मध्य प्रदेश: CM मोहन यादव ने निगम-मंडल के नवनियुक्त पदाधिकारियों को दिया स्व-अनुशासन और वित्तीय प्रबंधन का मंत्र
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 18 मई 2025 को भोपाल स्थित अटल बिहारी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में आयोजित उन्मुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न निगमों, मंडलों, बोर्डों, आयोगों और प्राधिकरणों के नवनियुक्त पदाधिकारियों को स्व-अनुशासन, वित्तीय प्रबंधन और जनसेवा के मूल सिद्धांतों से अवगत कराया। यह सभी नियुक्तियाँ राजनीतिक हैं और पदाधिकारियों को जनहित में अपनी जिम्मेदारी के प्रति सजग करने के उद्देश्य से यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
मुख्यमंत्री का संदेश: अनेकता में एकता
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि 'अनेकता में एकता ही हमारी ताकत है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि योग्यता के आधार पर सभी पदाधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियाँ दी गई हैं, क्योंकि 'हम योग्यता का सम्मान करना जानते हैं।' यादव ने पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के आदर्शों का स्मरण कराते हुए कहा कि राजनीति और प्रशासन का एकमात्र ध्येय जनकल्याण होना चाहिए, और राजनीतिक जीवन में नैतिकता तथा शुचिता अनिवार्य है।
वित्तीय अनुशासन पर जोर
मुख्यमंत्री ने पदाधिकारियों को वित्तीय प्रबंधन की चुनौतियों के प्रति सचेत करते हुए तीन सूत्री मंत्र दिया — वित्तीय अनुशासन लाना, फिजूलखर्ची पर अंकुश लगाना और नवाचारों के माध्यम से आय के नए स्रोत सृजित करना। उन्होंने कहा कि नवनियुक्त पदाधिकारी संस्थान के अधिकारियों के साथ टीम भावना से कार्य करें तथा स्व-अनुशासन में रहते हुए नियमित मॉनिटरिंग करें।
भाजपा नेताओं की उपस्थिति और संदेश
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कार्यक्रम में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मध्य प्रदेश प्रगति के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने पदाधिकारियों से आह्वान किया कि वे अपने अधिकारों का उपयोग जनता की आवश्यकताओं को पूरा करने और व्यापक जनहित में ही करें।
प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री यादव के विचार और कर्म से यह स्पष्ट होता है कि वे मध्य प्रदेश को सभी क्षेत्रों में देश में प्रथम स्थान पर रखने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2003 से किए जा रहे प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय और जीडीपी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
आम जनता पर असर
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि निगम, मंडल और बोर्ड के पदाधिकारी सीधे आम नागरिकों को सेवाएँ प्रदान करते हैं। बेहतर प्रशिक्षित और अनुशासित पदाधिकारी न केवल प्रशासनिक कुशलता बढ़ाते हैं, बल्कि सार्वजनिक संसाधनों के दुरुपयोग पर भी अंकुश लगाते हैं। गौरतलब है कि राजनीतिक नियुक्तियों में प्रशिक्षण की यह परंपरा सुशासन की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।
आगे की राह
कार्यक्रम के बाद उम्मीद की जा रही है कि नवनियुक्त पदाधिकारी अपने-अपने संस्थानों में इन सिद्धांतों को व्यवहार में लाएँगे। मुख्यमंत्री यादव ने स्पष्ट संकेत दिया है कि प्रदर्शन की नियमित समीक्षा की जाएगी और जनसेवा में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।