धर्मतला धरने के बाद सीएम ममता बनर्जी ने पूर्व राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस से की मुलाकात

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धर्मतला धरने के बाद सीएम ममता बनर्जी ने पूर्व राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस से की मुलाकात

सारांश

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने धर्मतला में धरने के समाप्त होने के बाद पूर्व राज्यपाल डॉ. सी. वी. आनंद बोस से मुलाकात की। इस मुलाकात में उन्होंने बोस को उनके भविष्य के कार्यों के लिए शुभकामनाएं दीं।

Key Takeaways

  • ममता बनर्जी ने डॉ. सी. वी. आनंद बोस से मुलाकात की।
  • धरना चुनाव आयोग की प्रक्रिया के खिलाफ था।
  • ममता ने इसे अपनी जीत बताया।
  • बोस का इस्तीफा विवादित रहा।
  • मुलाकात का राजनीतिक महत्व है।

कोलकाता, १० मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने धर्मतला में पांच दिन तक चले धरने को समाप्त करने के बाद पूर्व राज्यपाल डॉ. सी. वी. आनंद बोस से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की।

सीएम ममता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए डॉ. बोस को उनके भविष्य में होने वाले कार्यों के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लिखा, "धर्मतला में हमारे पांच दिन के धरने के समाप्त होने के बाद, मैंने कल जाने से पहले पश्चिम बंगाल के पूर्व गवर्नर डॉ. सी. वी. आनंद बोस से व्यक्तिगत रूप से मिलने का समय निकाला।"

उन्होंने आगे कहा, "डॉ. बोस एक ज्ञानी और प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं, और उनके कार्यकाल के दौरान मुझे राज्य और इसके लोगों की भलाई से जुड़े मुद्दों पर उनसे चर्चा करने का अवसर मिला। मैंने हमेशा इन बातचीतों को महत्वपूर्ण समझा है। मैं डॉ. बोस को उनके आगामी सभी कार्यों के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देती हूं। मुझे विश्वास है कि वे अपनी समझदारी और अनुभव के साथ आगे की जिम्मेदारियों को निभाएंगे।"

यह मुलाकात अलिपुर स्थित राज्य अतिथि गृह 'सौजन्य' में हुई, जहाँ बोस ने इस्तीफे के बाद ठहराव लिया था। ममता ने इसे एक शिष्टाचार भेंट बताया, लेकिन इसका राजनीतिक संदर्भ महत्वपूर्ण है। सी. वी. आनंद बोस ने ५ मार्च २०२६ को अचानक गवर्नर पद से इस्तीफा दिया था, जिसके बाद तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। ममता ने इसे 'राजनीतिक दबाव' और 'अन्याय' बताया, और आरोप लगाया कि बोस को धमकाकर हटाया गया। उन्होंने कहा था कि बोस 'धमकी' के कारण इस्तीफा देने को मजबूर हुए और राज भवन को 'बीजेपी कार्यालय' बनाने का प्रयास किया गया।

धरना मुख्यतः चुनाव आयोग की विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया के खिलाफ था, जिसमें मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए थे। ममता ने दावा किया कि इससे लाखों वैध मतदाताओं (विशेष रूप से अल्पसंख्यक और गरीब) के नाम गायब हो गए, जो कि लोकतंत्र पर हमला है। धरना ६ मार्च से शुरू हुआ और १० मार्च को समाप्त हुआ, जब सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर संज्ञान लिया और "बंद दरवाजा खुल गया" कहा। ममता ने इसे अपनी जीत बताया।

Point of View

जिसमें ममता बनर्जी ने पूर्व गवर्नर के प्रति अपनी शुभकामनाएं व्यक्त की हैं। यह घटनाक्रम राजनीतिक दबाव और लोकतंत्र की सुरक्षा के मुद्दों को उजागर करता है।
NationPress
11/03/2026

Frequently Asked Questions

सीएम ममता बनर्जी ने धरने के बाद किससे मुलाकात की?
सीएम ममता बनर्जी ने पूर्व राज्यपाल डॉ. सी. वी. आनंद बोस से मुलाकात की।
धरने का मुख्य उद्देश्य क्या था?
धरना चुनाव आयोग की विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया के खिलाफ था।
ममता बनर्जी ने डॉ. बोस को क्या शुभकामनाएं दीं?
उन्होंने डॉ. बोस को उनके भविष्य के कार्यों के लिए शुभकामनाएं दीं।
धरना कब शुरू और कब समाप्त हुआ?
धरना ६ मार्च को शुरू हुआ और १० मार्च को समाप्त हुआ।
ममता बनर्जी ने इस्तीफे को किस तरह से बयान किया?
उन्होंने इस्तीफे को राजनीतिक दबाव और अन्याय बताया।
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