27 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

शर्मिष्ठा मुखर्जी का दावा: प्रणब मुखर्जी मानते थे, मोदी पहले PM जिन्हें मिला जनता का सीधा जनादेश

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
शर्मिष्ठा मुखर्जी का दावा: प्रणब मुखर्जी मानते थे, मोदी पहले PM जिन्हें मिला जनता का सीधा जनादेश

सारांश

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने एक लेख में खुलासा किया कि उनके पिता 2014 की मोदी की जीत को ऐतिहासिक मानते थे — क्योंकि यह पहली बार था जब किसी प्रधानमंत्री को जनता ने सीधे, लगभग राष्ट्रपति-प्रणाली की शैली में चुना। यह बयान खुद एक पूर्व कांग्रेसी नेता की कलम से आया है।

मुख्य बातें

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने 27 जून को प्रकाशित लेख में दावा किया कि उनके पिता प्रणब मुखर्जी मानते थे कि नरेंद्र मोदी पहले ऐसे PM हैं जिन्हें जनता का सीधा जनादेश मिला।
2014 के चुनाव परिणाम के बाद मोदी से हुई बातचीत में प्रणब मुखर्जी ने इसे 'इतिहास में अनोखा' बताया था।
शर्मिष्ठा के अनुसार, डॉ.
मनमोहन सिंह को सोनिया गांधी ने चुना था; नरसिम्हा राव और देवेगौड़ा PM बनते समय सांसद भी नहीं थे।
मोदी का 2014 का चुनाव उनका पहला लोकसभा चुनाव था — पहली बार सांसद बनकर सीधे प्रधानमंत्री बने।
शर्मिष्ठा ने 'ब्रांड मोदी' को 2019 और 2024 में भी निर्णायक कारक माना और कामना की कि वे जनादेश के साथ न्याय करें।

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की पुत्री और पूर्व कांग्रेस नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने 27 जून को प्रकाशित एक लेख में यह दावा किया कि उनके दिवंगत पिता का मत था कि नरेंद्र मोदी स्वतंत्र भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्हें प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में जनता ने सीधे जनादेश दिया। उनके अनुसार, जवाहरलाल नेहरू से लेकर डॉ. मनमोहन सिंह तक के सभी प्रधानमंत्री या तो अपनी पार्टी के आंतरिक निर्णय से या चुनाव-पश्चात गठबंधन समीकरणों के आधार पर इस पद पर पहुँचे थे।

राष्ट्रपति भवन की वह ऐतिहासिक बातचीत

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपने लेख में 2014 के लोकसभा चुनाव परिणामों के बाद की एक महत्वपूर्ण मुलाकात का उल्लेख किया। उनके अनुसार, चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद नरेंद्र मोदी स्वयं राष्ट्रपति भवन में प्रणब मुखर्जी से मिलने पहुँचे। जब प्रणब मुखर्जी ने उनसे चुनाव परिणाम का विश्लेषण माँगा, तो मोदी ने कहा कि तीन दशकों के बाद किसी एक राजनीतिक दल को पूर्ण बहुमत मिला है।

शर्मिष्ठा मुखर्जी के अनुसार, इस पर उनके पिता ने अपने विशिष्ट 'प्रोफेसर-अंदाज़' में पूछा — 'और क्या?' — और जब मोदी चुप रहे, तब प्रणब मुखर्जी ने स्वयं बताया कि 2014 का चुनाव इस मायने में अनोखा था कि इसमें पहली बार किसी दल ने प्रधानमंत्री पद के लिए एक चेहरा पहले से घोषित किया और जनता ने उस चेहरे को सीधे समर्थन दिया।

पूर्व प्रधानमंत्रियों से तुलना

लेख में शर्मिष्ठा मुखर्जी ने विस्तार से उल्लेख किया कि डॉ. मनमोहन सिंह जन-नेता नहीं थे और उन्हें तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री पद के लिए चुना था। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पी. वी. नरसिम्हा राव और एच. डी. देवेगौड़ा प्रधानमंत्री बनते समय संसद के सदस्य तक नहीं थे।

उनके अनुसार, 2014 का चुनाव भारतीय लोकतंत्र में एक नई परंपरा का सूत्रपात था — जिसमें मतदाताओं ने लगभग राष्ट्रपति-प्रणाली जैसी शैली में मोदी को सीधे प्रधानमंत्री के रूप में चुना। गौरतलब है कि यह मोदी का पहला लोकसभा चुनाव था और वे पहली बार सांसद बनकर सीधे प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुँचे।

भाजपा की चुनावी ताकत और 'ब्रांड मोदी'

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने स्वीकार किया कि चुनाव जीतना केवल एक कारण से नहीं होता — इसमें भाजपा का मज़बूत ज़मीनी संगठन, विभिन्न जातियों और समुदायों तक निरंतर पहुँच, और अपनी गलतियों को शीघ्र सुधारने की इच्छाशक्ति जैसे अनेक कारक शामिल हैं। तथापि, उन्होंने माना कि पीएम मोदी का चेहरा भाजपा का सबसे प्रभावशाली पहलू है।

उन्होंने पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव का एक रोचक उदाहरण साझा किया — जब उनके मित्र और परिचित विधानसभा चुनाव में भी कहते थे कि वे 'मोदी' को वोट देंगे। जब शर्मिष्ठा उन्हें याद दिलातीं कि यह लोकसभा नहीं, विधानसभा चुनाव है, तो उनका जवाब होता था — 'ओई एक-ई व्यापार' (बात तो एक ही है)।

मोदी की विरासत पर शर्मिष्ठा का मत

शर्मिष्ठा मुखर्जी के अनुसार, नरेंद्र मोदी न केवल भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवारत निर्वाचित प्रधानमंत्री हैं, बल्कि स्वतंत्रता के बाद के सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों में भी उनकी गिनती होती है। उन्होंने लिखा कि गठबंधन सरकारों की मजबूरियों से मुक्त रहते हुए मोदी ने अपेक्षाकृत स्थिर शासन दिया है।

लेख के समापन में शर्मिष्ठा मुखर्जी ने लिखा कि कोई उनकी नीतियों या कार्यशैली से असहमत हो सकता है, किंतु 'ब्रांड मोदी' और एक 'आकांक्षी भारत' के साथ उनके जुड़ाव को नकारा नहीं जा सकता — जो 2019 और 2024 के चुनावों में भी स्पष्ट रूप से दिखा। उन्होंने यह भी कामना व्यक्त की कि जनता से मिले इस भारी जनादेश के साथ मोदी पूरा न्याय करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

विपक्ष की उस रणनीति पर प्रश्नचिह्न लगाती है जो 'ब्रांड मोदी' को महज़ मीडिया-निर्मित छवि बताती है। हालाँकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि जनादेश की यह 'प्रत्यक्षता' भारतीय संसदीय प्रणाली में संवैधानिक रूप से मान्यता प्राप्त नहीं है — प्रधानमंत्री तकनीकी रूप से आज भी लोकसभा बहुमत से चुने जाते हैं, जनमत-संग्रह से नहीं। इस विमर्श का दीर्घकालिक असर यह हो सकता है कि भविष्य के चुनावों में सभी दल अपना 'पीएम चेहरा' पहले से घोषित करने की परंपरा को और पक्का करें।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपने लेख में क्या दावा किया है?
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने दावा किया कि उनके दिवंगत पिता और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी मानते थे कि नरेंद्र मोदी स्वतंत्र भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्हें जनता ने सीधे, प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में जनादेश दिया। उनके अनुसार, पहले के सभी प्रधानमंत्री या तो पार्टी-चयन से या गठबंधन समीकरणों से इस पद पर पहुँचे थे।
प्रणब मुखर्जी और नरेंद्र मोदी के बीच 2014 में क्या बातचीत हुई थी?
2014 के लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद मोदी राष्ट्रपति भवन में प्रणब मुखर्जी से मिले। जब प्रणब मुखर्जी ने चुनाव विश्लेषण माँगा और मोदी ने 'तीन दशकों बाद पूर्ण बहुमत' का उल्लेख किया, तो प्रणब मुखर्जी ने 'और क्या?' पूछते हुए स्वयं बताया कि यह चुनाव इसलिए ऐतिहासिक था क्योंकि पहली बार प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को सीधा जनादेश मिला।
पहले के प्रधानमंत्रियों को 'सीधा जनादेश' क्यों नहीं मिला था?
शर्मिष्ठा मुखर्जी के अनुसार, डॉ. मनमोहन सिंह को सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री पद के लिए चुना था, जबकि पी. वी. नरसिम्हा राव और एच. डी. देवेगौड़ा प्रधानमंत्री बनते समय संसद सदस्य तक नहीं थे। नेहरू से लेकर अन्य प्रधानमंत्रियों तक, किसी को भी पहले से 'पीएम उम्मीदवार' घोषित करके जनता से सीधे जनादेश नहीं लिया गया था।
'ब्रांड मोदी' के बारे में शर्मिष्ठा मुखर्जी ने क्या कहा?
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने माना कि पीएम मोदी का चेहरा भाजपा का सबसे मज़बूत पहलू है — लोग उनमें एक ऐसा नेता देखते हैं जो अपनी काबिलियत और मेहनत के दम पर आगे बढ़ा, न कि वंशवादी विरासत के आधार पर। उन्होंने कहा कि 2019 और 2024 में भी यह 'ब्रांड मोदी' स्पष्ट रूप से दिखा और इसे नकारा नहीं जा सकता।
क्या शर्मिष्ठा मुखर्जी मोदी की नीतियों से सहमत हैं?
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने स्पष्ट किया कि कोई भी उनकी नीतियों या कार्यशैली से असहमत हो सकता है और लोकतंत्र में यह स्वाभाविक है। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि मोदी के करिश्मे और 'आकांक्षी भारत' के साथ उनके जुड़ाव को नकारना संभव नहीं है। उन्होंने कामना की कि मोदी जनता से मिले इस भारी जनादेश के साथ पूरा न्याय करें।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 दिन पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले