सीजेपी की प्रेस कॉन्फ्रेंस: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप
सारांश
मुख्य बातें
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 11 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के प्रेस क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें पार्टी के सह-संयोजक एवं प्रवक्ता आशुतोष रांका ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगाए। रांका ने दावा किया कि पिछले 72 घंटों में देश में अभूतपूर्व घटनाएं घटी हैं, जिनसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर गहरा सवाल उठता है।
चुनाव आयोग पर आरोप
आशुतोष रांका ने कथित तौर पर आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार निष्पक्षता से समझौता कर चुके हैं और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पक्ष में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी देश को आगे ले जाने और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की है, लेकिन उनके अनुसार यह संस्था अपने मूल दायित्व से भटक गई है। यह आरोप सीजेपी की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दिल्ली पुलिस पर अमानवीय व्यवहार का आरोप
रांका ने बताया कि शनिवार को पार्टी के एक कार्यकर्ता अभिजीत दिपके की दादी का निधन हो गया। उनके अनुसार, जब दिपके को उनकी दादी के निधन की सूचना दी जा रही थी, उस दौरान दिल्ली पुलिस के जवान कैमरे और माइक लेकर वहाँ खड़े रहे।
रांका ने कहा, 'जब दिपके को उनकी दादी की मौत के बारे में बताया गया, तब भी दिल्ली पुलिस के जवान कैमरे और माइक लेकर वहाँ खड़े थे। उन्होंने इस घटना को भी तमाशा बनाने की कोशिश की।' उन्होंने यह भी बताया कि दिपके ने पुलिस से अपने कज़न से बात करने की इजाज़त माँगी, जो उस वक्त गांव में था, लेकिन कथित तौर पर उनकी यह गुज़ारिश भी नहीं मानी गई।
हिरासत और फोन पर सवाल
सीजेपी के एक अन्य नेता सौरव दास ने दावा किया कि हिरासत के दौरान उन्हें आरकेपुरम थाने में रखा गया, जबकि आशुतोष रांका और अभिजीत दिपके को अलग-अलग स्थानों पर रखा गया। सौरव दास ने यह भी आशंका जताई कि पुलिस ने उनके फोन कब्ज़े में लेकर उनकी जाँच की और सबूत प्लांट किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ये आरोप उनके अपने बयानों पर आधारित हैं।
दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
सौरव दास ने दावा किया कि पिछले तीन-चार दिनों में दिल्ली को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। उनके अनुसार, 30,000 से 40,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है, जिनमें नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, बंगाल और कश्मीर सहित सीमावर्ती इलाकों से BSF जवानों को एयरलिफ्ट करके लाया गया है। उन्होंने कहा कि 57 मेट्रो स्टेशन बंद करना, अन्य राज्यों से आने वाली ट्रेनों को रोकना, राजधानी एक्सप्रेस रद्द करना और दुकानें बंद कराना — ये कदम सीधे आम नागरिकों को प्रभावित कर रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्रियों के समर्थन का उल्लेख
आशुतोष रांका ने कहा कि चार पूर्व मुख्यमंत्री — अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, माणिक सरकार और पिनाराई विजयन — शनिवार को छात्रों और युवाओं के साथ सड़कों पर उतरे। सीजेपी ने इनके समर्थन का स्वागत करते हुए इसे लोकतंत्र बचाने की लड़ाई बताया। सौरव दास ने यह भी कहा कि देश में 'खुली इमरजेंसी जैसी स्थिति' है और ऐसे हालात आखिरी बार 1975 में देखे गए थे — यह उनका अपना मत है।