28 जून 2026
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शर्मिष्ठा मुखर्जी बोलीं — मोदी मजबूत नेता, 12 वर्षों में वैश्विक अस्थिरता के बीच दी स्थिर सरकार

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शर्मिष्ठा मुखर्जी बोलीं — मोदी मजबूत नेता, 12 वर्षों में वैश्विक अस्थिरता के बीच दी स्थिर सरकार

सारांश

कांग्रेस पृष्ठभूमि से आने वाली शर्मिष्ठा मुखर्जी का PM मोदी को 'मजबूत नेता' कहना राजनीतिक रूप से उल्लेखनीय है। उन्होंने 12 वर्षों की स्थिर सरकार, डिजिटल इंडिया और वैश्विक संकट के बीच निर्णायक नेतृत्व को मोदी की बड़ी उपलब्धि बताया — साथ ही यह भी जोड़ा कि नीतियों की आलोचना लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है।

मुख्य बातें

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने 28 जून 2026 को PM नरेंद्र मोदी को 'बहुत मजबूत प्रधानमंत्री' बताया।
उन्होंने कहा कि मोदी ने 12 वर्षों में वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच देश को स्थिर सरकार दी।
2014 को उन्होंने लोकसभा इतिहास में 'अभूतपूर्व' बताया — जब मोदी पूर्व-घोषित PM उम्मीदवार के रूप में चुने गए।
यूपीए-1 और यूपीए-2 के दौरान गठबंधन की मजबूरियों और भ्रष्टाचार के मामलों का उदाहरण देते हुए गठबंधन राजनीति की सीमाएँ रेखांकित कीं।
डिजिटल इंडिया और ग्रामीण स्तर तक डिजिटल भुगतान की पहुँच को मोदी सरकार की उल्लेखनीय उपलब्धि बताया।
साथ ही कहा कि नीतियों पर विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है और इतिहास ही हर नेता का अंतिम मूल्यांकन करेगा।

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की पुत्री शर्मिष्ठा मुखर्जी ने 28 जून 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की खुलकर प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने बीते 12 वर्षों में देश को एक सशक्त और स्थिर सरकार प्रदान की है — ऐसे दौर में जब पूरी दुनिया भू-राजनीतिक उथल-पुथल से गुज़र रही है। उनका यह बयान इसलिए भी उल्लेखनीय है, क्योंकि शर्मिष्ठा मुखर्जी की पृष्ठभूमि कांग्रेस से जुड़ी रही है।

2014 का जनादेश: एक अभूतपूर्व राजनीतिक घटना

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा, 'सोचिए, उन्होंने (पीएम मोदी) पहली बार लोकसभा सदस्य बनकर एक प्रधानमंत्री के रूप में संसद में प्रवेश किया था। इस तरह यह अभूतपूर्व घटना 2014 में देखने को मिली।' उन्होंने रेखांकित किया कि भारतीय राजनीति में यह पहला अवसर था जब किसी नेता को चुनाव से पूर्व ही प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित किया गया और जनता ने उस नाम पर सीधा जनादेश दिया।

उन्होंने कहा, 'यह जनादेश सिर्फ भारतीय जनता पार्टी (BJP) का जनादेश नहीं था, बल्कि नरेंद्र मोदी के नाम पर भी था। देश की जनता यह जानती थी कि BJP को वोट देंगे तो नरेंद्र मोदी ही प्रधानमंत्री बनेंगे — यह एक बहुत ही अनोखी स्थिति थी।'

गठबंधन राजनीति की सीमाएँ और यूपीए का संदर्भ

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने 2004 से 2014 के यूपीए कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि गठबंधन सरकारें भले न गिरी हों, लेकिन निर्णायक फैसले लेने में अड़चनें आती रहीं। उन्होंने कहा, 'यूपीए-1 में न्यूक्लियर डील के बाद लेफ्ट ने अपना समर्थन वापस ले लिया था। बहुत सारे भ्रष्टाचार के मामले आए थे, जिनमें सहयोगी दलों के मंत्रियों और सांसदों के भी नाम आए थे।'

उन्होंने 1990 के दशक का भी ज़िक्र किया, जब बार-बार गठबंधन सरकारें बनती और गिरती रहीं, जिससे देश में राजनीतिक अस्थिरता का लंबा दौर आया। उनके अनुसार, जब अन्य दलों के सहयोग पर निर्भरता हो, तो नीतिगत साहस सीमित हो जाता है।

वैश्विक अस्थिरता के बीच स्थिर नेतृत्व की अहमियत

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने वर्तमान वैश्विक परिदृश्य की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा, 'अगर आप आज विश्व की भू-राजनीतिक परिस्थितियों — मध्य पूर्व का संकट और यूरोप में रूस-यूक्रेन के बीच संघर्ष — को देखें, तो चारों तरफ अस्थिरता की स्थिति है। उस हालात को देखते हुए केंद्र में एक स्थिर सरकार रहना बहुत जरूरी है।' उन्होंने कहा कि उनकी राय में प्रधानमंत्री मोदी इस कसौटी पर खरे उतरे हैं।

डिजिटल इंडिया और नीतिगत उपलब्धियाँ

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने डिजिटल इंडिया अभियान को मोदी सरकार की एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि आज दूर-दराज के गाँवों में भी मोबाइल फोन के ज़रिए भुगतान हो रहा है — यह एक उल्लेखनीय बदलाव है। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि लोकतंत्र में नीतियों की आलोचना का अधिकार सबको है और कुछ नीतियों पर विरोध स्वाभाविक है।

इतिहास तय करेगा क्षमता और सीमाएँ

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने संतुलित स्वर में यह भी कहा कि हर प्रधानमंत्री अपनी क्षमता के अनुसार देश की प्रगति में योगदान देता है और उनकी ताकत व कमज़ोरियों का अंतिम मूल्यांकन इतिहास ही करेगा। उन्होंने कहा, 'नरेंद्र मोदी एक बहुत ही मजबूत प्रधानमंत्री हैं।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब विपक्षी दल मोदी सरकार की नीतियों पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक राजनीतिक संकेत भी है — कांग्रेस की पृष्ठभूमि से आने वाली प्रणब मुखर्जी की पुत्री का मोदी की तारीफ करना विपक्षी एकजुटता की कमज़ोरी को उजागर करता है। हालांकि, 'स्थिरता' को उपलब्धि मानना और 'निर्णायक फैसलों' को कसौटी बनाना एक सीमित पैमाना है — क्योंकि स्थिरता और जवाबदेही एक साथ चलनी चाहिए। यूपीए की तुलना में 1990 के दशक की अस्थिरता को मानक बनाकर मोदी सरकार की सराहना, मापदंड की पट्टी को जानबूझकर नीचे रखने जैसा है। मुख्यधारा की कवरेज इस बयान को केवल 'तारीफ' के रूप में पेश करती है, जबकि असली सवाल यह है कि स्थिरता के साथ-साथ नागरिक स्वतंत्रता, संस्थागत स्वायत्तता और आर्थिक समावेश का क्या हाल रहा — जिस पर शर्मिष्ठा मुखर्जी मौन रहीं।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने PM मोदी के बारे में क्या कहा?
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने PM नरेंद्र मोदी को 'बहुत मजबूत प्रधानमंत्री' बताया और कहा कि उन्होंने 12 वर्षों में वैश्विक अस्थिरता के बीच देश को एक स्थिर सरकार दी है। उन्होंने डिजिटल इंडिया को भी मोदी सरकार की उल्लेखनीय उपलब्धि माना।
शर्मिष्ठा मुखर्जी कौन हैं?
शर्मिष्ठा मुखर्जी पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की पुत्री हैं और कांग्रेस पृष्ठभूमि से जुड़ी रही हैं। उनका मोदी की प्रशंसा करना राजनीतिक दृष्टि से उल्लेखनीय माना जा रहा है।
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने गठबंधन सरकारों की क्या आलोचना की?
उन्होंने कहा कि 2004 से 2014 के यूपीए कार्यकाल में गठबंधन की मजबूरियों के कारण कई निर्णायक फैसले नहीं लिए जा सके और 1990 के दशक में बार-बार सरकारें गिरने से अस्थिरता का लंबा दौर आया। उनके अनुसार, गठबंधन पर निर्भरता नीतिगत साहस को सीमित करती है।
2014 के चुनाव को शर्मिष्ठा मुखर्जी ने 'अभूतपूर्व' क्यों बताया?
उन्होंने कहा कि 2014 में पहली बार ऐसा हुआ जब नरेंद्र मोदी चुनाव से पहले ही घोषित प्रधानमंत्री उम्मीदवार थे और जनता ने उनके नाम पर सीधा जनादेश दिया। यह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक नई परंपरा थी।
क्या शर्मिष्ठा मुखर्जी ने मोदी सरकार की किसी नीति की आलोचना भी की?
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने सीधे किसी नीति की आलोचना नहीं की, लेकिन यह जरूर कहा कि मोदी की कुछ नीतियों का विरोध होता है और यह लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि हर नेता की क्षमता और सीमाओं का अंतिम मूल्यांकन इतिहास ही करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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