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चार राज्यों में दाल-तिलहन की एमएसपी खरीद को मंजूरी, उत्तर प्रदेश को ₹1,490 करोड़ से अधिक का लाभ

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चार राज्यों में दाल-तिलहन की एमएसपी खरीद को मंजूरी, उत्तर प्रदेश को ₹1,490 करोड़ से अधिक का लाभ

सारांश

केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु और हरियाणा में दाल-तिलहन की एमएसपी खरीद को मंजूरी दी है। अकेले उत्तर प्रदेश में ₹1,490 करोड़ से अधिक की खरीद होगी — यह बाज़ार दबाव में फँसे किसानों को सीधी राहत देने का सरकार का ताज़ा कदम है।

मुख्य बातें

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 19 जून 2026 को चार राज्यों में दाल-तिलहन की एमएसपी खरीद को मंजूरी दी।
उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा लाभार्थी — 48,298 मीट्रिक टन मूंग , 97,970 मीट्रिक टन उड़द और 41,718 मीट्रिक टन मूंगफली की खरीद; कुल एमएसपी मूल्य ₹1,490 करोड़ से अधिक ।
गुजरात में 18,250 मीट्रिक टन मूंग की खरीद; एमएसपी मूल्य ₹160 करोड़ से अधिक ।
हरियाणा में 2,115 मीट्रिक टन मूंग ; एमएसपी मूल्य ₹18 करोड़ से अधिक ।
तमिलनाडु में रबी विपणन सत्र 2025-26 के तहत मूंग खरीद सीमा 885 से बढ़ाकर 990 मीट्रिक टन ; एमएसपी मूल्य ₹8.68 करोड़ ।
सभी खरीद मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के अंतर्गत राज्य नोडल एजेंसियों के ज़रिये होगी।

केंद्र सरकार ने 19 जून 2026 को तमिलनाडु, गुजरात, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में दालों और तिलहनों की बड़े पैमाने पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) खरीद को हरी झंडी दी है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि यह खरीद मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के अंतर्गत की जाएगी, जिससे किसानों को बाज़ार में कीमतों के दबाव से राहत मिलेगी और उन्हें अपनी उपज औने-पौने दाम पर बेचने की मजबूरी से बचाया जा सकेगा।

उत्तर प्रदेश को सबसे बड़ा हिस्सा

उत्तर प्रदेश इस योजना का सबसे बड़ा लाभार्थी राज्य बना है। ग्रीष्मकालीन 2026 सीजन के लिए राज्य में 48,298 मीट्रिक टन मूंग, 97,970 मीट्रिक टन उड़द और 41,718 मीट्रिक टन मूंगफली की खरीद को स्वीकृति दी गई है। इन सभी स्वीकृतियों का संयुक्त एमएसपी मूल्य ₹1,490 करोड़ से अधिक है, जो राज्य के दाल और तिलहन उत्पादक किसानों के लिए सीधा आर्थिक सहारा बनेगा।

गुजरात और हरियाणा के लिए स्वीकृतियाँ

गुजरात में ग्रीष्मकालीन 2026 सीजन के तहत 18,250 मीट्रिक टन मूंग की खरीद को मंजूरी दी गई है, जिसका कुल एमएसपी मूल्य ₹160 करोड़ से अधिक होगा। इस निर्णय से राज्य के मूंग उत्पादकों को बाज़ार में बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है।

हरियाणा के लिए ग्रीष्मकालीन 2026 सीजन में 2,115 मीट्रिक टन मूंग की खरीद को स्वीकृति मिली है। कृषि मंत्रालय के अनुसार, इस खरीद का कुल एमएसपी मूल्य ₹18 करोड़ से अधिक होगा, जो राज्य के किसानों को मूल्य समर्थन देने में सहायक सिद्ध होगा।

तमिलनाडु में खरीद सीमा बढ़ाई गई

तमिलनाडु के लिए रबी विपणन सत्र 2025-26 के अंतर्गत मूंग की खरीद सीमा 885 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 990 मीट्रिक टन कर दी गई है। इस संशोधन से अतिरिक्त 105 मीट्रिक टन मूंग की खरीद होगी और स्वीकृत खरीद का कुल एमएसपी मूल्य ₹8.68 करोड़ है।

मूल्य समर्थन योजना की भूमिका

गौरतलब है कि मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) केंद्र सरकार का वह तंत्र है जिसके ज़रिये राज्यों में बाज़ार भाव एमएसपी से नीचे गिरने पर सरकारी एजेंसियाँ सीधे किसानों से उपज खरीदती हैं। यह कदम ऐसे समय में आया है जब दाल और तिलहन उत्पादक राज्यों में कई जिलों में बाज़ार कीमतें एमएसपी के आसपास या उससे नीचे दर्ज की गई हैं।

आगे क्या होगा

कृषि मंत्रालय के अनुसार, खरीद प्रक्रिया संबंधित राज्य सरकारों और नोडल एजेंसियों के माध्यम से शुरू की जाएगी। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह फैसला किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। आने वाले हफ्तों में खरीद केंद्र सक्रिय होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

नीतिगत दूरदर्शिता का परिणाम कम। असली सवाल यह है कि क्या खरीद केंद्र समय पर सक्रिय होंगे और क्या छोटे व सीमांत किसान — जो अक्सर बिचौलियों के ज़रिये बेचते हैं — इसका लाभ सीधे उठा पाएँगे। पिछले वर्षों का अनुभव बताता है कि पीएसएस की घोषणाएँ और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई अक्सर किसान को राहत से वंचित रखती है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) क्या है और यह किसानों की कैसे मदद करती है?
मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) केंद्र सरकार की वह व्यवस्था है जिसके तहत जब बाज़ार में दाल, तिलहन या अन्य फसलों का भाव एमएसपी से नीचे गिरता है, तो सरकारी एजेंसियाँ सीधे किसानों से एमएसपी पर खरीद करती हैं। इससे किसानों को मजबूरी में सस्ते दाम पर फसल बेचने से बचाया जाता है।
उत्तर प्रदेश में किन फसलों की और कितनी खरीद को मंजूरी मिली है?
उत्तर प्रदेश में ग्रीष्मकालीन 2026 सीजन के लिए 48,298 मीट्रिक टन मूंग, 97,970 मीट्रिक टन उड़द और 41,718 मीट्रिक टन मूंगफली की खरीद को मंजूरी दी गई है। इन सभी की संयुक्त एमएसपी कीमत ₹1,490 करोड़ से अधिक है।
गुजरात, हरियाणा और तमिलनाडु के किसानों को इस फैसले से कितना लाभ मिलेगा?
गुजरात में 18,250 मीट्रिक टन मूंग की खरीद का एमएसपी मूल्य ₹160 करोड़ से अधिक है; हरियाणा में 2,115 मीट्रिक टन मूंग के लिए ₹18 करोड़ से अधिक; और तमिलनाडु में रबी विपणन सत्र 2025-26 के तहत मूंग खरीद सीमा 885 से बढ़ाकर 990 मीट्रिक टन की गई है, जिसका एमएसपी मूल्य ₹8.68 करोड़ है।
यह खरीद कब और कैसे होगी?
खरीद मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत संबंधित राज्य सरकारों और उनकी नोडल एजेंसियों के माध्यम से की जाएगी। कृषि मंत्रालय के अनुसार, आने वाले हफ्तों में खरीद केंद्र सक्रिय होने की उम्मीद है।
क्या इस तरह की एमएसपी खरीद पहले भी हुई है?
हाँ, मूल्य समर्थन योजना के तहत पिछले कई वर्षों से खरीफ और रबी सीजन में दाल व तिलहन की खरीद होती रही है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वयन में देरी और खरीद केंद्रों की सीमित पहुँच के कारण छोटे किसान अक्सर इसका पूरा लाभ नहीं उठा पाते।
राष्ट्र प्रेस
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