दशहरे पर सीपीआई(एम) का तीखा प्रहार: वृंदा करात बोलीं — 'वोट चोरों का पुतला जलाया गया'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई(एम)] नेता वृंदा करात ने 20 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में दशहरे के अवसर पर तीखा राजनीतिक बयान दिया — उन्होंने पुतला दहन की परंपरा को लोकतंत्र पर 'हमला' करने वालों और 'वोट चोरी' के आरोपों से जोड़ा। पार्टी ने इस दिन को न केवल धार्मिक उत्सव, बल्कि एक राजनीतिक संदेश के रूप में प्रस्तुत किया।
वृंदा करात का बयान: 'बुराई के पुतले की नई परिभाषा'
वृंदा करात ने कहा, 'आज दशहरा है, जो बुराई पर अच्छाई और अन्याय पर न्याय की जीत का त्योहार है। आज असल में 'अच्छे लोग' वे हैं जो हमारे देश में लोकतंत्र और वोट देने के अधिकार की रक्षा के लिए काम कर रहे हैं।' उन्होंने आगे कहा कि 'जिस पुतले को जलाया जा रहा है, वह उन लोगों का प्रतीक है जो लोकतंत्र पर हमला कर रहे हैं और हमारे वोट चुरा रहे हैं।'
करात के अनुसार, 'न्याय और अन्याय की लड़ाई हो रही है' — और आज का पुतला दहन उसी संघर्ष की अभिव्यक्ति है। यह बयान उस समय आया है जब सौरभ दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने को लेकर विपक्षी दलों में रोष है।
सौरभ दास और आशुतोष रांका की हिरासत पर कड़ी प्रतिक्रिया
न्यायिक हिरासत के विस्तार पर वृंदा करात ने कहा, 'हमने जिन लोगों का पुतला जलाया है, वे न्याय की प्रक्रिया में भी हस्तक्षेप करके अन्याय दिला रहे हैं। सौरभ दास और आशुतोष रांका जैसे लोगों के खिलाफ झूठे इल्जाम लगाए गए हैं। वे देशभक्त हैं और देश की जनवाद के लिए संघर्ष की लड़ाई में आगे हैं।' उन्होंने इन दोनों को 'राजनीतिक कारणों से प्रताड़ित' बताया, हालाँकि यह आरोप कथित तौर पर पार्टी की ओर से लगाया गया है और न्यायालय में मामला विचाराधीन है।
सुभाषिनी अली का आरएसएस पर निशाना
पूर्व लोकसभा सदस्य सुभाषिनी अली ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने कहा, 'आज आरएसएस की मीटिंग हुई। उन्होंने शस्त्र पूजा की और बहुत गंदे नारे लगाए, लेकिन कोई कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं है। लेकिन एक पुतला दहन के लिए आफत किया जा रहा है।' यह टिप्पणी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयानों के संदर्भ में की गई।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब विपक्षी नेताओं ने दशहरे जैसे पर्वों पर राजनीतिक बयानबाजी की हो। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मतदाता सूची से नामों के कथित विलोपन का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में गर्म है।
वोट अधिकार की लड़ाई: जमीनी अभियान का दावा
सुभाषिनी अली ने कहा कि कई जगह सरकारी अधिकारियों को शिविर लगाने के लिए 'मजबूर किया गया है' ताकि जिन नागरिकों का मताधिकार छिन गया है, उन तक पहुँचा जा सके। उन्होंने कहा, 'लोगों को मालूम ही नहीं है कि उनका वोट छीना जा चुका है।' पार्टी का दावा है कि वह इन नागरिकों को शिविरों तक ले जाकर उनका अधिकार बहाल कराने की कोशिश कर रही है।
आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान चुनाव-पूर्व माहौल में जनता को प्रभावित करने की कोशिश है, जबकि सीपीआई(एम) इसे लोकतंत्र की रक्षा की मुहिम बताती है। आने वाले दिनों में पार्टी के इस अभियान की दिशा और इस मुद्दे पर सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया महत्त्वपूर्ण होगी।