सीएम मोहन यादव ने पंडित कुंजीलाल दुबे के 130वीं जयंती पर उनके संसदीय योगदान को याद किया
सारांश
Key Takeaways
- पंडित कुंजीलाल दुबे का जन्म 19 मार्च 1896 को हुआ था।
- उन्होंने तीन बार मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।
- उन्हें 1964 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया।
- हिंदी भाषा को एक विशेष स्थान दिलाने में उनका बड़ा योगदान रहा।
- मुख्यमंत्री ने उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
भोपाल, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश विधानसभा के तीन बार अध्यक्ष रहे पंडित कुंजीलाल दुबे की 130वीं जयंती के अवसर पर विधानसभा में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दुबे के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि संसदीय परंपरा को समृद्ध बनाने में उनका अत्यधिक योगदान रहा है।
सीएम मोहन यादव ने गुरुवार को स्व. पं. कुंजीलाल दुबे की 130वीं जयंती के मौके पर मध्य प्रदेश विधानसभा भवन परिसर में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि पं. दुबे तीन बार मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष बने। अध्यक्ष के रूप में उन्होंने हिन्दी भाषा को एक विशेष स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पं. दुबे के विधानसभा अध्यक्षीय कार्यकाल की दीर्घ सेवाओं और संसदीय परंपराओं को समृद्ध बनाने में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पं. दुबे की समाज सेवा के लिए उन्हें वर्ष 1964 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। विद्या और ज्ञान के क्षेत्र में उनके कार्यों के लिए पं. दुबे को 1965 में एलएलडी की उपाधि दी गई, और 1967 में विक्रम विश्वविद्यालय ने उन्हें डी-लिट की उपाधि से सम्मानित किया। वे सदैव हमारे स्मरण में रहेंगे। म.प्र. विधानसभा के भूतपूर्व अध्यक्ष पं. दुबे का जन्म 19 मार्च 1896 को वर्तमान नरसिंहपुर जिले के ग्राम आमगांव में हुआ था।
वकालत के पेशे से राजनीति में आए पं. दुबे ने प्रथम विधानसभा (1956-57), द्वितीय विधानसभा (1957-62) एवं तृतीय विधानसभा (1962-67) में कुल तीन बार मप्र विधानसभा अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। पुष्पांजलि कार्यक्रम में म.प्र. विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, विधायक भगवानदास सबनानी, प्रमुख सचिव विधानसभा अरविंद शर्मा, तथा भूतपूर्व विधानसभा अध्यक्ष पं. दुबे के परिजन एवं विधानसभा के अधिकारी-कर्मचारी भी शामिल हुए थे।