भाजपा विधायक सीपी सिंह का कांग्रेस पर हमला: 'वादे करती है, पूरे नहीं करती'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक सीपी सिंह ने 11 जून को रांची में नीति आयोग की बैठक, झारखंड राज्यसभा चुनाव, गृहलक्ष्मी योजना और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रधानमंत्री पद की संभावनाओं पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कांग्रेस पर वादाखिलाफी, तुष्टीकरण की राजनीति और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बनाने के आरोप लगाए।
नीति आयोग बैठक पर सीपी सिंह का बयान
नीति आयोग की बैठक को लेकर सीपी सिंह ने कहा कि यह एक नियमित प्रक्रिया है जो समय-समय पर आयोजित होती है। उनके अनुसार, इसकी अध्यक्षता स्वाभाविक रूप से देश के प्रधानमंत्री करते हैं, नीति आयोग के पदाधिकारी और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री भाग लेते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्यों से जुड़े मुद्दे मुख्यमंत्री उठाते हैं और उसके बाद नीति आयोग आगे की कार्रवाई करता है।
राज्यसभा चुनाव और विधानसभा में धरने पर प्रतिक्रिया
झारखंड राज्यसभा चुनाव पर सीपी सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में हर पात्र नागरिक को चुनाव लड़ने का अधिकार है — बशर्ते उसे आवश्यक प्रस्तावक मिलें, वह भारत का नागरिक हो, मतदाता सूची में उसका नाम हो, दिवालिया न हो और मानसिक रूप से स्वस्थ हो। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड विधानसभा के पोर्टिको में कांग्रेस मंत्रियों के नेतृत्व में धरना और नारेबाजी शर्मनाक है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा सचिव राज्यसभा चुनाव में रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका निभाते हैं और उन पर इस तरह आरोप लगाना पूरी तरह गलत है। उनके अनुसार, 'कानून अपना काम करेगा और रिटर्निंग ऑफिसर अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा से करेंगे।'
राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना पर कटाक्ष
पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष सुभंकर सरकार के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के रूप में देखने की इच्छा जताई थी — सीपी सिंह ने तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष होने के नाते ऐसी बातें स्वाभाविक हैं, लेकिन 'कांग्रेस को गधे को घोड़ा बनाने का सपना देखना छोड़ देना चाहिए।'
गृहलक्ष्मी योजना और वादाखिलाफी का आरोप
गृहलक्ष्मी योजना के संदर्भ में सीपी सिंह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनावों में बड़े-बड़े वादे करती है, परंतु सत्ता में आने के बाद उन्हें पूरा नहीं करती। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हिमाचल प्रदेश और झारखंड में किए गए वादों को कांग्रेस ने पूरा किया। उनका कहना था कि कांग्रेस केवल तुष्टीकरण की राजनीति करती है और समाज को विभिन्न वर्गों में बाँटकर चुनाव जीतने का प्रयास करती है।
आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान झारखंड में आगामी राजनीतिक सरगर्मियों के बीच भाजपा की रणनीतिक पोजिशनिंग का हिस्सा हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्यसभा चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच तनाव चरम पर है।
आगे क्या
झारखंड में राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया जारी है और विधानसभा परिसर में हुई राजनीतिक हलचल के बाद सभी दलों की नज़रें रिटर्निंग ऑफिसर के निर्णय पर टिकी हैं। गृहलक्ष्मी योजना सहित कांग्रेस के चुनावी वादों का मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का केंद्र बना रहेगा।