भारत विभाजन के लिए कांग्रेस और मुस्लिम समुदाय जिम्मेदार: नरेंद्र कश्यप
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लखनऊ, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा दिए गए भारत के विभाजन पर बयान ने सियासी चर्चाओं को फिर से तेज कर दिया है। यूपी सरकार में स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री नरेंद्र कुमार कश्यप ने ओवैसी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि इस तरह के बयान देश के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
नरेंद्र कुमार कश्यप ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "भारत का विभाजन एक ऐतिहासिक घटना है, जिसे देश ने न केवल देखा बल्कि उसका सामना भी किया। इस विभाजन में लाखों लोगों की जान गई। जिन्ना और नेहरू इसके मुख्य कारण थे। यदि मुस्लिम समुदाय के लोग भारत का विभाजन नहीं चाहते थे, तो यह संभव नहीं होता। आज भी हम देखते हैं कि कई लोग हैं, जो भारत में रहकर देश के खिलाफ बोलते हैं। ऐसे लोग भारत माता के जय नहीं बोलते और पाकिस्तान के खेल हारने पर शोक मनाते हैं। उस समय की परिस्थितियां और भी गंभीर थीं। इसलिए, कांग्रेस पार्टी और मुस्लिम समुदाय को विभाजन के लिए जिम्मेदार ठहराना गलत नहीं होगा। यह एक तथ्य है, जिसे स्वीकार करना पड़ेगा।"
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार की विशेषता यह है कि जो वह कहती है, उसे करती है। यदि जगत प्रकाश नड्डा ने समान नागरिक संहिता को लागू करने की बात कही है, तो हमारी सरकार इस पर पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। भविष्य में इस दिशा में हमारी सरकार आगे बढ़ेगी।"
नरेंद्र कुमार कश्यप ने सीबीएसई द्वारा कक्षा 6 से तीसरी भाषा (आर 3) को अनिवार्य बनाने के निर्णय को सराहनीय बताया। उनका मानना है कि राष्ट्रीय और प्रांतीय भाषाओं के माध्यम से बच्चे पढ़ाई करेंगे, जिससे उन्हें अपनी संस्कृति और भाषा का ज्ञान होगा, और यह भारतीयता को और मजबूत करेगा।
उन्होंने कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री के बयान 'काशी के 'कलंक' को मिटा देंगे' पर कहा, "धीरेंद्र की धार्मिक भावनाएं केवल उनकी नहीं बल्कि देश के करोड़ों लोगों की हैं। जो धार्मिक स्थल आक्रांताओं द्वारा बदलने का प्रयास किया गया, उन्हें उनके मूल स्वरूप में लाना गलत नहीं है। धीरेंद्र शास्त्री के बयान में क्या गलत है? निश्चित रूप से, भविष्य में इस पर सफलता मिलेगी।"
वहीं, महिला आरक्षण संशोधन बिल के लोकसभा में पारित न होने पर यूपी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बताया कि एनडीए गठबंधन पूरे देश में 'जन आक्रोश यात्रा' का आयोजन कर रहा है, क्योंकि पिछले 40 वर्षों से कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य दल महिलाओं को आरक्षण देने से कतराते रहे हैं। जब भी यह विधेयक सदन में लाया जाता है, ये ही लोग इसका विरोध करते हैं।