रेणुकास्वामी हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने प्रदोष को सरकारी गवाह बनाने का फैसला बरकरार रखा, दर्शन को बड़ा झटका
सारांश
मुख्य बातें
कन्नड़ अभिनेता दर्शन को रेणुकास्वामी हत्याकांड में 8 अक्टूबर 2026 को उस समय बड़ा झटका लगा जब सर्वोच्च न्यायालय ने आरोपी नंबर 14 प्रदोष एस. राव को सरकारी गवाह (अप्रूवर) का दर्जा दिए जाने को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। इस फैसले के साथ ही दर्शन की बचाव टीम के पास उच्च न्यायालयों में प्रदोष का सरकारी गवाह का दर्जा रद्द कराने के विकल्प व्यावहारिक रूप से बंद हो गए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
यह याचिका दर्शन की पत्नी विजयलक्ष्मी ने दायर की थी। बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी थी कि प्रदोष को सरकारी गवाह का दर्जा देने में निर्धारित प्रक्रिया और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का उचित पालन नहीं किया गया। पीठ ने इस दलील में कोई मेरिट नहीं पाई और याचिका को सीधे खारिज कर दिया।
अदालत ने कर्नाटक उच्च न्यायालय और निचली अदालत के उन आदेशों को भी बरकरार रखा, जिनमें प्रदोष को सरकारी गवाह बनाने की अनुमति दी गई थी। पीठ ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई आधार नहीं है जो शीर्ष अदालत के हस्तक्षेप को उचित ठहराए।
सर्वोच्च न्यायालय की अहम टिप्पणियाँ
पीठ ने कहा कि बचाव पक्ष को सुनवाई के दौरान प्रदोष से जिरह करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा, और उनके बयान की विश्वसनीयता को उसी प्रक्रिया के ज़रिए परखा जा सकता है। दर्शन के वकीलों ने अतिरिक्त समय माँगा, लेकिन अदालत ने यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि पीठ पहले ही प्रासंगिक सामग्री देख चुकी है।
अदालत ने मुकदमे की अब तक की कार्यवाही का संज्ञान लेते हुए एक महत्वपूर्ण तथ्य का उल्लेख किया — मृतक रेणुकास्वामी की माँ अपने बयान से मुकर गई हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए पीठ ने संकेत दिया कि मामले में सरकारी गवाह की उपस्थिति अभियोजन पक्ष के लिए अत्यंत आवश्यक हो सकती है।
प्रदोष की गवाही का महत्व
गौरतलब है कि बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु की निचली अदालत में प्रदोष का सरकारी गवाह के तौर पर बयान दर्ज किया जा चुका है। सर्वोच्च न्यायालय के ताज़ा फैसले के बाद यह बयान अब मुकदमे में औपचारिक साक्ष्य का हिस्सा बन गया है। अभियोजन पक्ष के लिए यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि एक चश्मदीद या प्रत्यक्ष भागीदार की अंदरूनी गवाही मुकदमे की दिशा निर्धारित कर सकती है।
प्रदोष को पहले इस मामले में आरोपी नंबर 14 के रूप में नामज़द किया गया था। निचली अदालत द्वारा उन्हें सरकारी गवाह का दर्जा दिए जाने के फैसले को पहले कर्नाटक उच्च न्यायालय ने और अब सर्वोच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा है।
मामले की पृष्ठभूमि
रेणुकास्वामी हत्याकांड जून 2024 में सामने आया था जब रेणुकास्वामी का शव बेंगलुरु में बरामद किया गया था। इस मामले में कन्नड़ सिनेमा के जाने-माने अभिनेता दर्शन समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया। तब से दर्शन न्यायिक हिरासत में हैं और सभी आरोपी मुकदमे का सामना कर रहे हैं। यह मामला कन्नड़ फिल्म उद्योग के लिए बड़ा आघात बना, क्योंकि दर्शन उस उद्योग के सबसे बड़े सितारों में से एक माने जाते हैं।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद दर्शन और अन्य आरोपियों के लिए प्रदोष के सरकारी गवाह के दर्जे को उच्च न्यायालयों में चुनौती देने का रास्ता बंद हो गया है। बचाव पक्ष के पास अब केवल ट्रायल कोर्ट में जिरह के ज़रिए प्रदोष के बयान और उसकी विश्वसनीयता को कमज़ोर करने का विकल्प बचा है। मुकदमे की आगामी कार्यवाही में प्रदोष की गवाही केंद्रीय भूमिका निभाएगी।