रेणुकास्वामी हत्याकांड: प्रदोष के सरकारी गवाह बनने को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय रेणुकास्वामी हत्याकांड से जुड़ी एक महत्वपूर्ण याचिका पर बुधवार, 8 अक्टूबर 2026 को सुनवाई करेगा। जेल में बंद कन्नड़ फिल्म अभिनेता दर्शन थूगुदीपा की पत्नी विजयलक्ष्मी ने इस मामले के आरोपी संख्या 14, प्रदोष एस. राव, को सरकारी गवाह (अप्रूवर) का दर्जा दिए जाने के विरुद्ध शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है। यह मामला जून 2024 में बेंगलुरु में हुई 33 वर्षीय फार्मेसी कर्मी रेणुकास्वामी की कथित हत्या से संबंधित है।
मामले की पृष्ठभूमि
जून 2024 में बेंगलुरु के पत्तनगेरे इलाके में कथित तौर पर रेणुकास्वामी का अपहरण, यातना और हत्या की गई थी। अभिलेखों के अनुसार, इस मामले में कन्नड़ अभिनेता दर्शन थूगुदीपा, अभिनेत्री पवित्रा गौड़ा और 15 अन्य आरोपियों पर बेंगलुरु सिटी सिविल एंड सेशन कोर्ट में ट्रायल चल रहा है। पीड़ित रेणुकास्वामी एक फार्मेसी कर्मी था और उस समय उसकी आयु 33 वर्ष थी।
प्रदोष का सरकारी गवाह बनने का क्रम
अभिनेता दर्शन का करीबी सहयोगी बताए जाने वाले प्रदोष एस. राव ने अगस्त 2026 में सरकारी गवाह बनने के लिए आवेदन किया था। ट्रायल कोर्ट ने उनकी अर्जी स्वीकार करते हुए शर्त के साथ माफी प्रदान की — शर्त यह थी कि वह पूरी घटना का सच्चाई से खुलासा करेंगे। इसके बाद प्रदोष बेंगलुरु सिटी सिविल एंड सेशन कोर्ट में उपस्थित हुए और उन्होंने शपथ के तहत करीब तीन घंटे तक विस्तृत बयान दर्ज कराया, जिसमें हत्या की रात पत्तनगेरे शेड में हुई घटनाओं का विवरण दिया।
निचली अदालतों का रुख
ट्रायल कोर्ट के फैसले को कर्नाटक उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई, किंतु उच्च न्यायालय ने सेशन कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। उच्च न्यायालय ने यह अवश्य स्पष्ट किया कि शेष आरोपियों को ट्रायल के दौरान प्रदोष से जिरह करने का अधिकार होगा। दोनों अदालतों के फैसलों से असंतुष्ट होकर विजयलक्ष्मी ने अब सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला की अध्यक्षता वाली खंडपीठ इस याचिका पर सुनवाई करेगी। विजयलक्ष्मी ने ट्रायल कोर्ट और कर्नाटक उच्च न्यायालय — दोनों के आदेशों को एक साथ चुनौती दी है। यह सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी गवाह का बयान अभियोजन पक्ष के मामले में केंद्रीय भूमिका निभा सकता है।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई का परिणाम तय करेगा कि प्रदोष का बयान ट्रायल में साक्ष्य के रूप में ग्राह्य रहेगा या नहीं। यदि शीर्ष अदालत निचली अदालतों के फैसले पलटती है, तो अभियोजन पक्ष की रणनीति पर गहरा असर पड़ सकता है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अगली सुनवाई की तारीख पर देशभर की नजरें टिकी हैं।