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दिल्ली पुलिस ने प्रॉपर्टी फ्रॉड का पर्दाफाश: दृष्टिबाधित कर्मचारी से 14.5 लाख ठगने वाला रविंद्र गर्ग गिरफ्तार

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दिल्ली पुलिस ने प्रॉपर्टी फ्रॉड का पर्दाफाश: दृष्टिबाधित कर्मचारी से 14.5 लाख ठगने वाला रविंद्र गर्ग गिरफ्तार

सारांश

दिल्ली पुलिस ने एक दृष्टिबाधित कर्मचारी से 14.5 लाख रुपए की ठगी करने वाले आरोपी रविंद्र गर्ग को गिरफ्तार किया है। यह मामला फर्जी लीज डीड के तहत धोखाधड़ी का है। जानें पूरी कहानी।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ने दृष्टिबाधित कर्मचारी से 14.5 लाख रुपए की ठगी करने वाले रविंद्र गर्ग को गिरफ्तार किया।
आरोपी ने फर्जी लीज डीड के माध्यम से धोखाधड़ी की।
पुलिस ने तकनीकी निगरानी के जरिए आरोपी को ट्रैक किया।

नई दिल्ली, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की डीबीजी रोड पुलिस स्टेशन की टीम ने प्रॉपर्टी से संबंधित एक फर्जी लीज डीड घोटाले का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने दृष्टिबाधित पीड़ित से 14.5 लाख रुपए की ठगी करने वाले आरोपी रविंद्र गर्ग को गिरफ्तार किया है।

जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने इसी तरीके से कई व्यक्तियों को ठगकर लगभग 2 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की है। यह आरोपी पहले से ही एक अन्य प्रॉपर्टी फ्रॉड मामले में अदालत द्वारा अपराधी घोषित किया जा चुका था।

29 दिसंबर 2025 को डीबीजी रोड थाने में एक शिकायत दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता, जो भारतीय रेलवे का दृष्टिबाधित कर्मचारी है, करोल बाग के जोशी रोड पर एक मकान को लीज पर लेना चाहता था। आरोपी रविंद्र गर्ग ने खुद को मकान का मालिक बताकर पीड़ित से 14,50,000 रुपए लेकर नोटरीकृत लीज डीड तैयार करवाई।

जब पीड़ित कब्जा लेने गया, तो उसे पता चला कि प्रॉपर्टी पहले ही 2017 में लिए गए 98 लाख रुपए के होम लोन के भुगतान न होने पर फाइनेंस कंपनी के कब्जे में है। आरोपी इस तथ्य को जानते हुए भी पीड़ित को धोखा देकर उसकी मेहनत की कमाई हड़प गया। इस मामले में एफआईआर संख्या 481/2025 के तहत आईपीसी की धाराएं 406, 417, 420 और 506 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था।

पुलिस ने सब इंस्पेक्टर हरविंदर सिंह, हेड कांस्टेबल सुनीत कुमार और महिला कांस्टेबल की एक विशेष टीम बनाई, जिसे ‘तनीषा’ नाम दिया गया। टीम ने एसएचओ डीबीजी रोड की निगरानी और एसीपी पहाड़गंज के मार्गदर्शन में कार्य किया। आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए हर छह महीने में मोबाइल नंबर और ठिकाना बदलता रहा। टीम ने पुराने नंबरों के सीडीआर का विश्लेषण किया और तकनीकी निगरानी के माध्यम से आरोपी के नए सक्रिय मोबाइल नंबर का पता लगाया। गुप्त सूत्रों की मदद से आरोपी की मौजूदगी दिल्ली के नांगल देवत गाँव में पाई गई, जहाँ वह टैक्सी ड्राइवर के रूप में काम कर रहा था। टीम ने वहां छापा मारकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

आरोपी रविंद्र गर्ग (51) निवासी हापुड़ (उत्तर प्रदेश), जिसकी शिक्षा मात्र 5वीं कक्षा तक है। वह वर्तमान में टैक्सी ड्राइवर के रूप में कार्यरत था। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने प्रॉपर्टी गिरवी होने की जानकारी छिपाकर कई लोगों को लीज और बिक्री का झांसा देकर ठगा। धोखाधड़ी से प्राप्त पैसे उसने टूरिस्ट ट्रांसपोर्ट का कारोबार शुरू करने में लगाए, लेकिन वह असफल हो गया। उसका परिवार हापुड़ में रहता है, जबकि वह अकेले रहकर लगातार ठिकाना बदलता रहा।

पुलिस अब आरोपी की अन्य प्रॉपर्टियों और धोखाधड़ी से प्राप्त रकम की जानकारी जुटा रही है। आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मामले की आगे की जांच जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें एक दृष्टिबाधित व्यक्ति को ठगने का मामला सामने आया है। यह दर्शाता है कि किस तरह अपराधी कमजोर व्यक्तियों का शिकार करते हैं।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रविंद्र गर्ग को किस आरोप में गिरफ्तार किया गया?
उन्हें दृष्टिबाधित कर्मचारी से 14.5 लाख रुपए की ठगी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने आरोपी को कैसे पकड़ा?
पुलिस ने तकनीकी निगरानी और गुप्त सूत्रों की मदद से आरोपी को नांगल देवत गाँव से गिरफ्तार किया।
क्या आरोपी के खिलाफ पहले से कोई मामला था?
हाँ, आरोपी पहले से एक अन्य प्रॉपर्टी फ्रॉड मामले में अदालत द्वारा अपराधी घोषित किया जा चुका था।
राष्ट्र प्रेस
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