रक्षाबंधन सांस्कृतिक पर्व है, हिजाब से तुलना गलत: संजय निरुपम; कर्नाटक घोटाले पर कांग्रेस को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना के प्रवक्ता संजय निरुपम ने 29 अगस्त को स्पष्ट किया कि रक्षाबंधन भारत का सांस्कृतिक पर्व है और इसे किसी धर्म विशेष से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के उस आदेश का समर्थन किया जिसमें स्कूलों को राखी या मेंहदी के साथ आने वाले बच्चों को रोकने से मना किया गया है। साथ ही निरुपम ने कर्नाटक के वाल्मीकि निगम घोटाले पर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया।
रक्षाबंधन और NHRC का आदेश
निरुपम ने कहा, 'रक्षाबंधन भारत का सांस्कृतिक त्योहार है। इसे किसी धर्म से नहीं जोड़ना चाहिए। जब NHRC के सदस्य स्कूलों को आदेश देते हैं कि अगर कोई बच्चा रक्षाबंधन के दिन राखी बांधकर आता है तो उसे रोकना नहीं चाहिए, उसी तरह अगर लड़कियाँ मेंहदी लगाकर आती हैं — चाहे वो किसी भी धर्म की हों — तो उन्हें भी नहीं रोकना चाहिए।' उनके अनुसार यह आदेश सांस्कृतिक समावेश की भावना को दर्शाता है।
हिजाब विवाद से क्यों अलग है यह मामला
निरुपम ने दोनों विषयों के बीच स्पष्ट रेखा खींचते हुए कहा कि हिजाब एक धार्मिक परंपरा है और उसका संबंध देश की सुरक्षा से भी जुड़ा है। उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस फैसले का उल्लेख किया जिसमें कहा गया है कि मुस्लिम महिलाओं को हिजाब पहनने का अधिकार है, किंतु सार्वजनिक स्थलों, स्कूलों और कॉलेजों में नहीं। शिवसेना नेता के अनुसार, 'धार्मिक आचरण का सार्वजनिक प्रदर्शन उचित नहीं है। मंदिर, मस्जिद और घरों में इसे करने से किसी को आपत्ति नहीं, लेकिन शैक्षणिक संस्थानों को इससे मुक्त रखना ज़रूरी है।' गौरतलब है कि हिजाब विवाद पहले भी कर्नाटक सहित कई राज्यों में कानूनी और सामाजिक बहस का केंद्र रह चुका है।
कर्नाटक वाल्मीकि निगम घोटाला और कांग्रेस पर हमला
निरुपम ने कर्नाटक के मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, 'वाल्मीकि भगवान के नाम पर गठित निगम में घोटाले के चलते मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा। कांग्रेस अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (SC-ST) के हक में बड़े-बड़े भाषण देती है, लेकिन उन्हीं के कल्याण के लिए बने निगम को लूटने से बाज नहीं आती।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के कुछ ही महीनों के भीतर यह घोटाला सामने आया, जिसे उन्होंने 'कांग्रेस के चरित्र का सबसे बड़ा उदाहरण' बताया।
सोनिया गांधी की किताब और प्रकाशन विवाद
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की किताब के प्रकाशन को लेकर उठे बवाल पर निरुपम ने कहा कि यदि पेंगुइन इंडिया किताब छापने से इनकार करता है तो यह उसका अधिकार है। उन्होंने कहा, 'पूरे हिन्दुस्तान में प्रकाशकों की कमी नहीं है। किसी और प्रकाशक से किताब छपवाई जा सकती है। दबाव बनाकर और शोर मचाकर किसी प्रकाशक को बाध्य करना अनुचित है।' उनके अनुसार, इस मुद्दे पर नागरिक स्वतंत्रता की दुहाई देना तर्कसंगत नहीं।
आगे क्या
NHRC के आदेश और हिजाब विवाद पर यह बहस आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है, विशेषकर जब कर्नाटक वाल्मीकि निगम घोटाले की जाँच आगे बढ़ेगी। शिवसेना का यह रुख महायुति गठबंधन की राजनीतिक रणनीति को भी दर्शाता है।