31 जुलाई 2026
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मध्य प्रदेश में आदिवासी अधिकारों पर कांग्रेस का राज्यव्यापी अभियान, उमंग सिंघार ने किया ऐलान

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मध्य प्रदेश में आदिवासी अधिकारों पर कांग्रेस का राज्यव्यापी अभियान, उमंग सिंघार ने किया ऐलान

सारांश

कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में आदिवासी अधिकारों को लेकर एक विशेष समिति गठित की है, जो जल, जंगल, जमीन और रोज़गार जैसे मुद्दों पर ज़मीनी अध्ययन के बाद भाजपा सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी। विपक्ष नेता उमंग सिंघार के नेतृत्व में यह अभियान राज्य की आदिवासी राजनीति को नई दिशा दे सकता है।

मुख्य बातें

AICC ने 'मध्य प्रदेश आदिवासी अधिकार, संरक्षण और सशक्तिकरण समिति' का गठन किया है।
समिति की पहली बैठक 30 जुलाई 2026 को भोपाल स्थित राज्य कांग्रेस मुख्यालय में हुई।
विपक्ष नेता उमंग सिंघार ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों में चरणबद्ध फील्ड स्टडी और आउटरीच कार्यक्रमों की घोषणा की।
एजेंडे में जल, जंगल और जमीन , शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार और संवैधानिक अधिकार शामिल हैं।
समिति में विक्रांत भूरिया , बाला बच्चन , ओंकार सिंह मरकाम सहित आठ सदस्य हैं।
रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे BJP सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने 30 जुलाई 2026 को घोषणा की कि पार्टी पूरे मध्य प्रदेश में आदिवासी मुद्दों पर राज्यव्यापी फील्ड अभियान चलाएगी। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) द्वारा गठित विशेष समिति आदिवासी बहुल क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर जानकारी एकत्र करने के बाद अपनी सिफारिशें तैयार करेगी।

समिति की पहली बैठक और एजेंडा

'मध्य प्रदेश आदिवासी अधिकार, संरक्षण और सशक्तिकरण समिति' की पहली बैठक गुरुवार को भोपाल स्थित राज्य कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित हुई। बैठक में आदिवासी समुदाय के संवैधानिक अधिकारों, जल, जंगल और जमीन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, रोज़गार, आजीविका और समग्र विकास से जुड़े अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।

पार्टी के अनुसार, समिति ने आदिवासी समुदाय की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए एक व्यवस्थित रोडमैप तैयार करने का निर्णय लिया है, जिसमें विभिन्न ज़िलों में सीधी बातचीत और आउटरीच कार्यक्रम शामिल होंगे।

सिंघार का पक्ष और पार्टी की प्रतिबद्धता

सिंघार ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने से पहले आदिवासी बहुल इलाकों में चरणबद्ध तरीके से फील्ड स्टडी और आउटरीच कार्यक्रम आयोजित करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी आदिवासी समुदायों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और सरकार के सामने उनकी चिंताओं को मज़बूती से उठाती रहेगी।

समिति में शामिल प्रमुख सदस्य

बैठक में समिति के सदस्य विक्रांत भूरिया, बाला बच्चन, ओंकार सिंह मरकाम, फुंदेलाल मार्को, झुमा सोलंकी, संजय उइके, सुनील उइके और अशोक मार्सकोले उपस्थित रहे। इन सभी का आदिवासी समुदायों से सीधा जुड़ाव और प्रतिनिधित्व है।

भाजपा सरकार पर राजनीतिक दबाव की रणनीति

यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस आदिवासी कल्याण, वन अधिकारों और भूमि के मालिकाना हक के मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राज्य सरकार पर लगातार हमलावर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समिति की कवायद से मध्य प्रदेश में आदिवासी मुद्दों पर कांग्रेस के राजनीतिक अभियान को नई धार मिलेगी। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में आदिवासी मतदाता कई विधानसभा सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

समिति की रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे सरकार के समक्ष रखा जाएगा — यह देखना अहम होगा कि भाजपा सरकार इन सिफारिशों पर किस प्रकार प्रतिक्रिया देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह अभियान चुनावी मौसम की एक और कवायद बनकर रह सकता है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस की आदिवासी अधिकार समिति क्या है और इसे किसने बनाया?
यह समिति AICC द्वारा गठित की गई है और इसका पूरा नाम 'मध्य प्रदेश आदिवासी अधिकार, संरक्षण और सशक्तिकरण समिति' है। इसका उद्देश्य मध्य प्रदेश में आदिवासी समुदायों के संवैधानिक अधिकारों, वन अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार से जुड़े मुद्दों का अध्ययन करना है।
उमंग सिंघार कौन हैं और इस अभियान में उनकी भूमिका क्या है?
उमंग सिंघार मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं। उन्होंने इस राज्यव्यापी अभियान की घोषणा की है और कहा है कि पार्टी आदिवासी बहुल इलाकों में चरणबद्ध फील्ड स्टडी के बाद सरकार को सिफारिशें सौंपेगी।
इस समिति के अभियान में कौन-से मुद्दे शामिल हैं?
समिति जल, जंगल और जमीन के अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, रोज़गार, आजीविका और आदिवासी समुदाय के संवैधानिक अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करेगी। विभिन्न ज़िलों में सीधी बातचीत और आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
समिति की रिपोर्ट किसे सौंपी जाएगी?
जमीनी अध्ययन और फील्ड स्टडी पूरी होने के बाद समिति की रिपोर्ट मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। पार्टी का कहना है कि इससे आदिवासी समुदाय की चिंताओं को सरकारी स्तर पर मज़बूती से उठाया जा सकेगा।
इस अभियान का मध्य प्रदेश की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
मध्य प्रदेश में आदिवासी मतदाता कई विधानसभा सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। कांग्रेस का यह अभियान भाजपा सरकार पर आदिवासी कल्याण और वन अधिकारों के मुद्दे पर राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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