विभाजन भारत के इतिहास का काला अध्याय: CM योगी के बयान पर ललितपुर विधायक राम रतन कुशवाहा का समर्थन
सारांश
मुख्य बातें
ललितपुर के भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक राम रतन कुशवाहा ने 14 अगस्त 2025 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के देश-विभाजन संबंधी बयान का खुलकर समर्थन किया और भारत के विभाजन को 'इतिहास का काला अध्याय' करार दिया। विधायक ने तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व पर आरोप लगाया कि राजनीतिक स्वार्थों के चलते समाज में मौजूद मतभेदों को हवा दी गई, जिसका परिणाम देश के विभाजन के रूप में सामने आया।
मुख्य घटनाक्रम
विधायक राम रतन कुशवाहा ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो कुछ कहा है, वह पूरी तरह सोच-समझकर और सही कहा है। उन्होंने 'बंटेंगे तो कटेंगे' नारे का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि यह बात बिना किसी सोच के नहीं कही गई है। उनके अनुसार, समाज में एकता बनाए रखना बेहद जरूरी है और आपसी एकता ही सुरक्षा और मजबूती का आधार है।
कांग्रेस पर आरोप
देश के विभाजन के लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कुशवाहा ने कहा कि भारतवर्ष कभी अखंड था और तत्कालीन राजनीतिक स्वार्थों के कारण देश का विभाजन हुआ। उनका आरोप है कि तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व ने सत्ता संबंधी हितों के चलते समाज में मौजूद मतभेदों को बढ़ाया। उन्होंने कहा कि भारत में हिंदू और मुस्लिम लंबे समय से साथ रहते आए थे और जाति तथा वर्ग के आधार पर भेदभाव को बढ़ावा देना भारतीय समाज की मूल भावना नहीं थी।
विभाजन: देश और इंसानियत दोनों का
जब विधायक से पूछा गया कि इसे देश का विभाजन कहा जाए या इंसानियत का विभाजन, तो राम रतन कुशवाहा ने कहा कि यह दोनों का विभाजन है। उनके अनुसार, यदि देश का विभाजन नहीं होता तो इंसानियत का विभाजन भी नहीं होता। विभाजन ने लोगों के बीच ऐसी दूरी पैदा की जिसका असर केवल राजनीतिक सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इंसानी रिश्तों और सामाजिक संबंधों पर भी पड़ा।
सामाजिक एकता पर जोर
विधायक ने कहा कि विभाजन की त्रासदी को केवल इतिहास की एक घटना मानकर भूलना नहीं चाहिए, बल्कि इससे समाज को एकता और भाईचारे का महत्व समझना चाहिए। उन्होंने कहा, 'एक रहेंगे तो नेक रहेंगे और नेक रहकर एक रहेंगे।' साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विभाजन के आधार पर किसी तरह का विरोध या टकराव नहीं होना चाहिए और ऐसे माहौल में नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है।
आगे क्या
यह बयान 14 अगस्त — विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस — के अवसर पर आया है, जिसे केंद्र सरकार ने 2021 से आधिकारिक रूप से मनाना शुरू किया था। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, BJP के नेताओं द्वारा इस दिन विभाजन की पीड़ा को याद दिलाना एक सुनियोजित राजनीतिक कथा का हिस्सा है। कांग्रेस की ओर से अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।