15 अगस्त 2026
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विभाजन भारत के इतिहास का काला अध्याय: CM योगी के बयान पर ललितपुर विधायक राम रतन कुशवाहा का समर्थन

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विभाजन भारत के इतिहास का काला अध्याय: CM योगी के बयान पर ललितपुर विधायक राम रतन कुशवाहा का समर्थन

सारांश

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर ललितपुर विधायक राम रतन कुशवाहा ने CM योगी के बयान का समर्थन करते हुए 1947 के विभाजन को भारतीय इतिहास का सबसे काला अध्याय बताया और तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व पर राजनीतिक स्वार्थ के लिए समाज को बाँटने का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

ललितपुर विधायक राम रतन कुशवाहा ने 14 अगस्त 2025 को CM योगी आदित्यनाथ के विभाजन-संबंधी बयान का समर्थन किया।
विधायक ने 1947 के देश-विभाजन को 'भारतीय इतिहास का काला अध्याय' करार दिया।
तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व पर आरोप लगाया कि राजनीतिक स्वार्थों के लिए समाज में मतभेदों को बढ़ावा दिया गया।
कुशवाहा ने कहा कि विभाजन केवल देश का नहीं, बल्कि इंसानियत का भी विभाजन था।
'बंटेंगे तो कटेंगे' नारे का समर्थन करते हुए सामाजिक एकता को राष्ट्रीय सुरक्षा की बुनियाद बताया।

ललितपुर के भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक राम रतन कुशवाहा ने 14 अगस्त 2025 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के देश-विभाजन संबंधी बयान का खुलकर समर्थन किया और भारत के विभाजन को 'इतिहास का काला अध्याय' करार दिया। विधायक ने तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व पर आरोप लगाया कि राजनीतिक स्वार्थों के चलते समाज में मौजूद मतभेदों को हवा दी गई, जिसका परिणाम देश के विभाजन के रूप में सामने आया।

मुख्य घटनाक्रम

विधायक राम रतन कुशवाहा ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो कुछ कहा है, वह पूरी तरह सोच-समझकर और सही कहा है। उन्होंने 'बंटेंगे तो कटेंगे' नारे का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि यह बात बिना किसी सोच के नहीं कही गई है। उनके अनुसार, समाज में एकता बनाए रखना बेहद जरूरी है और आपसी एकता ही सुरक्षा और मजबूती का आधार है।

कांग्रेस पर आरोप

देश के विभाजन के लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कुशवाहा ने कहा कि भारतवर्ष कभी अखंड था और तत्कालीन राजनीतिक स्वार्थों के कारण देश का विभाजन हुआ। उनका आरोप है कि तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व ने सत्ता संबंधी हितों के चलते समाज में मौजूद मतभेदों को बढ़ाया। उन्होंने कहा कि भारत में हिंदू और मुस्लिम लंबे समय से साथ रहते आए थे और जाति तथा वर्ग के आधार पर भेदभाव को बढ़ावा देना भारतीय समाज की मूल भावना नहीं थी।

विभाजन: देश और इंसानियत दोनों का

जब विधायक से पूछा गया कि इसे देश का विभाजन कहा जाए या इंसानियत का विभाजन, तो राम रतन कुशवाहा ने कहा कि यह दोनों का विभाजन है। उनके अनुसार, यदि देश का विभाजन नहीं होता तो इंसानियत का विभाजन भी नहीं होता। विभाजन ने लोगों के बीच ऐसी दूरी पैदा की जिसका असर केवल राजनीतिक सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इंसानी रिश्तों और सामाजिक संबंधों पर भी पड़ा।

सामाजिक एकता पर जोर

विधायक ने कहा कि विभाजन की त्रासदी को केवल इतिहास की एक घटना मानकर भूलना नहीं चाहिए, बल्कि इससे समाज को एकता और भाईचारे का महत्व समझना चाहिए। उन्होंने कहा, 'एक रहेंगे तो नेक रहेंगे और नेक रहकर एक रहेंगे।' साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विभाजन के आधार पर किसी तरह का विरोध या टकराव नहीं होना चाहिए और ऐसे माहौल में नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है।

आगे क्या

यह बयान 14 अगस्त — विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस — के अवसर पर आया है, जिसे केंद्र सरकार ने 2021 से आधिकारिक रूप से मनाना शुरू किया था। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, BJP के नेताओं द्वारा इस दिन विभाजन की पीड़ा को याद दिलाना एक सुनियोजित राजनीतिक कथा का हिस्सा है। कांग्रेस की ओर से अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर विभाजन की पीड़ा को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश करता है। गौरतलब है कि इतिहासकारों के बीच विभाजन की जिम्मेदारी को लेकर कोई एकमत नहीं है और इसे केवल एक दल पर थोपना अकादमिक दृष्टि से विवादास्पद माना जाता है। 'बंटेंगे तो कटेंगे' जैसे नारे सामाजिक एकता की अपील करते हैं, लेकिन आलोचकों का कहना है कि इनका इस्तेमाल ध्रुवीकरण की राजनीति के लिए भी होता है — एक विरोधाभास जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नजरअंदाज कर देती है।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CM योगी आदित्यनाथ ने विभाजन को लेकर क्या बयान दिया था?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1947 के भारत-विभाजन को देश के इतिहास का काला अध्याय बताया था और सामाजिक एकता की आवश्यकता पर जोर दिया था। उनके इस बयान का ललितपुर विधायक राम रतन कुशवाहा ने 14 अगस्त 2025 को खुलकर समर्थन किया।
ललितपुर विधायक राम रतन कुशवाहा ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
विधायक कुशवाहा ने आरोप लगाया कि तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व ने राजनीतिक और सत्ता संबंधी हितों के चलते समाज में मौजूद मतभेदों को बढ़ावा दिया, जिसका परिणाम देश के विभाजन के रूप में सामने आया। उन्होंने कहा कि यह भारतीय इतिहास का सबसे दुखद अध्याय है।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस क्या है और यह कब से मनाया जाता है?
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस हर साल 14 अगस्त को मनाया जाता है, जो 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन की त्रासदी में मारे गए और विस्थापित हुए लोगों की स्मृति को समर्पित है। केंद्र सरकार ने इसे 2021 से आधिकारिक रूप से मनाना शुरू किया।
'बंटेंगे तो कटेंगे' नारे का क्या अर्थ है?
यह नारा सामाजिक एकता का आह्वान करता है — इसका शाब्दिक अर्थ है कि यदि समाज बँटेगा तो कमजोर होगा। CM योगी आदित्यनाथ और BJP नेता इसे सामाजिक सद्भाव के संदेश के रूप में प्रस्तुत करते हैं, हालाँकि आलोचकों का कहना है कि इसका राजनीतिक उपयोग विभाजनकारी हो सकता है।
विधायक कुशवाहा ने विभाजन को 'इंसानियत का विभाजन' क्यों कहा?
राम रतन कुशवाहा ने कहा कि यदि देश का विभाजन नहीं होता तो इंसानियत का विभाजन भी नहीं होता। उनके अनुसार, 1947 की त्रासदी का असर केवल राजनीतिक सीमाओं तक नहीं, बल्कि इंसानी रिश्तों और सामाजिक संबंधों पर भी पड़ा।
राष्ट्र प्रेस
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