शर्मिष्ठा मुखर्जी का बड़ा बयान: '2014 का जनादेश मोदी के नाम पर था', राहुल गांधी को बताया असफल नेता
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की पुत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री शर्मिष्ठा मुखर्जी ने 28 जून 2026 को नई दिल्ली में एक साक्षात्कार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर प्रशंसा करते हुए कहा कि 2014 का जनादेश केवल भारतीय जनता पार्टी (BJP) का नहीं, बल्कि स्वयं नरेंद्र मोदी के नाम पर था। उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को 'असफल नेता' करार देते हुए कांग्रेस नेतृत्व की रणनीति पर गंभीर सवाल उठाए।
2014 का जनादेश: एक अभूतपूर्व राजनीतिक घटना
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि भारत के लोकसभा इतिहास में 2014 का चुनाव अत्यंत अनोखा रहा। उन्होंने रेखांकित किया कि यह संभवतः पहला अवसर था जब किसी नेता — नरेंद्र मोदी — को चुनाव से पहले ही प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित किया गया था। उन्होंने कहा, 'लोगों को पता था कि भाजपा चुनाव जीतेगी तो नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनेंगे।' उन्होंने इसे 'अभूतपूर्व' बताया क्योंकि मोदी पहली बार लोकसभा सांसद बने और सीधे प्रधानमंत्री के रूप में संसद में प्रवेश किया।
मोदी की 'मजबूत और स्थिर सरकार' पर शर्मिष्ठा का आकलन
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपने एक लेख में नरेंद्र मोदी को 'मजबूत प्रधानमंत्री' कहे जाने का संदर्भ देते हुए स्पष्ट किया कि उनका आशय यह नहीं था कि पूर्व के प्रधानमंत्री कमज़ोर थे। उन्होंने कहा कि 1990 के दशक में बार-बार बनती और गिरती गठबंधन सरकारों के दौर के बाद, मोदी ने 12 वर्षों में एक स्थिर और सशक्त शासन प्रदान किया है।
उन्होंने यूपीए-1 और यूपीए-2 के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए — जिनमें उनके पिता प्रणब मुखर्जी वरिष्ठ मंत्री रहे — कहा कि उन सरकारों में भी स्थिरता थी, परंतु सहयोगी दलों की अलग-अलग माँगों और भ्रष्टाचार के मामलों के कारण कई महत्वपूर्ण निर्णय लेना संभव नहीं हो पाया। यूपीए-1 में परमाणु समझौते के बाद वामपंथी दलों के समर्थन वापसी का उदाहरण उन्होंने विशेष रूप से दिया।
वैश्विक परिदृश्य — मध्य पूर्व का संकट और रूस-यूक्रेन संघर्ष — का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में केंद्र में एक स्थिर सरकार का होना अत्यंत आवश्यक है।
राहुल गांधी पर तीखी टिप्पणी
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने राहुल गांधी और प्रधानमंत्री मोदी के बीच सीधी तुलना से इनकार करते हुए कहा कि ऐसी तुलना 'गलत' होगी। उन्होंने तर्क दिया कि 2014 से राहुल गांधी कांग्रेस का चेहरा हैं, किंतु उनके नेतृत्व में पार्टी कुछ राज्यों को छोड़कर लगातार चुनाव हारती रही है। उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी वह जनादेश अपने और कांग्रेस पार्टी के लिए नहीं ला पा रहे हैं — यह उनकी एक बड़ी असफलता है।'
उन्होंने यह भी कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 99 सीटें जीतीं और 'भारत जोड़ो यात्रा' का सकारात्मक परिणाम आया, परंतु राहुल गांधी ऐसे कार्यक्रमों के बाद 'गायब हो जाते हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति 24 घंटे और 365 दिनों का काम है और केवल गठबंधन के सहारे जीत हासिल करने की मानसिकता पार्टी के लिए उचित नहीं।
सोनिया गांधी और प्रणब मुखर्जी प्रसंग
यह पूछे जाने पर कि क्या सोनिया गांधी ने प्रणब मुखर्जी को प्रधानमंत्री बनने से रोका था, शर्मिष्ठा मुखर्जी ने सतर्क उत्तर दिया। उन्होंने कहा कि 2004 में सोनिया गांधी ने मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री चुना और इसका कारण केवल वही बता सकती हैं। उन्होंने यह अवश्य स्वीकार किया कि उनके पिता का राजनीतिक अनुभव मनमोहन सिंह से अधिक था और वे इंदिरा गांधी के अत्यंत निकट थे।
नेहरू का योगदान और मोदी की विरासत
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू के योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र की जड़ें जिस गहराई तक फैली हैं, उसका श्रेय नेहरू को मिलना चाहिए — उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण और संस्थान-निर्माण को इतिहास नकार नहीं सकता।
प्रधानमंत्री मोदी की उपलब्धियों में उन्होंने 'डिजिटल इंडिया' और अर्थव्यवस्था के डिजिटलीकरण को विशेष रूप से उद्धृत किया — यह कहते हुए कि आज दूरदराज के गाँवों में भी मोबाइल से भुगतान संभव है। साथ ही उन्होंने कहा कि किसी भी नेता की नीतियों का विरोध लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है और इतिहास ही किसी प्रधानमंत्री की अंतिम परीक्षा लेता है।