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दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश: मेटा 24 घंटे में हटाए AI मॉर्फ तस्वीरें, पीड़िता को पुलिस सुरक्षा

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दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश: मेटा 24 घंटे में हटाए AI मॉर्फ तस्वीरें, पीड़िता को पुलिस सुरक्षा

सारांश

दिल्ली हाई कोर्ट ने मेटा को 24 घंटे में AI मॉर्फ तस्वीरें हटाने का सख्त आदेश दिया और पीड़िता को पुलिस सुरक्षा दी। यह मामला एआई दुरुपयोग, महिला सुरक्षा और डिजिटल प्लेटफॉर्मों की जवाबदेही पर देश में एक अहम कानूनी मिसाल बन सकता है।

मुख्य बातें

दिल्ली हाई कोर्ट ने 25 सितंबर 2026 को मेटा को 24 घंटे में AI मॉर्फ तस्वीरें और वेबलिंक हटाने का आदेश दिया।
पीड़िता महिला को न्यायालय के आदेश पर तत्काल पुलिस सुरक्षा दी जाएगी।
दिल्ली पुलिस को दो सप्ताह के भीतर मामले की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश।
एफआईआर में अभिजीत दीपके , सौरव दास , आशुतोष रांका और रत्ना सिंह के नाम; BNS और IT एक्ट की धाराएँ लागू।
मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को निर्धारित।

दिल्ली हाई कोर्ट ने 25 सितंबर 2026 को एक महत्वपूर्ण आदेश में मेटा को निर्देश दिया कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कथित तौर पर एआई तकनीक से मॉर्फ की गई एक महिला की आपत्तिजनक तस्वीरें और संबंधित वेबलिंक सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और वेबसाइटों से 24 घंटे के भीतर हटाए। न्यायालय ने पीड़िता को तत्काल पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने का भी आदेश दिया और दिल्ली पुलिस को दो सप्ताह के भीतर मामले की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

पीड़िता महिला ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि उसकी तस्वीर को एआई तकनीक के ज़रिए एडिट कर प्रधानमंत्री मोदी के साथ मॉर्फ किया गया और इसे सोशल मीडिया तथा अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किया गया। उसने अदालत से सभी आपत्तिजनक तस्वीरें और उनसे जुड़े वेबलिंक हटाने की माँग की थी। सुनवाई के दौरान न्यायालय को यह भी अवगत कराया गया कि दिल्ली पुलिस इस मामले में एफआईआर पहले ही दर्ज कर चुकी है, फिर भी आपत्तिजनक सामग्री ऑनलाइन बनी हुई है।

एफआईआर और आरोपी

नई दिल्ली के साइबर पुलिस स्टेशन में पीड़िता की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT एक्ट) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर में CJP से जुड़े अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह के नाम शामिल हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने इन चारों को भी नोटिस जारी किया है।

पीड़िता के आरोप और माँगें

महिला ने शिकायत में आरोप लगाया था कि CJP के एक प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने उसे धमकाया, उसकी गरिमा को ठेस पहुँचाने की कोशिश की और उसकी तस्वीर का एआई के ज़रिए दुरुपयोग किया। उसने माँग की है कि तस्वीर बनाने, उसे प्रदर्शन में इस्तेमाल करने, वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर प्रसारित करने और पूरे घटनाक्रम में शामिल व्यक्तियों की भूमिका की गहन जाँच हो।

न्यायालय के निर्देश

हाई कोर्ट ने मेटा को 24 घंटे में सभी आपत्तिजनक तस्वीरें और वेबलिंक हटाने, पीड़िता को पुलिस सुरक्षा देने और दिल्ली पुलिस को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के आदेश दिए। मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में एआई-जनित डीपफेक और मॉर्फ्ड तस्वीरों के दुरुपयोग को लेकर कानूनी और सामाजिक बहस तेज़ हो रही है।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि यह मामला एआई तकनीक के दुरुपयोग, महिलाओं की डिजिटल सुरक्षा और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों की जवाबदेही पर अदालती मिसाल स्थापित कर सकता है। 14 अक्टूबर की सुनवाई में दिल्ली पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट और नोटिस प्राप्तकर्ताओं के जवाब से मामले की दिशा और स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

एफआईआर दर्ज होने के बावजूद आपत्तिजनक सामग्री ऑनलाइन क्यों बनी रही, जो मेटा जैसे प्लेटफॉर्मों की स्वैच्छिक अनुपालन की सीमाओं को उजागर करता है। दूसरा, न्यायालय का यह हस्तक्षेप यह दिखाता है कि मौजूदा IT कानून और साइबर पुलिस तंत्र अकेले पर्याप्त नहीं हैं। AI-जनित मॉर्फ तस्वीरों के मामलों में भारत में अभी तक कोई विशेष कानूनी ढाँचा नहीं है, और यह मामला उस खालीपन को रेखांकित करता है। अदालतों पर निर्भरता बढ़ती जाए, इससे पहले संसद को इस तकनीकी अपराध के लिए स्पष्ट विधायी प्रावधान करने होंगे।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाई कोर्ट ने मेटा को क्या आदेश दिया?
दिल्ली हाई कोर्ट ने मेटा को निर्देश दिया कि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और वेबसाइटों से AI मॉर्फ तस्वीरें और उनसे जुड़े सभी वेबलिंक 24 घंटे के भीतर हटाए। साथ ही पीड़िता को पुलिस सुरक्षा और दिल्ली पुलिस को दो सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट देने का आदेश भी दिया गया।
इस मामले में किन पर FIR दर्ज हुई है?
नई दिल्ली के साइबर पुलिस स्टेशन में CJP से जुड़े अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और IT एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने इन चारों को भी नोटिस जारी किया है।
पीड़िता ने क्या आरोप लगाए हैं?
पीड़िता ने आरोप लगाया है कि CJP के एक प्रदर्शन के दौरान उसकी तस्वीर को AI तकनीक से एडिट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मॉर्फ किया गया और सोशल मीडिया पर फैलाया गया। उसने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान उसे धमकाया गया और उसकी गरिमा को ठेस पहुँचाने की कोशिश की गई।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
दिल्ली हाई कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। तब तक दिल्ली पुलिस को स्टेटस रिपोर्ट और नोटिस पाने वाले पक्षकारों को अपना जवाब दाखिल करना होगा।
क्या भारत में AI मॉर्फ तस्वीरों के खिलाफ कोई विशेष कानून है?
फिलहाल भारत में AI-जनित मॉर्फ या डीपफेक तस्वीरों के लिए कोई अलग विशेष कानून नहीं है। ऐसे मामलों में BNS और IT एक्ट की मौजूदा धाराओं का उपयोग किया जाता है, जिससे अदालतें और विशेषज्ञ एक ठोस विधायी ढाँचे की ज़रूरत पर जोर दे रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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