दिल्ली दंगा 2020: ताहिर हुसैन दंगा उकसावे में दोषी, सात सह-आरोपी बरी; 16 नवंबर को सजा पर सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
कड़कड़डूमा कोर्ट ने 10 अक्टूबर 2026 को फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दंगा भड़काने में मदद करने के आरोप में दोषी करार दिया। हालाँकि, अदालत ने उन्हें मामले के अन्य आरोपों से बरी कर दिया और सात सह-आरोपियों को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।
मामले का पृष्ठभूमि और आरोप
यह मामला दयालपुर इलाके के एक दुकानदार की शिकायत पर आधारित है। शिकायतकर्ता का आरोप था कि 24 फरवरी 2020 को उसकी दुकान में लूटपाट के बाद आग लगा दी गई थी। दुकान से ₹17–18 लाख का सामान चोरी हुआ, जबकि संपत्ति को करीब ₹10 लाख का नुकसान पहुँचा।
दयालपुर पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147 (दंगा), 148 (घातक हथियार से लैस होकर दंगा), 149 (गैरकानूनी जमावड़ा), 427 (नुकसान पहुँचाने वाली शरारत), 436 (घर आदि नष्ट करने के इरादे से आग या विस्फोटक का इस्तेमाल) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
अदालत का फैसला
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने शनिवार को फैसला सुनाते हुए ताहिर हुसैन को केवल दंगा भड़काने में सहायता के आरोप में दोषी माना। अन्य सभी आरोपों से उन्हें बरी किया गया। साथ ही, मामले के सातों अन्य आरोपियों को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया।
अदालत ने दोषसिद्धि के बाद ताहिर हुसैन की सजा की अवधि पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के लिए 16 नवंबर की तारीख नियत की है।
पहले की दोषसिद्धि और उम्रकैद
गौरतलब है कि यह फरवरी 2020 के दंगों से जुड़े मामलों में ताहिर हुसैन की दूसरी दोषसिद्धि है। इससे पहले, खुफिया ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उसी मामले में जावेद, अनस, नाजिम और कासिम को भी उम्रकैद हुई थी, जबकि छह अन्य आरोपी बरी हुए थे।
ताहिर हुसैन ने अपनी उम्रकैद की सजा को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। सितंबर में उच्च न्यायालय ने उनकी अपील पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया और निर्देश दिया कि इस अपील की सुनवाई 2 दिसंबर को अन्य दोषियों की संबंधित अपीलों के साथ की जाए।
2020 दंगों का व्यापक संदर्भ
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की सांप्रदायिक हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई थी, सैकड़ों घायल हुए और बड़े पैमाने पर संपत्ति नष्ट हुई थी। यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में राजधानी में हुई सबसे भीषण सांप्रदायिक हिंसाओं में से एक मानी जाती है। इससे जुड़े दर्जनों मामलों की सुनवाई अभी भी विभिन्न अदालतों में जारी है।
आगे क्या होगा
सजा पर दलीलें 16 नवंबर को सुनी जाएंगी, जिसके बाद अदालत सजा की अवधि तय करेगी। वहीं, उम्रकैद की अपील पर 2 दिसंबर को दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई होनी है। इन फैसलों से दंगा मामलों की न्यायिक प्रक्रिया की दिशा और स्पष्ट होगी।