कांग्रेस ने केरल में 92 विधानसभा सीटों के लिए 37 उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी की
सारांश
Key Takeaways
- कांग्रेस ने 92 सीटों पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है।
- अंतिम सूची में 37 उम्मीदवार हैं।
- वरिष्ठ नेताओं का समर्थन किया गया है।
- बागी नेताओं को भी कांग्रेस का समर्थन मिला है।
- पार्टी के भीतर असंतोष की स्थिति है।
नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने के लिए अब केवल तीन दिन बचे हैं। इसी कारण, कांग्रेस ने गुरुवार की रात अपनी अंतिम सूची जारी कर दी, जिसमें 37 निर्वाचन क्षेत्रों के नाम शामिल हैं। इसके साथ ही, पिछले चार दिनों से चल रही गहन बातचीत, बहस और हाई-वोल्टेज ड्रामे का अंत हो गया।
केरल विधानसभा में, जिसमें कुल 140 सदस्य हैं, पार्टी 92 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इसके अलावा, तीन निर्वाचन क्षेत्रों में उन बागी नेताओं को समर्थन दिया जाएगा जिन्होंने सीपीआई-एम छोड़कर अपना गुट बना लिया है।
इस घोषणा में हुई देरी से यह स्पष्ट होता है कि पार्टी नेतृत्व को गुटों में संतुलन बनाए रखने, पुराने नेताओं को शामिल करने और नए चेहरों को जोड़ने में कितनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
सबसे नाटकीय पल तब आया जब वरिष्ठ नेता और कन्नूर लोकसभा सांसद के. सुधाकरन ने अपनी नाराजगी व्यक्त की और पार्टी छोड़ने की भी धमकी दी।
हालांकि, यह संकट वरिष्ठ नेता ए.के. एंटनी के समय पर किए गए हस्तक्षेप से टल गया; उनकी समझाने-बुझाने की कोशिशों से माहौल शांत हुआ और लोगों का गुस्सा ठंडा पड़ा।
दिल्ली छोड़ने से पहले, सुधाकरन ने पार्टी के प्रति अपनी वफादारी जताई। उन्होंने कहा कि "विशाल कांग्रेस पार्टी के सामने वह एक बहुत छोटे व्यक्ति हैं" और चुनाव प्रचार में सबसे आगे रहने का आश्वासन दिया।
अंतिम सूची में अनुभवी नेताओं और नए चेहरों का एक अच्छा मिश्रण देखने को मिला है।
वरिष्ठ नेताओं जैसे एन. शक्तन, टी. सरतचंद्र प्रसाद, वरकला कहार और वी. शिवकुमार को चुनावी मैदान में उतारा गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी अनुभवी हाथों पर निर्भर है।
इसी के साथ, एबि कुरियाकोस, रॉय के. पॉलोज़ और पझाकुलम मधु जैसे पुराने कार्यकर्ताओं को पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने का मौका दिया गया है।
हालांकि, मौजूदा विधायक एल्डोस कुन्नप्पल्ली को सूची से बाहर रखे जाने पर पार्टी के अंदर असंतोष उत्पन्न हुआ है। उन्होंने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें सूची से बाहर रखे जाने का कारण नहीं पता है।
एक और खास नाम संदीप वारियर का है, जो नवंबर 2024 में कांग्रेस में शामिल हुए थे। वह सीपीआई-एम के गढ़ माने जाने वाले त्रिकरिपुर निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने जा रहे हैं।
एक रणनीतिक कदम के तहत, कांग्रेस ने सीपीआई-एम के तीन बागी नेताओं को समर्थन देने का भी निर्णय लिया है। इनमें पूर्व मंत्री जी. सुधाकरन, पी.के. शशि और टी.के. गोविंदन शामिल हैं, जिन्होंने पार्टी के नेतृत्व की आलोचना की थी।
अब जब सूची जारी हो चुकी है, तो सभी की नजर इस बात पर है कि जिन लोगों को टिकट नहीं मिला है, क्या वे पार्टी के फैसले को मान लेंगे या कोई नया विवाद खड़ा करेंगे? कांग्रेस के लिए यह एक जानी-पहचानी चुनौती है, क्योंकि वह एक बेहद महत्वपूर्ण चुनावी लड़ाई में शामिल होने जा रही है।