दिल्ली MCD स्टैंडिंग कमेटी बैठक: डेंगू-प्रदूषण पर मंथन, ₹2,500 करोड़ भ्रष्टाचार के आरोप से भाजपा-आप आमने-सामने
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 1 सितंबर 2026 को दिल्ली नगर निगम (MCD) की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में डेंगू, मौसमी बीमारियों, वायु प्रदूषण, टूटी सड़कों और सफाई व्यवस्था पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में अधिकारियों को फॉगिंग, कीटनाशक छिड़काव और साफ-सफाई में किसी भी तरह की लापरवाही न बरतने के स्पष्ट निर्देश दिए गए। वहीं, टेंडर प्रक्रिया, लेगेसी वेस्ट निस्तारण और टोल टैक्स जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी आम आदमी पार्टी (AAP) के पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
मौसमी बीमारियों पर सतर्कता के निर्देश
एमसीडी स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन सत्या शर्मा ने बताया कि लंबे समय बाद हुई इस बैठक में जनजनित और मौसमी बीमारियों पर गंभीरता से विचार किया गया। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में वायरल बुखार और डेंगू जैसी बीमारियों के मद्देनज़र निगम के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। दिल्ली के हर इलाके में नियमित फॉगिंग और कीटनाशक छिड़काव सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।
शर्मा ने यह भी कहा कि निगम ने सफाई के लिए विशेष कार्यक्रम और शेड्यूल तैयार किए हैं। सड़क किनारे जमा ठोस कचरे को हटाने और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करने की भी योजना बनाई गई है।
सर्दियों से पहले प्रदूषण की तैयारी
बैठक में अक्टूबर के बाद संभावित वायु प्रदूषण की समस्या पर भी चर्चा हुई। यह ऐसे समय में आई है जब दिल्ली हर साल सर्दियों में गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में आती है। स्टैंडिंग कमेटी ने निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, टूटी सड़कों की मरम्मत और पार्किंग के कच्चे हिस्सों को दुरुस्त करने पर ध्यान देने को कहा। गौरतलब है कि निर्माण गतिविधियाँ दिल्ली के प्रदूषण में प्रमुख योगदानकर्ताओं में से एक मानी जाती हैं।
विपक्ष के गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप
एमसीडी में नेता विपक्ष प्रवीण कुमार ने बैठक में कई प्रस्तावों पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि लेगेसी वेस्ट निस्तारण के लिए हर साल कथित तौर पर ₹600-650 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन संबंधित कार्य उचित टेंडर प्रक्रिया के बिना एक पुरानी कंपनी को दे दिया गया।
प्रवीण कुमार ने टोल टैक्स और पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) से जुड़े प्रस्ताव पर भी आपत्ति जताई। उनका आरोप है कि एक निजी कंपनी को काम दिए जाने में कथित तौर पर ₹2,500 करोड़ के भ्रष्टाचार की आशंका है। साथ ही, ECC व्यवस्था में निगम को करीब ₹411 करोड़ के राजस्व नुकसान का भी दावा किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चीफ टाउन प्लानर (CTP) विभाग में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ हो रही हैं।
जांच की मांग और आगे की कार्रवाई
प्रवीण कुमार ने घोषणा की कि वे इन आरोपों को लेकर केंद्रीय जांच एजेंसी और भ्रष्टाचार निरोधक व्यवस्था के समक्ष व्यक्तिगत शिकायत दर्ज कराएंगे। उन्होंने कर्मचारियों के हितों की अनदेखी कर निजी कंपनियों को काम सौंपने की प्रवृत्ति पर भी कड़ा एतराज जताया। स्टैंडिंग कमेटी चेयरमैन सत्या शर्मा ने इन आरोपों का सीधा जवाब दिए बिना कहा कि निगम का ध्यान दिल्लीवासियों की सेहत, सफाई और प्रदूषण नियंत्रण पर केंद्रित है। आने वाले हफ्तों में MCD की कार्रवाई और विपक्ष की संभावित शिकायतें इस विवाद को और गहरा कर सकती हैं।