59 साल बाद कांग्रेस तमिलनाडु कैबिनेट में: राजेश कुमार और विश्वनाथन लेंगे मंत्री पद की शपथ
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु की राजनीति में 21 मई 2026 को एक ऐतिहासिक मोड़ आया, जब 59 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) राज्य कैबिनेट का हिस्सा बनने जा रही है। मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु वेट्री कझगम (TVK) सरकार में कांग्रेस विधायक एस. राजेश कुमार और पी. विश्वनाथन गुरुवार को मंत्री पद की शपथ लेंगे। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की औपचारिक स्वीकृति के बाद इस नियुक्ति की घोषणा की गई।
मुख्य घटनाक्रम
यह शपथ ग्रहण समारोह विशेष रूप से पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की पुण्यतिथि के दिन आयोजित हो रहा है, जिसे कांग्रेस नेता प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण मान रहे हैं। तमिलनाडु कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के. सेल्वपेरुंथगाई ने कहा कि नए मंत्री राजीव गांधी के आदर्शों के अनुरूप कार्य करेंगे। उन्होंने कहा, 'राजीव गांधी के दिखाए मार्ग पर चलते हुए हमारे मंत्री निश्चित रूप से लोगों के साथ-साथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए भी कड़ी मेहनत करेंगे।'
नेताओं की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, 'कांग्रेस के लिए यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है और हम सभी महसूस करते हैं कि 59 साल का समय बहुत लंबा होता है। कांग्रेस पार्टी हमेशा लोगों के लिए खड़ी रही है। हमने दूसरों के साथ सत्ता साझा की है, हमने दूसरों को सत्ता सौंपी है और तमिलनाडु में सत्ता में आने के लिए हमें इतने वर्षों तक इंतजार करना पड़ा।'
तमिलनाडु के कांग्रेस प्रभारी गिरीश चोडनकर ने कार्यकर्ताओं के उत्साह का उल्लेख करते हुए कहा, 'हमारे कार्यकर्ता बहुत खुश और उत्साहित हैं, क्योंकि वे लंबे समय से सरकार में सत्ता-साझेदारी और सम्मान की इच्छा रखते थे और अब उन्हें यह हासिल हो गया है। हम ये दोनों मंत्रालय अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को समर्पित करते हैं।'
कांग्रेस नेता थिरुनावुक्करासर ने TVK नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा, 'यह एक स्वागत योग्य कदम है। मैं TVK के अध्यक्ष और मौजूदा सीएम विजय की सराहना करता हूँ कि उन्होंने यह प्रस्ताव दिया और कांग्रेस को अपनी कैबिनेट में शामिल किया।'
59 साल की प्रतीक्षा का संदर्भ
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केवी थंगाबालू ने बताया कि यह प्रतीक्षा कितनी लंबी रही है। उन्होंने कहा, 'असल में, 2009 में हमने सत्ता-साझाकरण की व्यवस्था की मांग की थी, और उस समय श्री करुणानिधि सहमत भी हो गए थे, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया।' गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब TVK को विधानसभा में पूर्ण बहुमत प्राप्त नहीं है और कांग्रेस के समर्थन से ही सरकार चल रही है।
राजनीतिक महत्व और आगे की राह
पर्यवेक्षकों के अनुसार, यह घटनाक्रम तमिलनाडु में गठबंधन राजनीति के एक नए अध्याय की शुरुआत है। TVK सरकार के भीतर सत्ता-साझेदारी का यह कदम कांग्रेस को राज्य में नई ज़मीन देता है। दोनों नवनियुक्त मंत्रियों को कौन-से विभाग सौंपे जाएंगे, इसकी आधिकारिक घोषणा शपथ ग्रहण समारोह के बाद अपेक्षित है।