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दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला: एक वीडियो से पुलिस अधिकारी संदीप लांबा की छवि नहीं होगी खराब

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दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला: एक वीडियो से पुलिस अधिकारी संदीप लांबा की छवि नहीं होगी खराब

सारांश

दिल्ली हाईकोर्ट ने जंतर-मंतर वीडियो विवाद में पुलिस अधिकारी संदीप लांबा को जांच से हटाने की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा — एक वीडियो किसी अधिकारी की पूरी छवि नहीं तय कर सकता और पुलिस को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार है। दिल्ली पुलिस के अनुसार जांच पहले ही पूरी हो चुकी है।

मुख्य बातें

दिल्ली हाईकोर्ट ने 28 जुलाई 2025 को पुलिस अधिकारी संदीप लांबा को जांच से हटाने की याचिका पर सुनवाई से इनकार किया।
अदालत ने कहा कि केवल एक वीडियो के आधार पर किसी अधिकारी की संपूर्ण छवि को कलंकित नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने जंतर-मंतर पर भीड़ नियंत्रण की परिस्थितियों और पुलिस की भूमिका को समझने की आवश्यकता बताई।
दिल्ली पुलिस ने अदालत को सूचित किया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और याचिकाकर्ता के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि बल प्रयोग के आरोपों के बावजूद संबंधित अधिकारी को निष्पक्ष जांच और सुनवाई का अधिकार प्राप्त है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 28 जुलाई 2025 को पुलिस ज्यादती मामले की जांच से पुलिस अधिकारी संदीप लांबा को हटाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल एक वीडियो के आधार पर किसी भी अधिकारी की संपूर्ण छवि को कलंकित नहीं किया जा सकता। यह मामला जंतर-मंतर पर हुई एक घटना से जुड़ा है, जिसमें अधिकारी पर एक महिला को थप्पड़ मारने का आरोप लगाया गया था।

मुख्य घटनाक्रम

सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता से सीधा सवाल किया कि क्या जंतर-मंतर की घटना के एक वीडियो के आधार पर अधिकारी की पूरी सेवा-छवि को समाप्त कर देना उचित है। अदालत ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध निष्कर्ष निकालने से पूर्व समस्त परिस्थितियों और पृष्ठभूमि का मूल्यांकन अनिवार्य है।

हाईकोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि यदि बड़ी भीड़ संसद तक पहुँच जाती और हिंसा या गोलीबारी जैसी स्थिति उत्पन्न होती, तो परिणाम कहीं अधिक गंभीर हो सकते थे। इस संदर्भ में अदालत ने भीड़ नियंत्रण के दौरान पुलिस की भूमिका और उन परिस्थितियों को समझने की आवश्यकता पर बल दिया।

अधिकारी के अधिकार पर अदालत की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी घटना में बल प्रयोग के आरोप लगे हों, तब भी संबंधित अधिकारी को निष्पक्ष जांच और सुनवाई का मौलिक अधिकार प्राप्त है। अदालत ने कहा कि किसी एकल घटना या वीडियो के आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि अधिकारी प्रत्येक मामले में पक्षपाती होंगे।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि किसी संस्था को इस प्रकार बदनाम नहीं किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि यह टिप्पणी उस व्यापक प्रवृत्ति के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जिसमें सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर सरकारी अधिकारियों की छवि को तत्काल कलंकित करने की माँग उठाई जाती है।

दिल्ली पुलिस का पक्ष

दिल्ली पुलिस ने अदालत को सूचित किया कि इस मामले में जांच पहले ही पूर्ण हो चुकी है। पुलिस की ओर से यह भी बताया गया कि याचिकाकर्ता के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और जांच में अब कुछ भी लंबित नहीं है। इसी आधार पर पुलिस ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत किया।

याचिकाकर्ता की मांग और अदालत का निर्णय

याचिकाकर्ता ने अनुरोध किया था कि पुलिस अधिकारी संदीप लांबा को जांच प्रक्रिया से अलग किया जाए, जिससे मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके। हाईकोर्ट ने इस मांग को अस्वीकार करते हुए याचिका पर आगे सुनवाई करने से इनकार कर दिया।

यह मामला उस समय सामने आया जब भारत में पुलिस जवाबदेही और नागरिक अधिकारों को लेकर बहस तेज़ हो रही है। न्यायपालिका का यह रुख संकेत देता है कि वायरल साक्ष्य और विधिक प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाना अदालतों की प्राथमिकता बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

निर्णय नहीं। लेकिन यह रुख तब और जटिल हो जाता है जब जांच उसी विभाग के भीतर हो जिस पर आरोप है। अदालत ने संस्थागत बदनामी से बचाने की बात कही, मगर यह सवाल अनुत्तरित रहा कि आंतरिक जांच की विश्वसनीयता कैसे सुनिश्चित होगी। भारत में पुलिस जवाबदेही के मामलों में बाहरी निगरानी तंत्र की अनुपस्थिति एक पुरानी कमज़ोरी है — और इस फैसले से वह बहस और तेज़ होगी।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारी संदीप लांबा मामले में क्या फैसला दिया?
दिल्ली हाईकोर्ट ने 28 जुलाई 2025 को पुलिस अधिकारी संदीप लांबा को जांच प्रक्रिया से हटाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि केवल एक वीडियो के आधार पर किसी अधिकारी की पूरी छवि को नहीं बिगाड़ा जा सकता।
जंतर-मंतर पुलिस वीडियो विवाद क्या है?
यह मामला जंतर-मंतर पर हुई एक घटना से जुड़ा है, जिसमें पुलिस अधिकारी संदीप लांबा पर एक महिला को थप्पड़ मारने का आरोप लगाया गया था और घटना का वीडियो सामने आया था। याचिकाकर्ता ने इस वीडियो के आधार पर लांबा को जांच से हटाने की मांग की थी।
क्या दिल्ली पुलिस ने इस मामले की जांच पूरी कर ली है?
हाँ, दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि इस मामले की जांच पहले ही पूरी हो चुकी है और याचिकाकर्ता के बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं। पुलिस के अनुसार जांच में अब कुछ भी लंबित नहीं है।
हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारी के अधिकारों पर क्या कहा?
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बल प्रयोग के आरोपों के बावजूद संबंधित अधिकारी को निष्पक्ष जांच और सुनवाई का अधिकार प्राप्त है। अदालत ने यह भी कहा कि किसी एकल घटना के आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि अधिकारी हर मामले में पक्षपाती होंगे।
भीड़ नियंत्रण के संदर्भ में अदालत ने क्या टिप्पणी की?
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि बड़ी भीड़ संसद तक पहुँच जाती और हिंसा या गोलीबारी जैसी स्थिति उत्पन्न होती, तो परिणाम कहीं अधिक गंभीर होते। अदालत ने भीड़ नियंत्रण के दौरान पुलिस की परिस्थितियों को समझने की आवश्यकता पर बल दिया।
राष्ट्र प्रेस
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