17 अगस्त 2026
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पुरुलिया में ₹4,000 करोड़ के स्टील प्लांट का शिलान्यास, CM सुवेंदु अधिकारी ने प्रवासी मजदूरों को दिया घर वापसी का भरोसा

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पुरुलिया में ₹4,000 करोड़ के स्टील प्लांट का शिलान्यास, CM सुवेंदु अधिकारी ने प्रवासी मजदूरों को दिया घर वापसी का भरोसा

सारांश

पुरुलिया के रघुनाथपुर में ₹4,000 करोड़ के स्टील प्लांट का शिलान्यास बंगाल की औद्योगिक रणनीति का नया अध्याय है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 10,000 रोज़गार और प्रवासी मजदूरों की घर वापसी का वादा किया — यह उस राज्य के लिए बड़ा दांव है जहाँ पलायन दशकों से एक गंभीर समस्या रही है।

मुख्य बातें

CM सुवेंदु अधिकारी ने 17 अगस्त 2026 को पुरुलिया के रघुनाथपुर में ₹4,000 करोड़ के ग्रीनफील्ड एकीकृत स्टील प्लांट का शिलान्यास किया।
प्लांट से लगभग 10,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार मिलने का अनुमान; स्थानीय आदिवासी युवाओं को प्राथमिकता।
यह राज्य का दूसरा बड़ा स्टील प्रोजेक्ट है; बांकुरा के मेजिया में ₹15,000 करोड़ के प्लांट का उद्घाटन पहले ही हो चुका है।
JICA की सहायता से तैयार मानबाजार पेयजल पाइपलाइन परियोजना का उद्घाटन भी उसी दिन किया गया।
पुरुलिया जिले के सरकारी स्कूलों में इस्कॉन द्वारा मध्याह्न भोजन और सप्ताह में दो बार अंडे देने की घोषणा।
बांकुरा और पुरुलिया में मां मनसा पर्व पर इस वर्ष से सरकारी अवकाश की घोषणा।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार, 17 अगस्त 2026 को पुरुलिया जिले के रघुनाथपुर में ₹4,000 करोड़ की लागत से बनने वाले ग्रीनफील्ड एकीकृत स्टील प्लांट के शिलान्यास समारोह में राज्य के प्रवासी श्रमिकों को वापस बुलाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि बड़े औद्योगिक निवेश के ज़रिये रोज़गार के पर्याप्त अवसर तैयार किए जाएंगे, जिससे मजदूरों को दूसरे राज्यों में जाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

स्टील प्लांट से क्या मिलेगा

मुख्यमंत्री अधिकारी ने समारोह में घोषणा की कि रघुनाथपुर स्टील प्लांट लगभग 10,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार देगा। उन्होंने कहा, "इलाके के स्थानीय आदिवासी युवाओं को भी नौकरी मिलेगी। इससे पूरे क्षेत्र का विकास होगा।" यह पश्चिम बंगाल का दूसरा ऐसा बड़ा स्टील प्रोजेक्ट है — इससे पहले बांकुरा जिले के मेजिया में ₹15,000 करोड़ की लागत वाले एकीकृत स्टील प्लांट का उद्घाटन किया जा चुका है।

गौरतलब है कि पुरुलिया आदिवासी बहुल जिला है, जहाँ पारंपरिक रूप से रोज़गार के सीमित विकल्पों के कारण बड़ी संख्या में युवा अन्य राज्यों में पलायन करते रहे हैं। इस लिहाज़ से यह शिलान्यास केवल औद्योगिक नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।

अन्य प्रमुख घोषणाएं

मुख्यमंत्री ने उसी दिन पुरुलिया के मानबाजार में जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) की सहायता से तैयार पेयजल पाइपलाइन परियोजना का भी उद्घाटन किया। इसके अलावा उन्होंने घोषणा की कि इस्कॉन जल्द ही पुरुलिया जिले के सभी सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन की व्यवस्था शुरू करेगा।

अधिकारी ने कहा, "इस्कॉन द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले भोजन के अलावा सरकारी स्कूलों के छात्रों को सप्ताह में दो बार अंडे भी दिए जाएंगे, जैसा कोलकाता में किया जा रहा है। कोलकाता की तरह मिड डे मील बनाने से जुड़ी महिलाओं की नौकरियां भी सुरक्षित रहेंगी।"

आदिवासी समुदाय के लिए विशेष कदम

मुख्यमंत्री ने एक और अहम ऐलान करते हुए कहा कि इस वर्ष से आदिवासी बहुल बांकुरा और पुरुलिया जिलों में मां मनसा के पर्व पर सरकारी अवकाश रहेगा। आदिवासी समुदायों में सर्पों की देवी मां मनसा की व्यापक पूजा को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। यह कदम आदिवासी सांस्कृतिक पहचान को सरकारी मान्यता देने की दिशा में एक प्रतीकात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

जनकल्याण शिविर और सामाजिक योजनाएं

अधिकारी ने यह भी बताया कि प्रशासन विधवा पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन और दिव्यांगजनों के लिए भत्तों जैसी योजनाओं के आवेदन में सहायता देने हेतु जनकल्याण शिविर आयोजित करेगा। उन्होंने कहा कि पहले ऐसे शिविर लोगों की पहुंच से दूर होते थे, अब इन्हें सुलभ स्थानों पर आयोजित किया जाएगा ताकि अधिकतम लाभार्थी लाभ उठा सकें।

आगे की राह

रघुनाथपुर स्टील प्लांट के चालू होने की समयसीमा अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं की गई है, लेकिन राज्य सरकार का संकेत है कि मेजिया प्लांट की सफलता के बाद यह परियोजना भी प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी। यह देखना होगा कि रोज़गार के वादे ज़मीन पर किस हद तक उतरते हैं और प्रवासी मजदूरों की वापसी वास्तव में किस गति से होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ के इस प्लांट की समयसीमा, रोज़गार सत्यापन और स्थानीय आदिवासी हिस्सेदारी का ब्यौरा अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। मेजिया प्लांट के अनुभव से सबक लेते हुए यह देखना ज़रूरी होगा कि क्या इस बार रोज़गार के आंकड़े वादों के अनुरूप मिलते हैं। प्रवासी मजदूरों की वापसी तब ही संभव होगी जब वेतन, कार्यस्थल की परिस्थितियाँ और स्थानीय बुनियादी ढाँचा — तीनों एक साथ मज़बूत हों।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रघुनाथपुर स्टील प्लांट क्या है और इसकी लागत कितनी है?
रघुनाथपुर स्टील प्लांट पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में बनने वाला ₹4,000 करोड़ का ग्रीनफील्ड एकीकृत इस्पात संयंत्र है, जिसका शिलान्यास 17 अगस्त 2026 को CM सुवेंदु अधिकारी ने किया। यह राज्य का दूसरा बड़ा स्टील प्रोजेक्ट है।
इस स्टील प्लांट से कितने लोगों को रोज़गार मिलेगा?
CM अधिकारी के अनुसार यह प्लांट लगभग 10,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार देगा। स्थानीय आदिवासी युवाओं को भी इसमें नौकरी मिलने की बात कही गई है।
पश्चिम बंगाल में प्रवासी मजदूरों की समस्या क्यों है?
पुरुलिया और बांकुरा जैसे आदिवासी बहुल जिलों में पारंपरिक रूप से रोज़गार के सीमित विकल्प होने के कारण बड़ी संख्या में युवा अन्य राज्यों में पलायन करते रहे हैं। CM ने औद्योगिक निवेश बढ़ाकर इस समस्या के समाधान का भरोसा दिया है।
मां मनसा पर्व पर सरकारी अवकाश की घोषणा किन जिलों के लिए है?
CM अधिकारी ने घोषणा की कि इस वर्ष से बांकुरा और पुरुलिया जिलों में मां मनसा के पर्व पर सरकारी अवकाश रहेगा। यह निर्णय आदिवासी समुदायों में सर्पों की देवी मां मनसा की व्यापक पूजा को देखते हुए लिया गया है।
पुरुलिया के सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन की नई व्यवस्था क्या होगी?
इस्कॉन पुरुलिया जिले के सभी सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराएगा और छात्रों को सप्ताह में दो बार अंडे भी दिए जाएंगे — जैसा कोलकाता में किया जा रहा है। मिड डे मील से जुड़ी महिला कर्मियों की नौकरियाँ भी सुरक्षित रखी जाएंगी।
राष्ट्र प्रेस
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