7 अक्टूबर 2026
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रेणुकास्वामी हत्याकांड: प्रदोष के सरकारी गवाह बनने को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

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रेणुकास्वामी हत्याकांड: प्रदोष के सरकारी गवाह बनने को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

सारांश

कन्नड़ फिल्म अभिनेता दर्शन थूगुदीपा की पत्नी विजयलक्ष्मी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आरोपी प्रदोष एस. राव को सरकारी गवाह बनाए जाने को चुनौती दी है। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला की पीठ बुधवार को इस याचिका पर सुनवाई करेगी — फैसला रेणुकास्वामी हत्याकांड के ट्रायल की दिशा बदल सकता है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय रेणुकास्वामी हत्याकांड में बुधवार को अहम याचिका पर सुनवाई करेगा।
याचिकाकर्ता विजयलक्ष्मी , जेल में बंद कन्नड़ अभिनेता दर्शन थूगुदीपा की पत्नी हैं।
आरोपी संख्या 14 , प्रदोष एस.
राव , ने अगस्त 2026 में सरकारी गवाह बनने के लिए आवेदन दिया था।
प्रदोष ने शपथ के तहत करीब तीन घंटे का बयान दर्ज कराया, जिसमें हत्या की रात पत्तनगेरे शेड की घटनाओं का विवरण है।
ट्रायल कोर्ट और कर्नाटक उच्च न्यायालय दोनों ने सरकारी गवाह के दर्जे को पहले बरकरार रखा था।
मामले में कुल 17 आरोपी हैं, जिन पर जून 2024 में 33 वर्षीय रेणुकास्वामी के अपहरण, यातना और हत्या का आरोप है।

सर्वोच्च न्यायालय रेणुकास्वामी हत्याकांड से जुड़ी एक महत्वपूर्ण याचिका पर बुधवार, 8 अक्टूबर 2026 को सुनवाई करेगा। जेल में बंद कन्नड़ फिल्म अभिनेता दर्शन थूगुदीपा की पत्नी विजयलक्ष्मी ने इस मामले के आरोपी संख्या 14, प्रदोष एस. राव, को सरकारी गवाह (अप्रूवर) का दर्जा दिए जाने के विरुद्ध शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है। यह मामला जून 2024 में बेंगलुरु में हुई 33 वर्षीय फार्मेसी कर्मी रेणुकास्वामी की कथित हत्या से संबंधित है।

मामले की पृष्ठभूमि

जून 2024 में बेंगलुरु के पत्तनगेरे इलाके में कथित तौर पर रेणुकास्वामी का अपहरण, यातना और हत्या की गई थी। अभिलेखों के अनुसार, इस मामले में कन्नड़ अभिनेता दर्शन थूगुदीपा, अभिनेत्री पवित्रा गौड़ा और 15 अन्य आरोपियों पर बेंगलुरु सिटी सिविल एंड सेशन कोर्ट में ट्रायल चल रहा है। पीड़ित रेणुकास्वामी एक फार्मेसी कर्मी था और उस समय उसकी आयु 33 वर्ष थी।

प्रदोष का सरकारी गवाह बनने का क्रम

अभिनेता दर्शन का करीबी सहयोगी बताए जाने वाले प्रदोष एस. राव ने अगस्त 2026 में सरकारी गवाह बनने के लिए आवेदन किया था। ट्रायल कोर्ट ने उनकी अर्जी स्वीकार करते हुए शर्त के साथ माफी प्रदान की — शर्त यह थी कि वह पूरी घटना का सच्चाई से खुलासा करेंगे। इसके बाद प्रदोष बेंगलुरु सिटी सिविल एंड सेशन कोर्ट में उपस्थित हुए और उन्होंने शपथ के तहत करीब तीन घंटे तक विस्तृत बयान दर्ज कराया, जिसमें हत्या की रात पत्तनगेरे शेड में हुई घटनाओं का विवरण दिया।

निचली अदालतों का रुख

ट्रायल कोर्ट के फैसले को कर्नाटक उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई, किंतु उच्च न्यायालय ने सेशन कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। उच्च न्यायालय ने यह अवश्य स्पष्ट किया कि शेष आरोपियों को ट्रायल के दौरान प्रदोष से जिरह करने का अधिकार होगा। दोनों अदालतों के फैसलों से असंतुष्ट होकर विजयलक्ष्मी ने अब सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला की अध्यक्षता वाली खंडपीठ इस याचिका पर सुनवाई करेगी। विजयलक्ष्मी ने ट्रायल कोर्ट और कर्नाटक उच्च न्यायालय — दोनों के आदेशों को एक साथ चुनौती दी है। यह सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी गवाह का बयान अभियोजन पक्ष के मामले में केंद्रीय भूमिका निभा सकता है।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई का परिणाम तय करेगा कि प्रदोष का बयान ट्रायल में साक्ष्य के रूप में ग्राह्य रहेगा या नहीं। यदि शीर्ष अदालत निचली अदालतों के फैसले पलटती है, तो अभियोजन पक्ष की रणनीति पर गहरा असर पड़ सकता है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अगली सुनवाई की तारीख पर देशभर की नजरें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो अभियोजन पक्ष को अपना पूरा साक्ष्य-ढाँचा नए सिरे से खड़ा करना होगा। गौरतलब है कि हाई-प्रोफाइल सेलिब्रिटी मामलों में सरकारी गवाह की विश्वसनीयता अक्सर सबसे बड़ी कानूनी लड़ाई का केंद्र बन जाती है — और यह मामला उसी परंपरा को आगे बढ़ाता दिखता है।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रेणुकास्वामी हत्याकांड क्या है?
यह जून 2024 में बेंगलुरु में हुई 33 वर्षीय फार्मेसी कर्मी रेणुकास्वामी की कथित हत्या का मामला है। कन्नड़ अभिनेता दर्शन थूगुदीपा, अभिनेत्री पवित्रा गौड़ा और 15 अन्य आरोपियों पर अपहरण, यातना और हत्या के आरोप हैं।
प्रदोष एस. राव को सरकारी गवाह क्यों बनाया गया?
प्रदोष, जो दर्शन का करीबी सहयोगी बताया जाता है, ने अगस्त 2026 में सरकारी गवाह बनने का आवेदन दिया था। ट्रायल कोर्ट ने इस शर्त पर माफी दी कि वह घटना का पूरा सच उजागर करेगा, जिसके बाद उसने तीन घंटे का शपथ-बयान दर्ज कराया।
विजयलक्ष्मी ने सुप्रीम कोर्ट में क्यों अपील की?
ट्रायल कोर्ट और कर्नाटक उच्च न्यायालय दोनों ने प्रदोष के सरकारी गवाह बनने के फैसले को बरकरार रखा था। दोनों अदालतों के आदेशों को एक साथ चुनौती देने के लिए विजयलक्ष्मी ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
इस सुनवाई का ट्रायल पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि सुप्रीम कोर्ट प्रदोष के सरकारी गवाह के दर्जे को रद्द करता है, तो उसका बयान ट्रायल में साक्ष्य के रूप में ग्राह्य नहीं रहेगा, जिससे अभियोजन पक्ष की रणनीति कमजोर पड़ सकती है। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि बाकी आरोपियों को जिरह का अधिकार मिलेगा।
इस मामले में कौन-सी अदालत सुनवाई कर रही है?
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ बुधवार को इस याचिका पर सुनवाई करेगी। मूल ट्रायल बेंगलुरु सिटी सिविल एंड सेशन कोर्ट में जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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