CMRL-Exalogic मामले में पिनाराई विजयन और परिवार पर विजिलेंस जांच का फैसला जल्द
सारांश
मुख्य बातें
केरल के तिरुवनंतपुरम में CMRL-Exalogic वित्तीय लेनदेन से जुड़े मामले में पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ विजिलेंस कार्रवाई शुरू की जाए या नहीं — इस पर मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन एक अहम निर्णय लेने की स्थिति में हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा लगाए गए आरोपों और एडवोकेट जनरल की कानूनी राय के आधार पर यह फैसला आने वाले दिनों में संभावित है।
मुख्यमंत्री और गृह मंत्री की बैठक प्रस्तावित
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री सतीशन और गृह मंत्री रमेश चेन्निथला जल्द ही ईडी की रिपोर्ट और एडवोकेट जनरल की कानूनी राय पर विचार-विमर्श के लिए बैठक कर सकते हैं। इस बैठक में यह तय होने की उम्मीद है कि विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (वीएसीबी) को सीधे एफआईआर दर्ज करनी चाहिए अथवा आरोपों की प्रारंभिक जांच करनी चाहिए।
कानूनी राय: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला संभव
खबरों के अनुसार, एडवोकेट जनरल की राय में कहा गया है कि 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट' के तहत मामला दर्ज करने पर विचार किया जा सकता है। इसमें रिश्वत और आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच के लिए शुरुआती साक्ष्यों का हवाला दिया गया है। कानूनी राय में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी बिचौलिए या तीसरे पक्ष के माध्यम से धन प्राप्त करने पर भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
गौरतलब है कि जिन लेनदेन की जांच प्रस्तावित है, वे 2018 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में हुए संशोधनों से पहले और बाद दोनों की हैं, जिससे किसी भी संभावित जांच में दोनों कानूनी व्यवस्थाओं के प्रावधान प्रासंगिक हो जाते हैं।
वीणा विजयन और मोहम्मद रियास पर भी कार्रवाई पर विचार
माना जा रहा है कि कानूनी राय में यह सुझाव दिया गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री की पुत्री वीणा विजयन को मिले धन की जांच की जा सकती है — यह पता लगाने के लिए कि क्या इसका उद्देश्य पिनाराई विजयन को लाभ पहुँचाना था। इसके अलावा विधायक पी.ए. मोहम्मद रियास के खिलाफ भी मामला दर्ज करने पर विचार किया जा सकता है। ईडी ने कुल मिलाकर पिनाराई विजयन, वीणा विजयन और पूर्व मंत्री मोहम्मद रियास सहित एक दर्जन से अधिक लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
ईडी की 25 पृष्ठ की रिपोर्ट में दावे
ईडी ने राज्य पुलिस प्रमुख को 25 पृष्ठ की रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने की माँग की गई है। रिपोर्ट में भुगतान विवरण, वित्तीय अभिलेखों और व्हाट्सऐप बातचीत का उल्लेख है, जिनके बारे में एजेंसी का दावा है कि वे उसके आरोपों की पुष्टि करते हैं। एजेंसी के अनुसार, 2016 से 2026 के बीच पिनाराई विजयन के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान सीधे या उनकी पुत्री की कंपनी 'Exalogic' के ज़रिए अवैध भुगतान प्राप्त किए गए थे।
सीपीआई (एम) का विरोध, सरकार का रुख
इस बीच भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई-एम] ने ईडी के आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताकर खारिज किया है और राज्य-स्तरीय जांच का विरोध किए जाने की संभावना जताई जा रही है। दूसरी ओर, राज्य सरकार का कहना है कि केंद्रीय जांच एजेंसी से मिली जानकारी की विधिवत समीक्षा होनी चाहिए और कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब केरल की राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच पहले से ही तनाव बना हुआ है। आने वाले दिनों में सतीशन और चेन्निथला की बैठक से कार्रवाई की दिशा और जांच का दायरा स्पष्ट होने की उम्मीद है।