10 अक्टूबर 2026
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दिल्ली दंगा 2020: ताहिर हुसैन दंगा उकसावे में दोषी, सात सह-आरोपी बरी; 16 नवंबर को सजा पर सुनवाई

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दिल्ली दंगा 2020: ताहिर हुसैन दंगा उकसावे में दोषी, सात सह-आरोपी बरी; 16 नवंबर को सजा पर सुनवाई

सारांश

दिल्ली की अदालत ने AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को 2020 दंगा उकसावे का दोषी माना — यह उनकी दूसरी दोषसिद्धि है। IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में पहले ही उम्रकैद मिल चुकी है। सजा पर सुनवाई 16 नवंबर को होगी।

मुख्य बातें

कड़कड़डूमा कोर्ट ने 10 अक्टूबर 2026 को AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को फरवरी 2020 के दंगा मामले में दंगा भड़काने की मदद का दोषी ठहराया।
अदालत ने अन्य आरोपों से ताहिर हुसैन को और मामले के सात सह-आरोपियों को सभी आरोपों से बरी किया।
यह 2020 दंगों से जुड़े मामलों में ताहिर हुसैन की दूसरी दोषसिद्धि है; पहले IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या में उम्रकैद हो चुकी है।
सजा की अवधि पर दलीलें 16 नवंबर को सुनी जाएंगी।
उम्रकैद की अपील पर दिल्ली उच्च न्यायालय में 2 दिसंबर को सुनवाई निर्धारित है।
फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और व्यापक संपत्ति क्षति हुई थी।

कड़कड़डूमा कोर्ट ने 10 अक्टूबर 2026 को फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दंगा भड़काने में मदद करने के आरोप में दोषी करार दिया। हालाँकि, अदालत ने उन्हें मामले के अन्य आरोपों से बरी कर दिया और सात सह-आरोपियों को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।

मामले का पृष्ठभूमि और आरोप

यह मामला दयालपुर इलाके के एक दुकानदार की शिकायत पर आधारित है। शिकायतकर्ता का आरोप था कि 24 फरवरी 2020 को उसकी दुकान में लूटपाट के बाद आग लगा दी गई थी। दुकान से ₹17–18 लाख का सामान चोरी हुआ, जबकि संपत्ति को करीब ₹10 लाख का नुकसान पहुँचा।

दयालपुर पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147 (दंगा), 148 (घातक हथियार से लैस होकर दंगा), 149 (गैरकानूनी जमावड़ा), 427 (नुकसान पहुँचाने वाली शरारत), 436 (घर आदि नष्ट करने के इरादे से आग या विस्फोटक का इस्तेमाल) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

अदालत का फैसला

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने शनिवार को फैसला सुनाते हुए ताहिर हुसैन को केवल दंगा भड़काने में सहायता के आरोप में दोषी माना। अन्य सभी आरोपों से उन्हें बरी किया गया। साथ ही, मामले के सातों अन्य आरोपियों को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया।

अदालत ने दोषसिद्धि के बाद ताहिर हुसैन की सजा की अवधि पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के लिए 16 नवंबर की तारीख नियत की है।

पहले की दोषसिद्धि और उम्रकैद

गौरतलब है कि यह फरवरी 2020 के दंगों से जुड़े मामलों में ताहिर हुसैन की दूसरी दोषसिद्धि है। इससे पहले, खुफिया ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उसी मामले में जावेद, अनस, नाजिम और कासिम को भी उम्रकैद हुई थी, जबकि छह अन्य आरोपी बरी हुए थे।

ताहिर हुसैन ने अपनी उम्रकैद की सजा को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। सितंबर में उच्च न्यायालय ने उनकी अपील पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया और निर्देश दिया कि इस अपील की सुनवाई 2 दिसंबर को अन्य दोषियों की संबंधित अपीलों के साथ की जाए।

2020 दंगों का व्यापक संदर्भ

फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की सांप्रदायिक हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई थी, सैकड़ों घायल हुए और बड़े पैमाने पर संपत्ति नष्ट हुई थी। यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में राजधानी में हुई सबसे भीषण सांप्रदायिक हिंसाओं में से एक मानी जाती है। इससे जुड़े दर्जनों मामलों की सुनवाई अभी भी विभिन्न अदालतों में जारी है।

आगे क्या होगा

सजा पर दलीलें 16 नवंबर को सुनी जाएंगी, जिसके बाद अदालत सजा की अवधि तय करेगी। वहीं, उम्रकैद की अपील पर 2 दिसंबर को दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई होनी है। इन फैसलों से दंगा मामलों की न्यायिक प्रक्रिया की दिशा और स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सात सह-आरोपियों का बरी होना यह भी दर्शाता है कि अदालतें सामूहिक आरोप की बजाय व्यक्तिगत साक्ष्य को तरजीह दे रही हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय में उम्रकैद की अपील और 2 दिसंबर की सुनवाई तय है — वहाँ का फैसला इस पूरे मामले की कानूनी दिशा निर्धारित करेगा। गौरतलब है कि 53 मौतों वाले इन दंगों से जुड़े दर्जनों मामले अभी भी लंबित हैं, और न्याय की यह प्रक्रिया साढ़े छह साल बाद भी अधूरी है।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ताहिर हुसैन को इस मामले में किस आरोप में दोषी ठहराया गया?
कड़कड़डूमा कोर्ट ने ताहिर हुसैन को 24 फरवरी 2020 को दयालपुर में एक दुकान में लूटपाट और आगजनी से जुड़े मामले में दंगा भड़काने में मदद करने का दोषी माना। अन्य आरोपों — जिनमें IPC की धारा 147, 148, 149 आदि शामिल थीं — से उन्हें बरी कर दिया गया।
ताहिर हुसैन को सजा कब सुनाई जाएगी?
अदालत ने सजा की अवधि पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के लिए 16 नवंबर 2026 की तारीख तय की है। उसके बाद ही सजा घोषित की जाएगी।
क्या ताहिर हुसैन पहले भी 2020 दंगों में दोषी ठहराए जा चुके हैं?
हाँ, यह उनकी दूसरी दोषसिद्धि है। इससे पहले IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उन्होंने उस सजा को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी है।
फरवरी 2020 के दिल्ली दंगे क्या थे?
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की सांप्रदायिक हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई, सैकड़ों घायल हुए और बड़े पैमाने पर संपत्ति को नुकसान पहुँचा। यह राजधानी में दशकों में हुई सबसे भीषण सांप्रदायिक हिंसाओं में से एक थी और इससे जुड़े मामले अभी भी अदालतों में विचाराधीन हैं।
इस मामले में दुकानदार को कितना नुकसान हुआ था?
शिकायतकर्ता दुकानदार के अनुसार, 24 फरवरी 2020 को उसकी दुकान से ₹17–18 लाख का सामान लूटा गया और संपत्ति को करीब ₹10 लाख का नुकसान पहुँचा था। इसी शिकायत के आधार पर दयालपुर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज हुआ था।
राष्ट्र प्रेस
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