दिल्ली चावल घोटाला: 'आप' ने CBI की FIR का हवाला देकर सरकार से माँगा जवाब, 50,645 मीट्रिक टन पर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) ने 1 सितंबर 2026 को दिल्ली सरकार पर कथित चावल घोटाले को लेकर तीखा हमला बोला, जिसमें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा 27 अगस्त 2026 को दर्ज एफआईआर का हवाला दिया गया। 'आप' दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि दिल्ली के गरीबों और प्रवासी मजदूरों के लिए आवंटित करीब 50,645 मीट्रिक टन चावल को गलत तरीके से दूसरी जगह भेज दिया गया।
मुख्य घटनाक्रम
भारद्वाज के अनुसार, यह चावल मूल रूप से दिल्ली के दिहाड़ी मजदूरों, लेबर क्लास, प्रवासी श्रमिकों और उन लोगों को सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने के लिए था, जो सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत कवर नहीं होते। उन्होंने बताया कि संबंधित पत्र को कई महीने बाद 8 अप्रैल 2026 को आगे भेजा गया।
'आप' नेता ने सवाल उठाया कि मंत्री ने यह पत्र अपने विभाग के कमिश्नर को भेजने के बजाय एडिशनल कमिश्नर अरुण कुमार झा को क्यों भेजा। इसके बाद झा ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) के महाप्रबंधक को ई-मेल भेजकर चावल के आवंटन और आपूर्ति की सुविधा देने का अनुरोध किया और एनओसी भी जारी की।
आरोपों का विस्तार
भारद्वाज ने बताया कि 4 मई 2026 को नेरमैक की ओर से मंत्री को दोबारा पत्र भेजकर सूचित किया गया कि उसे 31,000 मीट्रिक टन चावल मिल चुका है और अतिरिक्त 31,000 मीट्रिक टन चावल की मांग की गई। उनके अनुसार इस पत्र को भी मंत्री की ओर से एडिशनल कमिश्नर को भेजा गया और FCI से दोबारा पत्राचार किया गया।
'आप' नेता ने विशेष रूप से एडिशनल कमिश्नर अरुण कुमार झा के कारण बताओ नोटिस के जवाब का हवाला दिया और कहा कि यदि अधिकारी का जवाब सही है, तो CBI को मंत्री की भूमिका की भी विस्तृत जाँच करनी चाहिए।
प्रक्रियागत अनियमितताओं पर सवाल
भारद्वाज ने कहा कि विभागीय नियमों के अनुसार कमिश्नर विभाग का प्रमुख होता है और एडिशनल कमिश्नर के पास इस तरह की एनओसी या प्राधिकरण जारी करने की शक्ति नहीं थी। उन्होंने तर्क दिया कि बिना उचित फाइल प्रक्रिया और वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी के FCI को पत्र भेजे जाने की जाँच आवश्यक है।
गौरतलब है कि भारद्वाज के अनुसार दिल्ली सरकार के करीब डेढ़ साल के कार्यकाल में यह भ्रष्टाचार से जुड़ी दूसरी एफआईआर है — इससे पहले कथित दवा घोटाले में मामला सामने आया था।
पारदर्शिता की माँग
भारद्वाज ने सवाल उठाया कि जब दूसरी बार मंत्री को जानकारी दी गई कि 31,000 मीट्रिक टन चावल उपलब्ध कराया जा चुका है, तो उन्होंने यह क्यों नहीं पूछा कि यह चावल दिल्ली में कहाँ और किन लाभार्थियों को वितरित किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि चावल वितरण के संबंध में न तो कोई सार्वजनिक जानकारी दी गई और न ही किसी वितरण कार्यक्रम का प्रचार किया गया।
आम आदमी पार्टी ने माँग की है कि CBI की जाँच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि चावल आवंटन का प्रस्ताव किसने तैयार किया, किसके निर्देश पर पत्राचार हुआ, FCI से चावल किसे मिला और अंततः यह चावल कहाँ पहुँचा। यह मामला दिल्ली की राजनीति में आने वाले दिनों में और गर्म होने की संभावना है।