12 अक्टूबर 2026
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सीजेआई के इनकार पर संजय निरुपम का स्वागत, राहुल गांधी पर लगाया संवैधानिक शिष्टाचार तोड़ने का आरोप

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सीजेआई के इनकार पर संजय निरुपम का स्वागत, राहुल गांधी पर लगाया संवैधानिक शिष्टाचार तोड़ने का आरोप

सारांश

सीजेआई ने राहुल गांधी नेतृत्व वाले विपक्षी शिष्टमंडल से मिलने से इनकार किया — और शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने इसे 'प्रशंसनीय कदम' बताया। राहुल गांधी पर राष्ट्रपति को 'झूठे नैरेटिव' में घसीटने का आरोप लगाते हुए निरुपम ने विपक्ष से संवैधानिक संस्थाओं को राजनीति से दूर रखने की अपील की।

मुख्य बातें

सीजेआई ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी शिष्टमंडल से मिलने से इनकार किया।
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 12 अक्टूबर 2026 को मुंबई में सीजेआई के इस फैसले का स्वागत किया।
निरुपम ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को 'वोट चोरी' के फर्जी नैरेटिव में घसीटने की कोशिश की थी।
निरुपम के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मिलने का उचित माध्यम याचिका है, राजनीतिक शिष्टमंडल नहीं।
उन्होंने विपक्ष से अपील की कि राष्ट्रपति और सीजेआई को राजनीतिक विवादों से दूर रखा जाए।

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 12 अक्टूबर 2026 को मुंबई में भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) द्वारा कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों के शिष्टमंडल से मिलने से इनकार किए जाने के फैसले का खुलकर स्वागत किया। निरुपम ने कहा कि सीजेआई ने विपक्ष के कथित राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा बनने से मना कर एक प्रशंसनीय कदम उठाया है।

मुख्य घटनाक्रम

निरुपम के अनुसार, विपक्षी दलों के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मिलने की इच्छा जताई जा रही थी, जिसे मुख्य न्यायाधीश ने अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा, 'भारत के मुख्य न्यायाधीश ने विपक्षी नेताओं के राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा बनने से मना कर दिया है। निश्चित तौर पर यह बहुत ही प्रशंसनीय कदम है।'

राहुल गांधी पर आरोप

शिवसेना प्रवक्ता ने राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लगातार झूठ बोलते रहे हैं — विशेषकर तब, जब वे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिलकर बाहर आते हैं और कहते हैं कि राष्ट्रपति उनके 'वोट चोरी' के नैरेटिव से सहमत हैं। निरुपम के अनुसार, यह सरासर असत्य था और राष्ट्रपति को राजनीतिक कीचड़ में घसीटने की 'घिनौनी कोशिश' थी।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के साथ इस तरह के 'खिलवाड़' को देखते हुए भारत में संवैधानिक पदों पर बैठे सभी लोगों को यह अधिकार मिल गया है कि वे ऐसे व्यक्ति से मिलने से इनकार कर सकते हैं जो 'झूठ पर आधारित नैरेटिव' चलाता हो।

संवैधानिक शिष्टाचार का सवाल

निरुपम ने सीजेआई के इनकार का दूसरा कारण संवैधानिक शिष्टाचार बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पास शिकायत या असहमति दर्ज करने का माध्यम याचिका है, न कि राजनीतिक शिष्टमंडल। उन्होंने कहा, 'अगर मुख्य न्यायाधीश अलग-अलग प्रदर्शनकारियों के शिष्टमंडल से मिलने लगे तो उनकी बेंच का क्या होगा?'

उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी के सलाहकारों को इतनी समझ नहीं है कि 'संवैधानिक शिष्टाचार क्या होता है' और वे अपने नेताओं को यह नहीं समझा पाए कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पास इस तरह शिष्टमंडल लेकर नहीं जाया जाता।

विपक्ष से अपील

शिवसेना प्रवक्ता ने कहा कि राष्ट्रपति और मुख्य न्यायाधीश को राजनीति से ऊपर रखने की ज़िम्मेदारी केवल सत्तारूढ़ पक्ष की नहीं, बल्कि विपक्ष की भी है। उन्होंने विपक्ष के सभी नेताओं से अपील की कि वे इन संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को अपनी 'राजनीति के कीचड़ में न घसीटें।'

गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल केंद्र सरकार और न्यायपालिका के बीच संबंधों को लेकर सक्रिय हैं। संवैधानिक संस्थाओं तक पहुँच और राजनीतिक शिष्टमंडलों के औचित्य पर यह बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पक्षधर दृष्टिकोण के रूप में पढ़ा जाना चाहिए। असली सवाल यह है कि क्या विपक्षी दलों द्वारा सीजेआई से मिलने का प्रयास वास्तव में संवैधानिक शिष्टाचार का उल्लंघन था, या यह एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा था जिसे सीजेआई ने अपने विवेक से अस्वीकार किया। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस बारीकी को छोड़ देती है — कि सीजेआई का इनकार और निरुपम का स्वागत दोनों अलग-अलग घटनाएँ हैं, और दोनों को मिलाकर एक ही राजनीतिक रंग देना जल्दबाजी होगी।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीजेआई ने विपक्षी शिष्टमंडल से मिलने से क्यों इनकार किया?
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम के अनुसार, सीजेआई ने राहुल गांधी के नेतृत्व वाले विपक्षी शिष्टमंडल से मिलने से इसलिए इनकार किया क्योंकि मुख्य न्यायाधीश के पास शिकायत या असहमति दर्ज करने का उचित माध्यम याचिका है, न कि राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल। हालाँकि सीजेआई की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
संजय निरुपम ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाए?
निरुपम ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिलने के बाद सार्वजनिक रूप से कहा था कि राष्ट्रपति उनके 'वोट चोरी' के नैरेटिव से सहमत हैं, जिसे निरुपम ने 'सरासर झूठ' और राष्ट्रपति को राजनीतिक विवाद में घसीटने की कोशिश बताया। ये आरोप निरुपम के अपने वक्तव्य हैं और इन्हें कांग्रेस ने स्वीकार नहीं किया है।
क्या सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से राजनीतिक शिष्टमंडल मिल सकता है?
संवैधानिक परंपरा के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल मिलना असामान्य माना जाता है। निरुपम ने यह भी कहा कि यदि मुख्य न्यायाधीश विभिन्न प्रदर्शनकारी शिष्टमंडलों से मिलने लगें, तो उनकी न्यायिक बेंच की स्वतंत्रता पर प्रश्नचिह्न लग सकता है।
इस विवाद में शिवसेना की भूमिका क्या है?
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने पार्टी की ओर से यह बयान मुंबई में 12 अक्टूबर 2026 को दिया। शिवसेना सत्तारूढ़ गठबंधन की सहयोगी पार्टी है और यह बयान विपक्ष की आलोचना के व्यापक राजनीतिक संदर्भ में आया है।
इस घटना का संवैधानिक संस्थाओं पर क्या असर पड़ सकता है?
यह प्रकरण संवैधानिक संस्थाओं — राष्ट्रपति और मुख्य न्यायाधीश — की राजनीतिक तटस्थता के सवाल को फिर से चर्चा में ले आया है। निरुपम ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से अपील की है कि इन पदों को राजनीतिक विवादों से दूर रखा जाए।
राष्ट्र प्रेस
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