सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का दावा: पवन खेड़ा का अंतिम भाषण असम की जेल में होगा
सारांश
Key Takeaways
- पवन खेड़ा पर उग्रवादी संगठनों से संपर्क करने का आरोप।
- मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने तीन से चार मामले दर्ज होने की जानकारी दी।
- आगामी चुनाव में राजनीतिक माहौल और गर्म हो सकता है।
- भाजपा ने अवैध चुनाव प्रभाव को रोकने की चेतावनी दी।
- कांग्रेस ने अभी तक आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी।
गुवाहाटी, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुरुवार को कहा कि कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने चुनाव परिणामों को प्रभावित करने के लिए राज्य में उग्रवादी संगठनों से संपर्क करने का प्रयास किया है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके खिलाफ कई मामले पहले से ही दर्ज किए जा चुके हैं।
सीएम सरमा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि चुनाव से पहले उग्रवादी समूहों से संपर्क करने के प्रयास के संबंध में तीन से चार मामले दर्ज किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने चुनाव के बाद कांग्रेस नेता के खिलाफ संभावित कानूनी कार्रवाई का भी संकेत दिया। सरमा ने कहा कि असम में कुछ उग्रवादी संगठनों से संपर्क करके चुनाव परिणामों को प्रभावित करने का प्रयास करने के आरोप में पवन खेड़ा के नाम पर पहले ही मामले दर्ज हो चुके हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि मामलों के परिणाम और संभावित गिरफ्तारियाँ चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद ही स्पष्ट होंगी।
सीएम ने कहा, "जेल कौन जाएगा? यह चुनाव के बाद ही पता चलेगा। मुझे लगता है पवन खेड़ा का आखिरी भाषण असम की किसी जेल में होगा।"
मुख्यमंत्री द्वारा बताए गए मामलों के बारे में अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी अभी तक साझा नहीं की है।
सरमा की टिप्पणी ने राज्य में चुनावों से पहले एक नया राजनीतिक विवाद जन्म दिया है, जिसमें सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी कांग्रेस एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।
भाजपा नेतृत्व ने साफ किया है कि चुनाव को अवैध तरीके से प्रभावित करने के किसी भी प्रयास पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जबकि कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के आरोपों पर अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है।
ये आरोप उस समय में सामने आए हैं जब राजनीतिक माहौल बेहद संवेदनशील है और चुनाव से पहले पार्टियाँ अपने प्रचार अभियान को तेज कर रही हैं।
126 सदस्यीय विधानसभा के लिए इस साल अप्रैल या मई में चुनाव होने की संभावना है। कांग्रेस ने इस साल के चुनाव के लिए 26 उम्मीदवारों की सूची पहले ही जारी की है।
2021 के चुनावों में भाजपा, एजीपी और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) से मिलकर बने एनडीए ने 75 सीटें जीती थीं। भाजपा इस गठबंधन में सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी है, जिसके पास विधानसभा में 60 सीटें हैं।