ताहिर हुसैन को उम्रकैद: दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता बोलीं — 'न्याय की जीत हुई', AAP पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
कड़कड़डूमा कोर्ट ने 31 जुलाई 2026 को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और 5 अन्य दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस फैसले के तुरंत बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई नेताओं ने कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया और AAP नेतृत्व पर तीखे सवाल दागे।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि आईबी अधिकारी स्वर्गीय अंकित शर्मा हत्याकांड में न्यायालय द्वारा AAP के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और अन्य 5 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने का स्वागत है। उन्होंने यह भी कहा कि अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया हुसैन की गिरफ्तारी के बाद भी उसके समर्थन में खड़े रहे और उसे बचाने की कोशिश करते रहे।
गुप्ता ने सवाल उठाया — 'आज दिल्ली की जनता AAP से जवाब चाहती है। क्या अरविंद केजरीवाल बताएंगे कि क्या उनकी शह पर ही ताहिर हुसैन जैसे लोगों ने दंगों की साजिश रची थी?' उन्होंने जोड़ा कि यह फैसला देश के हर नागरिक का कानून और न्यायपालिका पर विश्वास और मज़बूत करता है।
BJP नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया
दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि कड़कड़डूमा ट्रायल कोर्ट ने AAP नेता ताहिर हुसैन को पूर्वी दिल्ली में दंगा फैलाने और आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की बर्बर हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है। उन्होंने कहा कि 'AAP का असली चेहरा आज सामने आया है।'
भाजपा विधायक हरीश खुराना ने कहा कि कानून ने अपना काम किया है और अंकित शर्मा के परिवार को आज कुछ राहत महसूस हो रही होगी। खुराना ने यह भी कहा कि जिन लोगों ने ताहिर हुसैन को धार्मिक नज़रिए से देखकर उन्हें बेगुनाह दिखाने की कोशिश की और 'बेनिफिट ऑफ डाउट' देने का प्रयास किया, उन पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
केजरीवाल और कांग्रेस पर सीधा निशाना
विधायक खुराना ने अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह और कांग्रेस पार्टी के सदस्यों को याद दिलाया कि उन्होंने ताहिर हुसैन का बचाव करने की किस तरह कोशिश की। उन्होंने कहा — 'ताहिर हुसैन, अरविंद केजरीवाल के करीबी सहयोगी और उनकी अपनी पार्टी के पार्षद थे। आज मैं इन लोगों से पूछता हूं कि क्या वे देश से माफी मांगेंगे?'
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला फरवरी 2020 में हुए उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़ा है, जिनमें दर्जनों लोगों की जान गई थी। अंकित शर्मा, जो इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में कार्यरत थे, दंगों के दौरान मारे गए थे। उनका शव चाँद बाग नाले से बरामद हुआ था। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में राजनीतिक तनाव पहले से ही चरम पर है और AAP एवं BJP के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
आगे क्या होगा
कोर्ट का यह फैसला दोषियों के लिए उच्च न्यायालय में अपील का रास्ता खुला रखता है। अंकित शर्मा के परिजन न्याय की इस जीत को लंबे इंतज़ार के बाद मिली राहत के रूप में देख रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला दिल्ली में आगामी राजनीतिक बहसों को और धार देगा।