें स्थापित की गई हैं। इससे वास्तविक किसानों की पहचान सुनिश्चित होगी और किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना समाप्त होगी। किसानों को उपज का भुगतान सीधे डीबीटी के माध्यम से उनके आधार-लिंक्ड बैंक खातों में भेजा जाएगा, जिससे भुगतान प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी।
कृषि मंत्री ने बताया कि इस वर्ष खरीद व्यवस्था को और मजबूती देने के लिए बड़ी संख्या में क्रय केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव है। भारत सरकार की एजेंसियां नैफेड और एनसीसीएफ राज्य की 5 एजेंसियों यूपीपीसीयू, यूपीपीसीएफ, जैफेड और यूपीएसएस के माध्यम से किसानों से उपज खरीदकर सप्लाई करेंगी, जिसका लाभ किसानों को सीधे उनके खातों में वितरित किया जाएगा। इन एजेंसियों के समन्वय से खरीद प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और व्यापक बनाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें।
सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि प्रदेश में कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। वर्ष 2025-26 में कृषि विभाग द्वारा लगभग 5700 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि विभिन्न योजनाओं पर खर्च की गई, जो कि एक रिकॉर्ड उपलब्धि है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधारात्मक प्रावधान लागू करने से राज्य को 303 करोड़ रुपये की बचत हुई है।
कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों को सशक्त बनाने के लिए बड़े पैमाने पर बीज वितरण किया गया है। 11.25 लाख किसानों को 50 फीसदी अनुदान पर बीज प्रदान किया गया, जबकि 12.73 लाख किसानों को मुफ्त बीज वितरित किए गए। जायद फसलों को बढ़ावा देने के लिए इस वर्ष 31,950 क्विंटल बीज उपलब्ध कराया गया, जिसमें मूंगफली, उड़द और मूंग शामिल हैं। राज्य में किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उर्वरकों की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में राज्य में कुल 25.41 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है, जो सभी 75 जनपदों में संतुलित रूप से वितरित किया गया है।
उपलब्ध उर्वरकों में 11.26 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 5.08 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 4.64 लाख मीट्रिक टन एनपीके, 3.45 लाख मीट्रिक टन एसएसपी तथा 98 हजार मीट्रिक टन पोटाश (एमओपी) शामिल हैं। यह मात्रा किसानों की वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है और किसी भी जिले में कमी की स्थिति नहीं है। उर्वरकों का वितरण पूरी तरह से डिजिटल प्रणाली के माध्यम से किया जा रहा है। पीओएस मशीनों के जरिए अब तक 63.34 लाख मीट्रिक टन उर्वरक किसानों को वितरित किया जा चुका है।
कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार ने अग्रिम योजना के तहत उर्वरकों का भंडारण भी किया है, ताकि आने वाले खरीफ सीजन में भी किसी प्रकार की कमी न हो। साथ ही वैज्ञानिकों की सलाह के आधार पर प्रति हेक्टेयर उर्वरक उपयोग के मानक तय किए गए हैं, जिससे संतुलित उपयोग को बढ़ावा मिल सके। कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, क्योंकि प्रदेश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। सरकार लगातार इसकी निगरानी कर रही है, ताकि हर किसान को समय पर उर्वरक मिल सके।
कृषि मंत्री ने बताया कि प्रदेश को बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए “भारत रत्न चौधरी चरण सिंह सीड पार्क” की स्थापना की जा रही है। इसके विकास के लिए 50.84 करोड़ रुपये की धनराशि यूपीसीडा को दी जा चुकी है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि लगभग दो करोड़ किसानों ने फॉर्मर रजिस्ट्री कराई है, जबकि 50 लाख किसान ऐसे हैं, जिन्होंने अब तक फॉर्मर रजिस्ट्री नहीं कराई है। उन्होंने प्रदेश के ऐसे किसानों से अनुरोध किया कि केंद्र और राज्य सरकार की लाभकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए 15 मई तक फॉर्मर रजिस्ट्री अवश्य करा लें।