19 अगस्त 2026
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डेटिंग ऐप से बुजुर्ग को फंसाकर ₹1.30 लाख की ठगी, दिल्ली पुलिस ने दो महिलाओं को दबोचा

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डेटिंग ऐप से बुजुर्ग को फंसाकर ₹1.30 लाख की ठगी, दिल्ली पुलिस ने दो महिलाओं को दबोचा

सारांश

फर्जी डेटिंग प्रोफाइल, टेलीग्राम पर भरोसा और डिफेंस कॉलोनी के रेस्टोरेंट में डिनर — और फिर मोबाइल गायब, खाते खाली। दिल्ली साइबर पुलिस ने सीसीटीवी और बैंकिंग ट्रेल के ज़रिए 67 वर्षीय बुजुर्ग से ₹1.30 लाख ठगने वाली दो महिलाओं को दबोचा।

मुख्य बातें

साउथ-वेस्ट डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस ने 19 अगस्त 2026 को दो महिला आरोपियों — ज्योत्सना (26 वर्ष) और मानशी (21 वर्ष) — को गिरफ्तार किया।
आरोपियों ने फर्जी डेटिंग ऐप प्रोफाइल से 67 वर्षीय बुजुर्ग से संपर्क किया और डिफेंस कॉलोनी के रेस्टोरेंट में मुलाकात के दौरान मोबाइल फोन चुराया।
चोरी के मोबाइल से यूपीआई के ज़रिए बुजुर्ग के दो बैंक खातों से ₹1.30 लाख ट्रांसफर किए गए; इनमें से ₹90,000 एटीएम से नकद निकाले गए।
सबूत मिटाने के लिए आरोपियों ने कथित तौर पर चोरी का मोबाइल फोन नष्ट कर दिया।
सीसीटीवी फुटेज , बैंकिंग ट्रेल और तकनीकी निगरानी से पहचान कर दोनों को गिरफ्तार किया गया; जांच जारी है।

नई दिल्ली की साउथ-वेस्ट डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस ने 19 अगस्त 2026 को धोखाधड़ी और चोरी के एक संगठित मामले का पर्दाफाश करते हुए दो महिला आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोप है कि दोनों ने एक फर्जी डेटिंग ऐप प्रोफाइल के ज़रिए 67 वर्षीय एक बुजुर्ग को जाल में फँसाया, उनका मोबाइल फोन चुराया और यूपीआई के माध्यम से उनके बैंक खातों से ₹1.30 लाख की अनधिकृत निकासी कर ली।

कैसे रची गई साजिश

पुलिस के अनुसार, 26 वर्षीया ज्योत्सना (दिल्ली निवासी) ने एक डेटिंग ऐप पर नकली पहचान से प्रोफाइल बनाई और शिकायतकर्ता बुजुर्ग से संपर्क किया। इसके बाद बातचीत टेलीग्राम पर स्थानांतरित कर दी गई। ज्योत्सना ने अपनी 21 वर्षीया साथी मानशी को भी इस योजना में शामिल किया। मानशी ने डेटिंग प्रोफाइल की असली 'होल्डर' बनकर शिकायतकर्ता से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की, जिससे उन्हें यकीन हो गया कि वे उसी महिला से मिल रहे हैं जिससे उन्होंने ऑनलाइन बातचीत की थी।

दोनों आरोपी शिकायतकर्ता से 20 जुलाई और 24 जुलाई 2026 को मिलीं। दूसरी मुलाकात डिफेंस कॉलोनी के एक रेस्टोरेंट में हुई, जहाँ डिनर के बाद रेस्टोरेंट से निकलते समय कथित तौर पर बुजुर्ग का मोबाइल फोन चोरी कर लिया गया।

मुख्य घटनाक्रम

मोबाइल फोन हाथ लगते ही आरोपियों ने शिकायतकर्ता के दो बैंक खातों से यूपीआई के ज़रिए ₹1.30 लाख ट्रांसफर कर लिए। जांच में सामने आया कि यह रकम पहले एक आरोपी के नाम पर खुले खाते में आई, फिर दूसरी आरोपी के बैंक खाते में भेजी गई। इसमें से ₹90,000 एटीएम के ज़रिए नकद निकाले गए। चोरी हुए मोबाइल फोन को बाद में कथित तौर पर सबूत मिटाने के लिए नष्ट कर दिया गया।

शिकायतकर्ता ने 27 जुलाई 2026 को साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज हुई।

पुलिस की जांच और गिरफ्तारी

साइबर पुलिस टीम ने सीसीटीवी फुटेज, बैंकिंग ट्रेल और तकनीकी निगरानी के संयुक्त विश्लेषण से दोनों संदिग्धों की पहचान की। सीसीटीवी में दोनों महिलाएं ठगी की रकम एटीएम से निकालते हुए दिखीं। बैंकिंग ट्रांजेक्शन की तकनीकी जांच ने उनका पता लगाने में निर्णायक भूमिका निभाई। अंततः दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

पूछताछ में आरोपियों का पूरा मोडस ऑपरेंडी सामने आया — फर्जी ऑनलाइन पहचान, व्यक्तिगत मुलाकात में विश्वास बनाना और फिर डिजिटल माध्यम से धन की अनधिकृत निकासी।

आम जनता पर असर और सावधानी

यह मामला डेटिंग ऐप के ज़रिए होने वाले साइबर अपराध की बढ़ती प्रवृत्ति को उजागर करता है, जहाँ नकली पहचान और व्यक्तिगत विश्वास का दुरुपयोग कर बुजुर्गों को निशाना बनाया जा रहा है। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, अनजान व्यक्तियों से ऑनलाइन संपर्क के बाद व्यक्तिगत मुलाकात में विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए और अपना मोबाइल फोन किसी भी स्थिति में अजनबियों की पहुँच में नहीं छोड़ना चाहिए।

दोनों आरोपी फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं और आगे की जांच जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि डिजिटल विश्वास के सुनियोजित दोहन की कहानी है — जहाँ फर्जी पहचान, टेलीग्राम पर भावनात्मक जुड़ाव और व्यक्तिगत मुलाकात को एक सटीक ठगी की स्क्रिप्ट में पिरोया गया। चिंताजनक यह है कि बुजुर्ग वर्ग तेज़ी से डेटिंग ऐप साइबर अपराध का नया निशाना बन रहा है, जबकि डिजिटल साक्षरता अभियान अभी भी इस आयु वर्ग तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुँचे हैं। पुलिस की त्वरित तकनीकी जांच सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि ऐसे प्लेटफॉर्म पर फर्जी प्रोफाइल की पहचान और रोकथाम की ज़िम्मेदारी डेटिंग ऐप कंपनियों की कब तय होगी।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली डेटिंग ऐप धोखाधड़ी मामले में क्या हुआ?
साउथ-वेस्ट डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस ने दो महिलाओं — ज्योत्सना और मानशी — को गिरफ्तार किया, जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी डेटिंग ऐप प्रोफाइल के ज़रिए 67 वर्षीय बुजुर्ग से संपर्क किया, उनका मोबाइल चुराया और यूपीआई से ₹1.30 लाख की अनधिकृत निकासी की।
आरोपी महिलाओं ने किस तरह से ठगी की?
ज्योत्सना ने नकली पहचान से डेटिंग ऐप प्रोफाइल बनाई और बुजुर्ग से संपर्क किया। मानशी ने प्रोफाइल होल्डर बनकर व्यक्तिगत रूप से मिलकर विश्वास जीता। डिफेंस कॉलोनी के रेस्टोरेंट में डिनर के बाद मोबाइल चुराकर दोनों बैंक खातों से ₹1.30 लाख यूपीआई से ट्रांसफर कर लिए गए।
पुलिस ने आरोपियों को कैसे पकड़ा?
साइबर पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, बैंकिंग ट्रेल और तकनीकी निगरानी के संयुक्त विश्लेषण से दोनों की पहचान की। सीसीटीवी में दोनों महिलाएं एटीएम से रकम निकालते दिखीं, जिससे गिरफ्तारी संभव हुई।
इस मामले में कितनी रकम की ठगी हुई और कैसे?
बुजुर्ग के दो बैंक खातों से यूपीआई के ज़रिए कुल ₹1.30 लाख ट्रांसफर किए गए। इसमें से ₹90,000 एटीएम से नकद निकाले गए। चोरी हुए मोबाइल को बाद में कथित तौर पर सबूत मिटाने के लिए नष्ट कर दिया गया।
डेटिंग ऐप साइबर फ्रॉड से बचने के लिए क्या सावधानी बरतें?
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, अनजान व्यक्तियों से ऑनलाइन परिचय के बाद व्यक्तिगत मुलाकात में मोबाइल फोन सुरक्षित रखें और अपने यूपीआई व बैंकिंग ऐप पर अतिरिक्त पिन लॉक लगाएँ। संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।
राष्ट्र प्रेस
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