कर्नाटक सीएम विवाद पर भाजपा का तीखा प्रहार: 'कांग्रेस ने सत्ता को टेंडर सिस्टम बना दिया'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 27 मई 2025 को कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान पर तीखा हमला बोला। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सत्ता की कुर्सी को 'टेंडर सिस्टम' और 'रोटेशनल सीएम' फॉर्मूले में तब्दील कर दिया है, जो कर्नाटक की जनता के जनादेश के साथ धोखा है।
भाजपा के आरोप: टेंडर सिस्टम और सत्ता की भूख
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने कहा, "कांग्रेस पार्टी ने एक 'टेंडर सिस्टम' अपना लिया है, जिसमें जो भी गांधी परिवार के लिए ज़्यादा पैसे जुटाएगा, उसे ही मुख्यमंत्री की कुर्सी दी जाएगी। यह कांग्रेस की सत्ता की भूख और भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा प्रमाण है। जनादेश स्थिर सरकार के लिए था।"
भाजपा के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "कांग्रेस रोटेशनल मुख्यमंत्री सिस्टम लागू करके सबको खुश करने की कोशिश कर रही है। जनादेश एक स्थिर सरकार बनाने के लिए था, न कि बदलती सरकार के लिए। कांग्रेस इस जनादेश की हत्या कर रही है और यह अंदरूनी लड़ाई कर्नाटक की जनता के साथ धोखा है।"
नेताओं की प्रतिक्रियाएँ
भाजपा नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, "कांग्रेस के नेता सिर्फ सत्ता के लिए आपस में लड़ते हैं। उन्हें विकास से, कर्नाटक की तरक्की से कोई लेना-देना नहीं है। जब वे दिल्ली आते हैं, तो उनके पास विकास का कोई रोडमैप नहीं होता। उनका एजेंडा बस यही होता है कि कर्नाटक को कैसे लूटा जाए।"
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने इस विवाद को कांग्रेस का आंतरिक मामला बताते हुए कहा, "कांग्रेस जो भी करना चाहे, वह उनका फैसला है। कर्नाटक की जनता इन सब खेलों को अच्छी तरह समझ रही है।"
कांग्रेस में अंदरूनी तनाव की पृष्ठभूमि
कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच सत्ता-संघर्ष की खबरें लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। हाल ही में दोनों नेताओं के दिल्ली दौरे और पार्टी हाईकमान से अलग-अलग मुलाकातों के बाद ये अटकलें और तेज़ हो गई हैं। गौरतलब है कि 2023 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया था, लेकिन तब से सीएम पद को लेकर दोनों खेमों में तनाव बना हुआ है।
आम जनता और राजनीतिक असर
भाजपा का कहना है कि कांग्रेस की यह आंतरिक कलह राज्य में सुशासन की राह में बाधा बन रही है और अस्थिरता का माहौल तैयार हो रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में कई बड़े विकास और बुनियादी ढाँचे के प्रोजेक्ट मंजूरी की प्रतीक्षा में हैं। आलोचकों का कहना है कि सत्ता-संघर्ष से शासन की प्राथमिकताएँ प्रभावित हो रही हैं।
आने वाले हफ्तों में कांग्रेस हाईकमान का रुख और सिद्धारमैया-शिवकुमार के बीच सत्ता-साझेदारी का भविष्य इस राजनीतिक विवाद की दिशा तय करेगा।