23 अगस्त 2026
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दादा माजरा डंपिंग ग्राउंड: AAP नेता प्रेम गर्ग बोले — जहरीली मीथेन गैस से चंडीगढ़वासियों को खतरा

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दादा माजरा डंपिंग ग्राउंड: AAP नेता प्रेम गर्ग बोले — जहरीली मीथेन गैस से चंडीगढ़वासियों को खतरा

सारांश

चंडीगढ़ के दादा माजरा डंपिंग ग्राउंड में 10-12 मीटर गहरा दबा कूड़ा मीथेन गैस उगल रहा है — और AAP का आरोप है कि ₹70 करोड़ का ठेका देने के बाद भी न कूड़ा हटा, न कोई निगरानी हुई, और कोर्ट में झूठे हलफनामे दाखिल किए गए।

मुख्य बातें

AAP कोर कमेटी अध्यक्ष प्रेम गर्ग ने 22 अगस्त को दादा माजरा डंपिंग ग्राउंड के पास प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्वास्थ्य खतरे की चेतावनी दी।
IOCL के सर्वेक्षण के अनुसार डंपिंग ग्राउंड में 10 से 12 मीटर गहराई तक कूड़ा अभी भी दबा हुआ है।
लेगेसी वेस्ट हटाने के लिए दो कंपनियों को ₹70 करोड़ का ठेका दिया गया, लेकिन निगम की ओर से कोई पर्यवेक्षक तैनात नहीं किया गया।
AAP ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने न्यायालय में बार-बार झूठे हलफनामे दाखिल कर कूड़ा हटाने का दावा किया।
₹70-75 लाख की लागत से तैयार DPR को बाद में रद्द कर दिया गया, जिससे निवेश बर्बाद हुआ।
गर्ग ने चेताया कि दबे कूड़े से निकलने वाली मीथेन गैस आवासीय क्षेत्रों तक पहुँच सकती है।

चंडीगढ़ के दादा माजरा स्थित डंपिंग ग्राउंड अब स्थानीय निवासियों के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। आम आदमी पार्टी (AAP) की कोर कमेटी के अध्यक्ष प्रेम गर्ग ने 22 अगस्त को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि कूड़े के इस पहाड़ से निकलने वाली मीथेन गैस आसपास की आबोहवा को जहरीला बना रही है और प्रशासन की लापरवाही स्थिति को और विकराल बना रही है।

मौजूदा स्थिति और खतरे का स्तर

गर्ग ने पत्रकारों को बताया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन जानबूझकर डंपिंग ग्राउंड के पास किया गया, ताकि आम जनता यह महसूस कर सके कि वे किस स्तर के खतरे के बीच जी रहे हैं। उनके अनुसार, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के एक सर्वेक्षण में यह सामने आया है कि डंपिंग ग्राउंड में 10 से 12 मीटर गहराई तक कूड़ा अभी भी दबा हुआ है। इस दबे हुए कूड़े से मीथेन गैस उत्पन्न हो रही है, जो रासायनिक प्रतिक्रियाओं के साथ मिलकर पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुँचा सकती है।

गर्ग ने स्पष्ट किया कि यदि इस लेगेसी वेस्ट को समय रहते नहीं निकाला गया, तो उससे उत्पन्न मीथेन — जो एक अत्यंत जहरीली और ज्वलनशील गैस है — आसपास के आवासीय इलाकों तक पहुँच सकती है, जिससे स्वास्थ्य संकट और विस्फोट का खतरा दोनों बढ़ जाएंगे।

कोर्ट में हलफनामे पर गंभीर आरोप

गर्ग ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारियों ने न्यायालय में बार-बार हलफनामा दाखिल कर यह दावा किया है कि कूड़ा हटा दिया गया है, जबकि ज़मीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। उनके अनुसार, यह मामला अभी भी अदालत में विचाराधीन है और इस दौरान झूठे बयान देना न्यायिक प्रक्रिया के साथ गंभीर खिलवाड़ है।

₹70 करोड़ के ठेके पर सवाल

AAP नेता ने बताया कि लेगेसी वेस्ट हटाने का ₹70 करोड़ का ठेका दो कंपनियों को दिया गया था। इस ठेके का उद्देश्य था कि दबे हुए कूड़े को बाहर निकालकर उसे पुनः उपयोगी बनाया जाए। हालांकि, गर्ग के अनुसार, नगर निगम की ओर से कोई भी पर्यवेक्षक (सुपरवाइज़र) तैनात नहीं किया गया, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि कितने ट्रक कूड़ा वास्तव में हटाया गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि बायो-सेल की बिक्री से प्राप्त राशि — जो नगर निगम को मिलनी थी — आखिर कहाँ गई।

इससे पहले AAP ने ₹70-75 लाख की लागत से एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन गर्ग के अनुसार, बाद में उस DPR को भी रद्द कर दिया गया, जिससे उस पर लगाई गई राशि पूरी तरह व्यर्थ हो गई।

भाजपा पर निशाना और भविष्य की चुनौतियाँ

गर्ग ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि अब भाजपा के पास इस समस्या से निपटने का कोई ठोस योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों में राज्यपाल के दौरे हुए और कई संयंत्रों का उद्घाटन किया गया, लेकिन वास्तव में एक भी संयंत्र अभी तक सुचारू रूप से नहीं चल रहा है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डंपिंग ग्राउंड की भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण — चाहे क्रिकेट ग्राउंड हो या कोई अन्य प्रतिष्ठान — तब तक संभव नहीं है जब तक लेगेसी वेस्ट पूरी तरह नहीं हटाया जाता। उनके अनुसार, मिट्टी डालकर ऊपर से ढक देना कोई समाधान नहीं है, बल्कि यह समस्या को और जटिल बना देता है।

आगे की राह

गर्ग के अनुसार, अब पूरी प्रक्रिया सिरे से शुरू करनी होगी, जो न केवल समय-साध्य होगी बल्कि अतिरिक्त संसाधनों की भी माँग करेगी। उन्होंने माँग की कि भाजपा अपना स्पष्ट कार्ययोजना सार्वजनिक करे और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। यदि शीघ्र कदम नहीं उठाए गए, तो दादा माजरा और आसपास के इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों का स्वास्थ्य संकट में पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह महज़ लापरवाही नहीं, जवाबदेही की पूर्ण अनुपस्थिति है। कोर्ट में बार-बार झूठे हलफनामे दाखिल करने के आरोप यदि सच हैं, तो यह न्यायिक अवमानना की श्रेणी में आ सकता है — जिस पर मीडिया और विपक्ष दोनों को और तीखा दबाव बनाना चाहिए। IOCL के सर्वे का हवाला देकर AAP ने तकनीकी आधार पर अपना पक्ष मज़बूत किया है, लेकिन असली सवाल यह है कि जब यह पार्टी सत्ता में थी, तब DPR रद्द करने का निर्णय किसने और क्यों लिया — यह पहलू अभी भी अनुत्तरित है।
RashtraPress
23 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दादा माजरा डंपिंग ग्राउंड से क्या खतरा है?
IOCL के सर्वेक्षण के अनुसार डंपिंग ग्राउंड में 10 से 12 मीटर गहराई तक कूड़ा दबा हुआ है, जिससे मीथेन गैस उत्पन्न हो रही है। यह जहरीली और ज्वलनशील गैस आसपास के आवासीय इलाकों में फैलकर गंभीर स्वास्थ्य और सुरक्षा संकट पैदा कर सकती है।
₹70 करोड़ के ठेके का क्या हुआ?
लेगेसी वेस्ट हटाने के लिए दो कंपनियों को ₹70 करोड़ का ठेका दिया गया था, लेकिन AAP के प्रेम गर्ग के अनुसार नगर निगम ने कोई पर्यवेक्षक तैनात नहीं किया। इससे न तो यह स्पष्ट हो सका कि कितना कूड़ा हटाया गया और न ही बायो-सेल बिक्री की राशि का हिसाब सामने आया।
क्या यह मामला अदालत में है?
हाँ, दादा माजरा डंपिंग ग्राउंड का मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। AAP ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों ने बार-बार हलफनामा दाखिल कर कूड़ा हटाने का दावा किया, जबकि ज़मीन पर स्थिति अभी भी जस की तस है।
DPR क्यों रद्द की गई और इसका क्या असर पड़ा?
AAP ने ₹70-75 लाख की लागत से एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन बाद में इसे रद्द कर दिया गया। गर्ग के अनुसार इससे न केवल निवेश बर्बाद हुआ, बल्कि अब पूरी प्रक्रिया सिरे से शुरू करनी होगी जो समय और संसाधन दोनों की दृष्टि से बेहद जटिल होगी।
क्या डंपिंग ग्राउंड की ज़मीन पर निर्माण हो सकता है?
AAP नेता प्रेम गर्ग के अनुसार, जब तक लेगेसी वेस्ट पूरी तरह नहीं हटाया जाता, इस भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण — क्रिकेट ग्राउंड, संयंत्र या कोई भी प्रतिष्ठान — संभव नहीं है। ऊपर से मिट्टी डालकर ढकना कोई स्थायी समाधान नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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