दिल्ली हाई कोर्ट ने पॉक्सो आरोपी को जमानत दी, पीड़िता का शुरुआती बयान और प्रेम संबंध माने निर्णायक
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाई कोर्ट ने 7 अक्टूबर 2026 को पॉक्सो अधिनियम के तहत आरोपी 20 वर्षीय विक्की को जमानत प्रदान की। न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की एकल पीठ ने माना कि 14 वर्षीय पीड़िता का शुरुआती बयान — जिसमें उसने कहा था कि वह स्वेच्छा से घर छोड़कर गई थी — तथा दोनों के बीच कई महीने से चला आ रहा प्रेम संबंध, जमानत के पक्ष में महत्वपूर्ण परिस्थितियाँ हैं। यह आरोपी की तीसरी नियमित जमानत याचिका थी।
मामले का पृष्ठभूमि और मुख्य घटनाक्रम
मामले की शुरुआत 28 जुलाई 2023 को हुई, जब पीड़िता के पिता ने अमन विहार थाने में अपनी नाबालिग बेटी की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई — उनकी बेटी स्कूल जाने के बाद घर नहीं लौटी थी। 30 जुलाई 2023 को पुलिस ने उसे ढूँढकर थाने में उपस्थित किया।
थाने में काउंसलिंग के दौरान पीड़िता ने बताया कि वह माँ की डाँट से नाराज होकर स्वयं घर से निकली थी और अपनी मासी के यहाँ चली गई थी। उसने यह भी कहा कि किसी ने उसके साथ कुछ गलत नहीं किया और उसे किसी के विरुद्ध कोई शिकायत नहीं है। हालाँकि, बाद में एक अन्य बयान में उसने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसे उसकी इच्छा के विरुद्ध रखा और यौन उत्पीड़न किया। इसके बाद एफआईआर में पॉक्सो अधिनियम की धाराएँ जोड़ी गईं।
अदालत के अवलोकन
न्यायमूर्ति पुष्करणा ने कहा, 'न तो आरोपी की कम उम्र और न ही पीड़िता की कम उम्र को नज़रअंदाज़ किया जा सकता है। रिकॉर्ड में मौजूद दस्तावेज दोनों के बीच घनिष्ठ और प्रेम संबंध को दर्शाते हैं।' अदालत ने यह भी नोट किया कि पीड़िता ने इंस्टाग्राम पर दोनों की करीबी तस्वीरें साझा की थीं और आरोपी के प्रति अपना प्रेम व्यक्त किया था।
अदालत ने यह भी माना कि पीड़िता ने अलग-अलग समय पर अलग-अलग बयान दिए। घटना के समय पीड़िता की उम्र 14 वर्ष 8 महीने और आरोपी की उम्र 20 वर्ष 4 महीने थी। न्यायमूर्ति पुष्करणा ने अपने पूर्व निर्णय का भी संदर्भ दिया, जिसमें पॉक्सो मामलों में जमानत पर विचार करते समय आयु, संबंध, बयानों में विरोधाभास और वास्तविक परिस्थितियों को महत्व देने की बात कही गई थी।
फोरेंसिक साक्ष्य की स्थिति
एफएसएल रिपोर्ट के अनुसार, घटना स्थल से बरामद कंबल पर मिले मिश्रित डीएनए प्रोफाइल में आरोपी और पीड़िता दोनों का डीएनए पाया गया। हालाँकि, पीड़िता के सर्वाइकल स्वैब और स्मीयर से किसी पुरुष का डीएनए प्रोफाइल प्राप्त नहीं हुआ।
अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि आरोपी तीन वर्ष से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में है और मुकदमे में 19 अभियोजन गवाहों में से अब तक केवल पीड़िता और उसके पिता की ही गवाही हो सकी है।
अभियोजन पक्ष के तर्क
अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि यह एक नाबालिग से जुड़ा गंभीर अपराध है और पॉक्सो अधिनियम के तहत सहमति का कोई विधिक महत्व नहीं होता। शिकायतकर्ता के अधिवक्ता ने यह भी कहा कि पीड़िता ने बाद के बयान में यौन उत्पीड़न के स्पष्ट आरोप लगाए थे और अभियोजन पक्ष के गवाहों ने एक-दूसरे के बयानों की पुष्टि की है।
जमानत की शर्तें और आगे की स्थिति
अदालत ने आरोपी को जमानत देते हुए कई शर्तें लगाई हैं — वह प्रत्येक सुनवाई में ट्रायल कोर्ट के समक्ष उपस्थित होगा, जाँच अधिकारी को स्थायी और वर्तमान पता देगा, मोबाइल नंबर चालू रखेगा और प्रत्येक सोमवार सुबह 9 बजे संबंधित पुलिस थाने में हाजिरी लगाएगा। इसके अलावा वह किसी भी गवाह या पीड़ित पक्ष को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित नहीं करेगा और न ही साक्ष्यों से छेड़छाड़ करेगा।
अदालत ने स्पष्ट किया कि उसके सभी अवलोकन केवल जमानत याचिका के निपटारे के लिए हैं और इन्हें मामले के गुण-दोष पर अदालत की राय नहीं माना जाएगा। मुकदमे की आगामी सुनवाई में शेष 17 अभियोजन गवाहों की गवाही होनी है।