राहुल गांधी जनादेश दिलाने में नाकाम, कांग्रेस आलाकमान में अपने बल पर सरकार बनाने का जोश नहीं: शर्मिष्ठा मुखर्जी
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की पुत्री शर्मिष्ठा मुखर्जी ने 28 जून 2025 को कांग्रेस नेतृत्व पर तीखे सवाल दागे और कहा कि पार्टी के आलाकमान में स्वतंत्र रूप से सरकार बनाने की इच्छाशक्ति नज़र नहीं आती। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक सक्रियता और नेतृत्व क्षमता पर भी कड़ी टिप्पणी की।
राहुल गांधी पर सीधा हमला
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा, 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 99 सीटें जीतीं और 'भारत जोड़ो यात्रा' का सकारात्मक असर भी दिखा। लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि राहुल गांधी कोई कार्यक्रम करने के बाद 'गायब' हो जाते हैं। उनके शब्दों में, "राजनीति 24 घंटे और 365 दिनों का काम है। आप आएं और दो दिन बाद फिर कहीं चले जाएं — इस तरह से राजनीति नहीं होती।"
गठबंधन की रणनीति पर सवाल
शर्मिष्ठा ने कांग्रेस की गठबंधन-निर्भर रणनीति को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि "दूसरे कंधों पर बंदूक रखकर चलाने वाली रणनीति सही नहीं है।" उनका मानना है कि कांग्रेस को अपना संगठन मज़बूत करना होगा और आम चुनावों के साथ-साथ राज्यों के चुनावों में भी स्वतंत्र रूप से मैदान में उतरना होगा। उन्होंने कहा, "सिर्फ गठबंधन करके जीत नहीं सकते।"
मोदी-राहुल तुलना पर रुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी के बीच तुलना से शर्मिष्ठा ने परहेज़ किया, लेकिन यह ज़रूर कहा कि 2014 से राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस कुछ राज्यों को छोड़कर लगातार चुनाव हारती रही है। उन्होंने मोदी को "एक लोकप्रिय नेता" बताया जिनकी लोकप्रियता जनादेश से सिद्ध होती है।
राहुल की 'बड़ी असफलता'
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राहुल गांधी अपने और कांग्रेस पार्टी के लिए वह जनादेश नहीं ला पा रहे जो एक प्रभावी विपक्षी नेता को मिलना चाहिए। उन्होंने इसे राहुल गांधी की "एक बड़ी असफलता" करार दिया। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब 2029 के लोकसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर विपक्षी खेमे में रणनीतिक मंथन चल रहा है।
संगठन मज़बूती की पुकार
खुद कांग्रेस में काम कर चुकीं शर्मिष्ठा ने कहा कि पार्टी की सोच गठबंधन के ज़रिए सत्ता पाने की है, लेकिन ज़रूरत इससे कहीं आगे जाकर ज़मीनी संगठन को पुनर्जीवित करने की है। गौरतलब है कि प्रणब मुखर्जी दशकों तक कांग्रेस के शीर्ष नेताओं में रहे, इसलिए उनकी बेटी की यह आलोचना पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह ध्यान खींचती है। आने वाले दिनों में कांग्रेस इन सवालों का जवाब किस तरह देती है, यह देखना अहम होगा।