21 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

दशहरे पर सीपीआई(एम) का तीखा प्रहार: वृंदा करात बोलीं — 'वोट चोरों का पुतला जलाया गया'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दशहरे पर सीपीआई(एम) का तीखा प्रहार: वृंदा करात बोलीं — 'वोट चोरों का पुतला जलाया गया'

सारांश

दशहरे की परंपरा को राजनीतिक हथियार बनाते हुए सीपीआई(एम) ने 'वोट चोरों' का पुतला जलाया। वृंदा करात ने लोकतंत्र पर 'हमले' का आरोप लगाया, सुभाषिनी अली ने आरएसएस की शस्त्र पूजा पर निशाना साधा — यह बयानबाजी उस समय आई जब मतदाता सूची से नाम हटाने का विवाद गहरा रहा है।

मुख्य बातें

सीपीआई(एम) नेता वृंदा करात ने 20 अक्टूबर 2026 को दशहरे पर 'वोट चोरों' के प्रतीक का पुतला दहन किए जाने की बात कही।
करात ने सौरभ दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत को 'न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप' बताया और उन्हें 'देशभक्त' कहा।
पूर्व लोकसभा सदस्य सुभाषिनी अली ने आरएसएस की शस्त्र पूजा और नारों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुतला दहन पर आपत्ति दोहरे मानदंड की मिसाल है।
अली ने दावा किया कि सरकारी अधिकारियों को कई जगह शिविर लगाने के लिए 'मजबूर किया गया' ताकि वंचित मतदाताओं तक पहुँचा जा सके।
पार्टी का आरोप है कि बड़ी संख्या में नागरिकों को पता ही नहीं कि उनका वोट 'छीना जा चुका है।'

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई(एम)] नेता वृंदा करात ने 20 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में दशहरे के अवसर पर तीखा राजनीतिक बयान दिया — उन्होंने पुतला दहन की परंपरा को लोकतंत्र पर 'हमला' करने वालों और 'वोट चोरी' के आरोपों से जोड़ा। पार्टी ने इस दिन को न केवल धार्मिक उत्सव, बल्कि एक राजनीतिक संदेश के रूप में प्रस्तुत किया।

वृंदा करात का बयान: 'बुराई के पुतले की नई परिभाषा'

वृंदा करात ने कहा, 'आज दशहरा है, जो बुराई पर अच्छाई और अन्याय पर न्याय की जीत का त्योहार है। आज असल में 'अच्छे लोग' वे हैं जो हमारे देश में लोकतंत्र और वोट देने के अधिकार की रक्षा के लिए काम कर रहे हैं।' उन्होंने आगे कहा कि 'जिस पुतले को जलाया जा रहा है, वह उन लोगों का प्रतीक है जो लोकतंत्र पर हमला कर रहे हैं और हमारे वोट चुरा रहे हैं।'

करात के अनुसार, 'न्याय और अन्याय की लड़ाई हो रही है' — और आज का पुतला दहन उसी संघर्ष की अभिव्यक्ति है। यह बयान उस समय आया है जब सौरभ दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने को लेकर विपक्षी दलों में रोष है।

सौरभ दास और आशुतोष रांका की हिरासत पर कड़ी प्रतिक्रिया

न्यायिक हिरासत के विस्तार पर वृंदा करात ने कहा, 'हमने जिन लोगों का पुतला जलाया है, वे न्याय की प्रक्रिया में भी हस्तक्षेप करके अन्याय दिला रहे हैं। सौरभ दास और आशुतोष रांका जैसे लोगों के खिलाफ झूठे इल्जाम लगाए गए हैं। वे देशभक्त हैं और देश की जनवाद के लिए संघर्ष की लड़ाई में आगे हैं।' उन्होंने इन दोनों को 'राजनीतिक कारणों से प्रताड़ित' बताया, हालाँकि यह आरोप कथित तौर पर पार्टी की ओर से लगाया गया है और न्यायालय में मामला विचाराधीन है।

सुभाषिनी अली का आरएसएस पर निशाना

पूर्व लोकसभा सदस्य सुभाषिनी अली ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने कहा, 'आज आरएसएस की मीटिंग हुई। उन्होंने शस्त्र पूजा की और बहुत गंदे नारे लगाए, लेकिन कोई कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं है। लेकिन एक पुतला दहन के लिए आफत किया जा रहा है।' यह टिप्पणी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयानों के संदर्भ में की गई।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब विपक्षी नेताओं ने दशहरे जैसे पर्वों पर राजनीतिक बयानबाजी की हो। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मतदाता सूची से नामों के कथित विलोपन का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में गर्म है।

वोट अधिकार की लड़ाई: जमीनी अभियान का दावा

सुभाषिनी अली ने कहा कि कई जगह सरकारी अधिकारियों को शिविर लगाने के लिए 'मजबूर किया गया है' ताकि जिन नागरिकों का मताधिकार छिन गया है, उन तक पहुँचा जा सके। उन्होंने कहा, 'लोगों को मालूम ही नहीं है कि उनका वोट छीना जा चुका है।' पार्टी का दावा है कि वह इन नागरिकों को शिविरों तक ले जाकर उनका अधिकार बहाल कराने की कोशिश कर रही है।

आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान चुनाव-पूर्व माहौल में जनता को प्रभावित करने की कोशिश है, जबकि सीपीआई(एम) इसे लोकतंत्र की रक्षा की मुहिम बताती है। आने वाले दिनों में पार्टी के इस अभियान की दिशा और इस मुद्दे पर सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया महत्त्वपूर्ण होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

उनके पक्ष में ठोस, सत्यापन-योग्य डेटा कहाँ है? सौरभ दास और आशुतोष रांका की हिरासत को 'राजनीतिक प्रतिशोध' बताना एक गंभीर आरोप है, पर मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है — ऐसे में जब तक तथ्य सामने न आएँ, किसी भी पक्ष की बात को अंतिम सत्य मानना पत्रकारिता की बुनियाद को कमज़ोर करेगा। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस विरोधाभास को नज़रअंदाज़ करती है कि जो दल मतदाता अधिकारों की लड़ाई लड़ने का दावा करते हैं, उनके अपने चुनावी इतिहास में भी सवाल रहे हैं।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वृंदा करात ने दशहरे पर किसका पुतला जलाने की बात कही?
वृंदा करात के अनुसार, सीपीआई(एम) ने उन 'लोगों और उस सिस्टम' का पुतला जलाया जो कथित तौर पर लोकतंत्र पर हमला कर रहे हैं और वोट चुरा रहे हैं। उन्होंने किसी व्यक्ति विशेष का नाम नहीं लिया, बल्कि इसे एक प्रतीकात्मक राजनीतिक कदम बताया।
सौरभ दास और आशुतोष रांका कौन हैं और उनकी हिरासत क्यों बढ़ाई गई?
सौरभ दास और आशुतोष रांका को न्यायिक हिरासत में रखा गया है। सीपीआई(एम) का आरोप है कि उन पर झूठे इल्जाम लगाए गए हैं और वे 'देशभक्त' हैं जो जनतांत्रिक संघर्ष में अग्रणी भूमिका निभा रहे थे। मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है।
सुभाषिनी अली ने आरएसएस पर क्या आरोप लगाए?
पूर्व लोकसभा सदस्य सुभाषिनी अली ने कहा कि दशहरे पर आरएसएस की बैठक हुई जिसमें शस्त्र पूजा हुई और 'गंदे नारे' लगाए गए, लेकिन उस पर कोई आपत्ति नहीं हुई। उनके अनुसार, एक पुतला दहन पर जितनी प्रतिक्रिया हुई, वह दोहरे मानदंड को दर्शाती है।
सीपीआई(एम) का वोट अधिकार अभियान क्या है?
सुभाषिनी अली के अनुसार, पार्टी उन नागरिकों तक पहुँचने की कोशिश कर रही है जिनका मतदान अधिकार कथित तौर पर छिन गया है। इसके तहत सरकारी अधिकारियों को शिविर लगाने के लिए 'मजबूर' किया जा रहा है ताकि प्रभावित नागरिकों को उनका अधिकार बहाल हो सके।
यह विवाद किस बड़े मुद्दे से जुड़ा है?
यह बयानबाजी मतदाता सूचियों से नाम कथित रूप से हटाए जाने के उस विवाद से जुड़ी है जो हाल के महीनों में राष्ट्रीय राजनीति में उभरा है। विपक्षी दल इसे सत्तारूढ़ पक्ष की 'लोकतंत्र-विरोधी' कार्रवाई बता रहे हैं, जबकि सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 3 दिन पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले