मानसून सत्र से पहले NDA का पलटवार: ललन सिंह और बघेल ने कांग्रेस के 'तोड़फोड़' आरोप किए खारिज
सारांश
मुख्य बातें
संसद के मानसून सत्र 2025 की शुरुआत से पहले ही सियासी पारा चढ़ गया है। केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल ने 16 जुलाई को विपक्ष के उन आरोपों को सिरे से नकार दिया, जिनमें दावा किया गया था कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) क्षेत्रीय दलों के नेताओं को दबाव में तोड़ रहा है। दोनों मंत्रियों का कहना है कि सांसद स्वेच्छा से और अपनी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर निर्णय लेते हैं।
ललन सिंह का पलटवार
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि 'कांग्रेस पार्टी के आरोपों में कोई दम नहीं है और न ही कोई तथ्य है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि जो नेता अपनी पार्टी में असहज महसूस करते हैं, वे अपनी मर्जी से पार्टी छोड़ते हैं — इसमें किसी बाहरी दबाव या तोड़फोड़ की कोई भूमिका नहीं होती।
बघेल का विपक्ष पर हमला
केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल ने मानसून सत्र को लेकर विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष का रवैया 'हमेशा नकारात्मक' रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष रचनात्मक संसदीय भागीदारी के बजाय सदन की कार्यवाही बाधित करने में रुचि रखता है। बघेल ने कहा, 'पिछले कई सत्रों से मैं देख रहा हूँ कि वे सदन चलने नहीं देते। अगर वे सदन को सुचारु रूप से चलने दें, तो अपनी बात पूरे देश और दुनिया के सामने प्रभावी ढंग से रख सकते हैं।'
हॉर्स ट्रेडिंग के आरोपों पर सफाई
NDA पर दलबदल कराने और राजनीतिक दबाव बनाने के आरोपों को खारिज करते हुए बघेल ने कहा कि सांसद 'कोई मासूम बच्चे नहीं' बल्कि जनता द्वारा चुने गए परिपक्व जनप्रतिनिधि हैं। उनके अनुसार, नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और विकास कार्यक्रमों से प्रभावित होकर स्वेच्छा से NDA में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि 'किसी को जबरन तोड़ा नहीं जा सकता।'
मानसून सत्र की पृष्ठभूमि
यह बयानबाजी ऐसे समय में आई है जब संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है और विपक्षी दल INDIA गठबंधन के बिखराव की चर्चाएँ राजनीतिक गलियारों में गर्म हैं। गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में कई क्षेत्रीय दलों के नेताओं के NDA के प्रति झुकाव की खबरें सामने आई हैं, जिसे विपक्ष 'ऑपरेशन तोड़फोड़' का हिस्सा बताता रहा है। सत्ता पक्ष इन दावों को राजनीति से प्रेरित बताकर नकारता आया है। आने वाले दिनों में मानसून सत्र में यह मुद्दा संसद के भीतर भी गूँजने की संभावना है।