8 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

दिल्ली हाई कोर्ट ने पॉक्सो आरोपी को जमानत दी, पीड़िता का शुरुआती बयान और प्रेम संबंध माने निर्णायक

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दिल्ली हाई कोर्ट ने पॉक्सो आरोपी को जमानत दी, पीड़िता का शुरुआती बयान और प्रेम संबंध माने निर्णायक

सारांश

दिल्ली हाई कोर्ट ने पॉक्सो आरोपी को तीन साल से अधिक हिरासत के बाद जमानत दी। न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने पीड़िता के शुरुआती बयान — जिसमें उसने स्वेच्छा से घर छोड़ने की बात कही थी — और दोनों के बीच प्रेम संबंध को निर्णायक परिस्थितियाँ माना। मुकदमे में अभी 17 और गवाहों की गवाही होनी है।

मुख्य बातें

दिल्ली हाई कोर्ट ने 7 अक्टूबर 2026 को पॉक्सो अधिनियम के आरोपी 20 वर्षीय विक्की को जमानत प्रदान की।
पीड़िता ( 14 वर्ष 8 माह ) का शुरुआती बयान — कि वह स्वेच्छा से घर से गई थी — और दोनों के बीच 8-9 महीने के प्रेम संबंध को अदालत ने जमानत के पक्ष में महत्वपूर्ण माना।
पीड़िता ने बाद के बयान में यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे; अदालत ने बयानों में विरोधाभास को भी नोट किया।
एफएसएल रिपोर्ट में कंबल पर दोनों का मिश्रित डीएनए मिला, लेकिन सर्वाइकल स्वैब में किसी पुरुष का डीएनए नहीं पाया गया।
आरोपी तीन वर्ष से अधिक न्यायिक हिरासत में रहा; 19 में से केवल 2 अभियोजन गवाहों की गवाही अब तक हो सकी है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि ये अवलोकन केवल जमानत याचिका के लिए हैं और मामले के गुण-दोष पर इनका कोई प्रभाव नहीं होगा।

दिल्ली हाई कोर्ट ने 7 अक्टूबर 2026 को पॉक्सो अधिनियम के तहत आरोपी 20 वर्षीय विक्की को जमानत प्रदान की। न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की एकल पीठ ने माना कि 14 वर्षीय पीड़िता का शुरुआती बयान — जिसमें उसने कहा था कि वह स्वेच्छा से घर छोड़कर गई थी — तथा दोनों के बीच कई महीने से चला आ रहा प्रेम संबंध, जमानत के पक्ष में महत्वपूर्ण परिस्थितियाँ हैं। यह आरोपी की तीसरी नियमित जमानत याचिका थी।

मामले का पृष्ठभूमि और मुख्य घटनाक्रम

मामले की शुरुआत 28 जुलाई 2023 को हुई, जब पीड़िता के पिता ने अमन विहार थाने में अपनी नाबालिग बेटी की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई — उनकी बेटी स्कूल जाने के बाद घर नहीं लौटी थी। 30 जुलाई 2023 को पुलिस ने उसे ढूँढकर थाने में उपस्थित किया।

थाने में काउंसलिंग के दौरान पीड़िता ने बताया कि वह माँ की डाँट से नाराज होकर स्वयं घर से निकली थी और अपनी मासी के यहाँ चली गई थी। उसने यह भी कहा कि किसी ने उसके साथ कुछ गलत नहीं किया और उसे किसी के विरुद्ध कोई शिकायत नहीं है। हालाँकि, बाद में एक अन्य बयान में उसने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसे उसकी इच्छा के विरुद्ध रखा और यौन उत्पीड़न किया। इसके बाद एफआईआर में पॉक्सो अधिनियम की धाराएँ जोड़ी गईं।

अदालत के अवलोकन

न्यायमूर्ति पुष्करणा ने कहा, 'न तो आरोपी की कम उम्र और न ही पीड़िता की कम उम्र को नज़रअंदाज़ किया जा सकता है। रिकॉर्ड में मौजूद दस्तावेज दोनों के बीच घनिष्ठ और प्रेम संबंध को दर्शाते हैं।' अदालत ने यह भी नोट किया कि पीड़िता ने इंस्टाग्राम पर दोनों की करीबी तस्वीरें साझा की थीं और आरोपी के प्रति अपना प्रेम व्यक्त किया था।

अदालत ने यह भी माना कि पीड़िता ने अलग-अलग समय पर अलग-अलग बयान दिए। घटना के समय पीड़िता की उम्र 14 वर्ष 8 महीने और आरोपी की उम्र 20 वर्ष 4 महीने थी। न्यायमूर्ति पुष्करणा ने अपने पूर्व निर्णय का भी संदर्भ दिया, जिसमें पॉक्सो मामलों में जमानत पर विचार करते समय आयु, संबंध, बयानों में विरोधाभास और वास्तविक परिस्थितियों को महत्व देने की बात कही गई थी।

फोरेंसिक साक्ष्य की स्थिति

एफएसएल रिपोर्ट के अनुसार, घटना स्थल से बरामद कंबल पर मिले मिश्रित डीएनए प्रोफाइल में आरोपी और पीड़िता दोनों का डीएनए पाया गया। हालाँकि, पीड़िता के सर्वाइकल स्वैब और स्मीयर से किसी पुरुष का डीएनए प्रोफाइल प्राप्त नहीं हुआ।

अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि आरोपी तीन वर्ष से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में है और मुकदमे में 19 अभियोजन गवाहों में से अब तक केवल पीड़िता और उसके पिता की ही गवाही हो सकी है।

अभियोजन पक्ष के तर्क

अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि यह एक नाबालिग से जुड़ा गंभीर अपराध है और पॉक्सो अधिनियम के तहत सहमति का कोई विधिक महत्व नहीं होता। शिकायतकर्ता के अधिवक्ता ने यह भी कहा कि पीड़िता ने बाद के बयान में यौन उत्पीड़न के स्पष्ट आरोप लगाए थे और अभियोजन पक्ष के गवाहों ने एक-दूसरे के बयानों की पुष्टि की है।

जमानत की शर्तें और आगे की स्थिति

अदालत ने आरोपी को जमानत देते हुए कई शर्तें लगाई हैं — वह प्रत्येक सुनवाई में ट्रायल कोर्ट के समक्ष उपस्थित होगा, जाँच अधिकारी को स्थायी और वर्तमान पता देगा, मोबाइल नंबर चालू रखेगा और प्रत्येक सोमवार सुबह 9 बजे संबंधित पुलिस थाने में हाजिरी लगाएगा। इसके अलावा वह किसी भी गवाह या पीड़ित पक्ष को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित नहीं करेगा और न ही साक्ष्यों से छेड़छाड़ करेगा।

अदालत ने स्पष्ट किया कि उसके सभी अवलोकन केवल जमानत याचिका के निपटारे के लिए हैं और इन्हें मामले के गुण-दोष पर अदालत की राय नहीं माना जाएगा। मुकदमे की आगामी सुनवाई में शेष 17 अभियोजन गवाहों की गवाही होनी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी जमानत-स्तर पर प्रेम संबंध और बयान में विरोधाभास जैसे तथ्य न्यायिक विवेक में प्रवेश पाते हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि पीड़िता के दो परस्पर विरोधी बयानों में से शुरुआती बयान को अधिक वज़न दिया गया, जबकि बाद का बयान अधिक गंभीर आरोपों वाला था — यह प्रवृत्ति पीड़ित-समर्थक संगठनों के लिए चिंता का विषय रही है। तीन साल से अधिक की विचाराधीन हिरासत अपने आप में न्याय-व्यवस्था की एक अलग विफलता को रेखांकित करती है। मुकदमे का अंतिम निर्णय अभी बहुत दूर है।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाई कोर्ट ने पॉक्सो आरोपी को जमानत क्यों दी?
अदालत ने पीड़िता के शुरुआती बयान — जिसमें उसने स्वेच्छा से घर छोड़ने और किसी के विरुद्ध कोई शिकायत न होने की बात कही थी — तथा आरोपी और पीड़िता के बीच कई महीने से चले आ रहे प्रेम संबंध को जमानत के पक्ष में निर्णायक परिस्थितियाँ माना। इसके अलावा आरोपी तीन वर्ष से अधिक समय न्यायिक हिरासत में बिता चुका था और मुकदमा अभी लंबा चलना था।
पॉक्सो अधिनियम के तहत सहमति का क्या महत्व है?
पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत नाबालिग की सहमति का कोई विधिक महत्व नहीं होता — यह कानून का स्पष्ट प्रावधान है। अभियोजन पक्ष ने इसी आधार पर जमानत का विरोध किया। हालाँकि, अदालत ने जमानत के स्तर पर वास्तविक परिस्थितियों, बयानों में विरोधाभास और हिरासत की अवधि को भी ध्यान में रखा।
पीड़िता के बयानों में क्या विरोधाभास था?
पुलिस थाने में काउंसलिंग के दौरान पीड़िता ने कहा था कि वह माँ की डाँट से नाराज होकर स्वयं घर छोड़ गई थी और उसे किसी के विरुद्ध कोई शिकायत नहीं है। बाद में एक अन्य बयान में उसने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसे इच्छा के विरुद्ध रखा और यौन उत्पीड़न किया। अदालत ने इन दोनों बयानों के विरोधाभास को जमानत विचार में ध्यान में रखा।
इस मामले में फोरेंसिक साक्ष्य की क्या स्थिति है?
एफएसएल रिपोर्ट के अनुसार घटना स्थल से बरामद कंबल पर मिले मिश्रित डीएनए प्रोफाइल में आरोपी और पीड़िता दोनों का डीएनए पाया गया। हालाँकि, पीड़िता के सर्वाइकल स्वैब और स्मीयर से किसी पुरुष का डीएनए प्रोफाइल प्राप्त नहीं हुआ।
जमानत मिलने के बाद आरोपी पर क्या शर्तें लगाई गई हैं?
आरोपी को प्रत्येक सुनवाई में ट्रायल कोर्ट के समक्ष उपस्थित होना होगा, जाँच अधिकारी को अपना पता देना होगा और प्रत्येक सोमवार सुबह 9 बजे संबंधित पुलिस थाने में हाजिरी लगानी होगी। वह किसी भी गवाह या पीड़ित पक्ष को प्रभावित नहीं करेगा और साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले