दिल्ली में एनएसीओ की सुरक्षा संकल्प कार्यशाला, एचआईवी/एड्स पर महत्वपूर्ण वार्ता
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली में एचआईवी संक्रमण की दर 0.33 प्रतिशत है।
- 70 प्रतिशत पहचाने गए व्यक्तियों को उपचार प्राप्त नहीं हो रहा है।
- मातृ-शिशु संचरण को रोकने के लिए परीक्षण और उपचार की आवश्यकता है।
- 219 प्राथमिकता वाले जिले एचआईवी के गहन प्रबंधन के लिए चिन्हित किए गए हैं।
- 2030 तक एड्स को समाप्त करने का वैश्विक लक्ष्य है।
नई दिल्ली, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (एनएसीओ) द्वारा शुक्रवार को दिल्ली में सुरक्षा संकल्प कार्यशाला का आयोजन किया। यह कार्यशाला एचआईवी/एड्स के प्रति जिला स्तर पर प्रतिक्रिया को मजबूत करने की एक गहन और दूरदर्शी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें हरियाणा और दिल्ली के लिए विशेष भागीदारी पर जोर दिया गया है। कार्यशाला की अध्यक्षता एनएसीओ के अतिरिक्त सचिव और महानिदेशक डॉ. राकेश गुप्ता ने की।
इस अवसर पर डॉ. एसपी भावसार (पीएचएस ग्रुप-I, एनएसीओ) ने भारत में एचआईवी के विकसित होते महामारी विज्ञान से संबंधित स्वरूपों की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने मजबूत डेटा विश्लेषण, लक्षित पहुंच और सुदृढ़ सेवा वितरण ढांचे पर आधारित सूक्ष्म, जिला-संचालित रणनीतियों की आवश्यकता पर जोर दिया।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि एचआईवी/एड्स एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है, जिसके लिए शासन के सभी स्तरों पर सतर्कता, नवाचार और समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने विश्व स्तर पर स्वीकृत 95:95:95 लक्ष्यों का उल्लेख किया, जिसमें एचआईवी से पीड़ित 95 प्रतिशत लोगों को उनकी स्थिति के बारे में जानकारी देना, निदान किए गए 95 प्रतिशत लोगों को निरंतर एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) प्रदान करना, और उपचार करा रहे 95 प्रतिशत लोगों में वायरल दमन प्राप्त करना शामिल है। इससे संचरण में कमी आएगी और स्वास्थ्य परिणामों में सुधार होगा।
उन्होंने बताया कि दिल्ली में गंभीर कमियां हैं, जहां पहचाने गए व्यक्तियों में से लगभग 70 प्रतिशत ही वर्तमान में उपचार प्राप्त कर रहे हैं। यह उपचार कवरेज और निरंतरता में तेजी लाने की आवश्यकता को उजागर करता है। इसके विपरीत, हरियाणा ने लगभग 81:83:95 का अनुपात हासिल किया है, जो उत्साहजनक प्रगति को दर्शाता है।
डॉ. गुप्ता ने मातृ-शिशु संचरण को समाप्त करने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि समय पर परीक्षण, परामर्श और उपचार से इस तरह के संचरण को रोकना संभव है।
देशभर के 219 जिलों को एचआईवी/एड्स के गहन प्रबंधन के लिए प्राथमिकता वाले जिलों के रूप में चिन्हित किया गया है, जिनमें से 11 हरियाणा में और 7 दिल्ली में हैं। डॉ. गुप्ता ने बताया कि दिल्ली में वर्तमान में वयस्क एचआईवी संक्रमण दर 0.33 प्रतिशत है, जहां लगभग 59,079 लोग एचआईवी से पीड़ित हैं।
इस लक्षित दृष्टिकोण के तहत, विशिष्ट जिलों को प्राथमिकता दी गई है। दिल्ली में चिह्नित जिलों में उत्तर दिल्ली, नई दिल्ली, शाहदरा, मध्य दिल्ली, दक्षिण पूर्व और दक्षिण दिल्ली शामिल हैं।
इन जिलों की जिला कार्यक्रम टीमें कार्यशाला में भाग ले रही हैं, अपनी प्रगति साझा कर रही हैं और जमीनी स्तर पर एचआईवी प्रतिक्रिया को मजबूत करने के लिए कार्य योजनाएं विकसित कर रही हैं।
डॉ. गुप्ता ने सभी हितधारकों से मिलकर जागरूकता, परीक्षण, उपचार और अनुपालन में मौजूदा कमियों को दूर करने का आग्रह किया।
उन्होंने एक महत्वाकांक्षी रोडमैप की रूपरेखा भी प्रस्तुत की, जिसमें उन्होंने विश्व एड्स दिवस 2027 तक एचआईवी/एड्स को नियंत्रित महामारी घोषित करने की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।
सुरक्षा संकल्प कार्यशाला, राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर सहयोगात्मक योजना का एक महत्वपूर्ण मंच है, जिसका उद्देश्य एचआईवी रोकथाम और परीक्षण सेवाओं के लिए एक समन्वित दृष्टिकोण को सुदृढ़ करना है। यह 2030 तक एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त करने के वैश्विक लक्ष्य को प्राप्त करने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।