21 अगस्त 2026
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जेपी नड्डा का राहुल गांधी पर तीखा वार: संसद मार्ग धरने को बताया 'कैमराजीवी' राजनीति

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जेपी नड्डा का राहुल गांधी पर तीखा वार: संसद मार्ग धरने को बताया 'कैमराजीवी' राजनीति

सारांश

भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल गांधी के संसद मार्ग थाना धरने को 'कैमराजीवी' राजनीति करार दिया। नड्डा का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट पहले से जाँच कर रहा है और यह धरना न्याय नहीं, बल्कि वंदे मातरम विवाद से ध्यान भटकाने की कोशिश है।

मुख्य बातें

राहुल गांधी 21 अगस्त को संसद मार्ग थाने में पैलेट गन पीड़ित के समर्थन में धरने पर बैठे।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने इसे 'कैमराजीवी' राजनीति और कांग्रेस की राजनीतिक हताशा बताया।
सर्वोच्च न्यायालय ने 20 जुलाई की घटना का संज्ञान लेकर पाँच सदस्यीय उच्च-स्तरीय समिति गठित की है।
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच पहले से ही 20 जुलाई के मामलों की जाँच कर रही है; डीसीपी ने राहुल गांधी को यह जानकारी दी थी।
नड्डा ने धरने को वंदे मातरम विवाद और तिरंगे के आकार के केक प्रकरण से ध्यान हटाने की कोशिश बताया।

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने शुक्रवार, 21 अगस्त को कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के संसद मार्ग थाने में किए गए धरना-प्रदर्शन पर कड़ा प्रहार किया। नड्डा ने राहुल गांधी को 'कैमराजीवी' करार देते हुए इस धरने को न्याय की माँग नहीं, बल्कि मीडिया का ध्यान खींचने की सुनियोजित कोशिश बताया।

धरने की पृष्ठभूमि

राहुल गांधी शुक्रवार को नई दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुँचे और पैलेट गन पीड़ित के समर्थन में थाने के भीतर ही धरने पर बैठ गए। यह घटनाक्रम 20 जुलाई की उस घटना से जुड़ा है जिसका सर्वोच्च न्यायालय स्वयं संज्ञान ले चुका है।

नड्डा का सीधा हमला

मीडिया से बातचीत में जेपी नड्डा ने कहा, 'पूरा देश एक बार फिर उस सस्ती लोकप्रियता पाने वाली राजनीति को देख रहा है, जिसका प्रदर्शन राहुल गांधी ने संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर किया। राहुल गांधी का आज का धरना न तो छात्रों के लिए है और न ही न्याय के लिए। यह कांग्रेस पार्टी की राजनीतिक हताशा और राहुल गांधी की मीडिया का ध्यान खींचने की भूख का प्रतीक है।'

नड्डा ने न्यायपालिका पर भरोसे का सवाल उठाते हुए कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई की घटना का संज्ञान ले लिया है और एक पूर्व जज की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है। जब देश की सर्वोच्च अदालत इस मामले की जाँच कर रही है, तो राहुल गांधी पुलिस स्टेशन के बाहर कैमरों के सामने बैठकर क्या साबित करना चाहते हैं? सच तो यह है कि राहुल गांधी यह कैमरा-केंद्रित ड्रामा सिर्फ खुद को सुर्खियों में बनाए रखने के लिए कर रहे हैं।'

प्रशासन का स्पष्टीकरण

नड्डा के अनुसार, जब राहुल गांधी संसद मार्ग डीसीपी कार्यालय पहुँचे, तो उन्हें स्पष्ट रूप से बताया गया कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच पहले से ही 20 जुलाई के सभी मामलों में सघन जाँच कर रही है। डीसीपी ने यह भी आश्वासन दिया कि राहुल गांधी की बात क्राइम ब्रांच को भेज दी गई है। नड्डा ने कहा कि प्रशासन के इस स्पष्टीकरण के बावजूद धरने पर बैठ जाना राहुल गांधी की हठ और राजनीतिक हताशा को दर्शाता है।

वंदे मातरम विवाद से जोड़ा

केंद्रीय मंत्री ने इस धरने को कांग्रेस के एक ताज़ा विवाद से भी जोड़ा। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस पार्टी को इस समय वंदे मातरम के मुद्दे पर पूरे देश में कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता को तिरंगे के आकार का केक काटते हुए देखा गया था, जिसे लेकर जनता जवाब माँग रही है। इस शर्मिंदगी से ध्यान हटाने के लिए राहुल गांधी ने जल्दबाजी में यह नया ड्रामा रचा है।'

राजनीतिक संदर्भ

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब संसद सत्र के बाहर विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच तनातनी चरम पर है। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में जाँच जारी रहने के बावजूद विपक्षी दल सड़क पर प्रदर्शन की राह चुन रहे हैं, जो आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि कांग्रेस पैलेट गन मुद्दे पर सहानुभूति अर्जित करना चाहती है। दोनों दलों की प्राथमिकता पीड़ित से अधिक अपनी राजनीतिक छवि है — यह बात मतदाता भाँप रहे हैं।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी ने संसद मार्ग थाने में धरना क्यों दिया?
राहुल गांधी 21 अगस्त को दिल्ली के संसद मार्ग थाने में पैलेट गन पीड़ित के समर्थन में धरने पर बैठे। यह धरना 20 जुलाई की उस घटना से जुड़ा है जिसकी जाँच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में हो रही है।
जेपी नड्डा ने राहुल गांधी को 'कैमराजीवी' क्यों कहा?
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा का आरोप है कि राहुल गांधी का यह धरना न्याय के लिए नहीं, बल्कि मीडिया का ध्यान खींचने और खुद को सुर्खियों में बनाए रखने के लिए था। नड्डा ने इसे कांग्रेस की राजनीतिक हताशा का प्रतीक बताया।
20 जुलाई की घटना की जाँच कहाँ तक पहुँची है?
सर्वोच्च न्यायालय ने 20 जुलाई की घटना का स्वयं संज्ञान लेकर एक पूर्व जज की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय उच्च-स्तरीय समिति गठित की है। इसके अलावा दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच भी इस मामले में सघन जाँच कर रही है।
नड्डा ने धरने को वंदे मातरम विवाद से कैसे जोड़ा?
नड्डा ने कहा कि कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता को तिरंगे के आकार का केक काटते देखे जाने के बाद पार्टी देशभर में आलोचना झेल रही है। उनके अनुसार, इस शर्मिंदगी से ध्यान हटाने के लिए राहुल गांधी ने यह धरना रचा।
डीसीपी ने राहुल गांधी को धरने से पहले क्या बताया था?
नड्डा के अनुसार, संसद मार्ग डीसीपी कार्यालय में राहुल गांधी को स्पष्ट रूप से बताया गया कि क्राइम ब्रांच 20 जुलाई के सभी मामलों की जाँच कर रही है और उनकी बात भी क्राइम ब्रांच को भेज दी गई है। इस आश्वासन के बावजूद राहुल गांधी धरने पर बैठ गए।
राष्ट्र प्रेस
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