पुरुलिया में ₹4,000 करोड़ के स्टील प्लांट का शिलान्यास, CM सुवेंदु अधिकारी ने प्रवासी मजदूरों को दिया घर वापसी का भरोसा
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार, 17 अगस्त 2026 को पुरुलिया जिले के रघुनाथपुर में ₹4,000 करोड़ की लागत से बनने वाले ग्रीनफील्ड एकीकृत स्टील प्लांट के शिलान्यास समारोह में राज्य के प्रवासी श्रमिकों को वापस बुलाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि बड़े औद्योगिक निवेश के ज़रिये रोज़गार के पर्याप्त अवसर तैयार किए जाएंगे, जिससे मजदूरों को दूसरे राज्यों में जाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।
स्टील प्लांट से क्या मिलेगा
मुख्यमंत्री अधिकारी ने समारोह में घोषणा की कि रघुनाथपुर स्टील प्लांट लगभग 10,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार देगा। उन्होंने कहा, "इलाके के स्थानीय आदिवासी युवाओं को भी नौकरी मिलेगी। इससे पूरे क्षेत्र का विकास होगा।" यह पश्चिम बंगाल का दूसरा ऐसा बड़ा स्टील प्रोजेक्ट है — इससे पहले बांकुरा जिले के मेजिया में ₹15,000 करोड़ की लागत वाले एकीकृत स्टील प्लांट का उद्घाटन किया जा चुका है।
गौरतलब है कि पुरुलिया आदिवासी बहुल जिला है, जहाँ पारंपरिक रूप से रोज़गार के सीमित विकल्पों के कारण बड़ी संख्या में युवा अन्य राज्यों में पलायन करते रहे हैं। इस लिहाज़ से यह शिलान्यास केवल औद्योगिक नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
अन्य प्रमुख घोषणाएं
मुख्यमंत्री ने उसी दिन पुरुलिया के मानबाजार में जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) की सहायता से तैयार पेयजल पाइपलाइन परियोजना का भी उद्घाटन किया। इसके अलावा उन्होंने घोषणा की कि इस्कॉन जल्द ही पुरुलिया जिले के सभी सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन की व्यवस्था शुरू करेगा।
अधिकारी ने कहा, "इस्कॉन द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले भोजन के अलावा सरकारी स्कूलों के छात्रों को सप्ताह में दो बार अंडे भी दिए जाएंगे, जैसा कोलकाता में किया जा रहा है। कोलकाता की तरह मिड डे मील बनाने से जुड़ी महिलाओं की नौकरियां भी सुरक्षित रहेंगी।"
आदिवासी समुदाय के लिए विशेष कदम
मुख्यमंत्री ने एक और अहम ऐलान करते हुए कहा कि इस वर्ष से आदिवासी बहुल बांकुरा और पुरुलिया जिलों में मां मनसा के पर्व पर सरकारी अवकाश रहेगा। आदिवासी समुदायों में सर्पों की देवी मां मनसा की व्यापक पूजा को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। यह कदम आदिवासी सांस्कृतिक पहचान को सरकारी मान्यता देने की दिशा में एक प्रतीकात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
जनकल्याण शिविर और सामाजिक योजनाएं
अधिकारी ने यह भी बताया कि प्रशासन विधवा पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन और दिव्यांगजनों के लिए भत्तों जैसी योजनाओं के आवेदन में सहायता देने हेतु जनकल्याण शिविर आयोजित करेगा। उन्होंने कहा कि पहले ऐसे शिविर लोगों की पहुंच से दूर होते थे, अब इन्हें सुलभ स्थानों पर आयोजित किया जाएगा ताकि अधिकतम लाभार्थी लाभ उठा सकें।
आगे की राह
रघुनाथपुर स्टील प्लांट के चालू होने की समयसीमा अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं की गई है, लेकिन राज्य सरकार का संकेत है कि मेजिया प्लांट की सफलता के बाद यह परियोजना भी प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी। यह देखना होगा कि रोज़गार के वादे ज़मीन पर किस हद तक उतरते हैं और प्रवासी मजदूरों की वापसी वास्तव में किस गति से होती है।