जल शिक्षा पर सीआर पाटिल का जोर: स्कूल-कॉलेज पाठ्यक्रम में जुड़ेगा जल प्रबंधन, नमामि गंगे के 368 प्रोजेक्ट पूरे
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने 8 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में एम्पावर्ड टास्क फोर्स (ETF) की 20वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जल शिक्षा विजन को आगे बढ़ाने पर विशेष बल दिया। इस विजन के अंतर्गत स्कूली पाठ्यक्रम में जल से जुड़े विषयों को शामिल किया जाएगा और उच्च शिक्षण संस्थानों में जल प्रबंधन एवं गवर्नेंस के पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे। यह पहल ऐसे समय में आई है जब देश में जल संकट की गंभीरता लगातार बढ़ रही है और नदियों के कायाकल्प के लिए प्रशिक्षित जनशक्ति की माँग तेज़ होती जा रही है।
जल शिक्षा का विस्तृत खाका
पाटिल ने बैठक में रेखांकित किया कि शैक्षणिक पहलें एक सुदृढ़ ज्ञान-आधार तैयार करने के साथ-साथ ऐसे पेशेवरों का कैडर विकसित करने में सहायक होंगी, जो नदी प्रबंधन के पारिस्थितिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और नीति-संबंधी आयामों को कुशलतापूर्वक संभाल सकें। उन्होंने सुझाया कि ये पाठ्यक्रम शहर और राज्य स्तर पर नदी-पेशेवरों तथा छात्रों के लिए उपलब्ध कराए जाएँ। इन पाठ्यक्रमों को पूरा करने वाले छात्रों को शहरी नदी-संबंधी परियोजनाओं में प्राथमिकता देने पर भी विचार किया जा सकता है।
नमामि गंगे: प्रगति और आँकड़े
बैठक में नमामि गंगे कार्यक्रम की प्रगति की व्यापक समीक्षा हुई। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 तक कुल ₹43,266 करोड़ की लागत से 527 परियोजनाओं को स्वीकृति दी जा चुकी है, जिनमें से 368 परियोजनाएँ पूर्ण हो चुकी हैं। सीवरेज अवसंरचना के अंतर्गत 219 परियोजनाओं को मंजूरी मिली है, जिससे 6,603 MLD की ट्रीटमेंट क्षमता और 5,245 किलोमीटर का सीवर नेटवर्क तैयार हुआ है। इनमें से 147 परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं, जिनसे 4,339 MLD सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता और 4,615 किलोमीटर का सीवर नेटवर्क सक्रिय हो चुका है।
तकनीकी और नीतिगत अपडेट
बैठक में यह जानकारी दी गई कि बरौनी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के लिए संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) प्राप्त हो चुकी है और मूल्यांकन हेतु IIT-BHU को भेजी गई है। वहीं, पश्चिम बंगाल के शांतिपुर STP की DPR को कार्यकारी समिति की स्वीकृति मिल गई है। बिहार और पश्चिम बंगाल ने ट्रीटेड वेस्टवॉटर के पुनः उपयोग पर अपनी नीति अधिसूचित कर दी है, जबकि झारखंड राज्य कैबिनेट की मंजूरी की प्रक्रिया में है। इसके अलावा, सीवेज अवसंरचना, DPR तैयारी एवं मूल्यांकन, भूमि उपलब्धता, एक्विफर मैपिंग, वेटलैंड्स, सिटी सैनिटेशन एक्शन प्लान (CSAP), एरियल ड्रेनेज मैपिंग और राज्य गंगा समितियों की बैठकों की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई।
नदी कायाकल्प के प्रमुख उपाय
केंद्रीय मंत्री ने नदियों के समग्र कायाकल्प में तेज़ी लाने के लिए कई महत्त्वपूर्ण उपायों पर चर्चा की। इनमें बेहतर सीवेज अवसंरचना, वैज्ञानिक जल प्रबंधन, ट्रीटेड वेस्टवॉटर का सुरक्षित पुनः उपयोग, पारिस्थितिक बहाली, भूजल प्रबंधन, प्रकृति-आधारित समाधान और हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय शामिल हैं। पाटिल ने केंद्र सरकार की नदियों के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को भी दोहराया।
बैठक में प्रमुख उपस्थिति
इस बैठक में जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी, जल संसाधन विभाग की सचिव अर्चना वर्मा, पेयजल और स्वच्छता विभाग के सचिव अशोक के.के. मीना तथा नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG) के महानिदेशक राजीव कुमार मित्तल भी सम्मिलित हुए। जल शिक्षा और नदी कायाकल्प के इन समन्वित प्रयासों का असर आने वाले वर्षों में नीति निर्माण और युवा पीढ़ी की संवेदनशीलता दोनों पर स्पष्ट रूप से दिखने की उम्मीद है।