गुजरात में डेंगू मामलों में 39.6% की गिरावट, स्वास्थ्य मंत्री पानशेरिया ने जिलों को जांच तेज करने के दिए निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात में डेंगू के मामलों में वर्ष 2026 में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है — स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की तुलना में डेंगू के मामलों में 39.6 प्रतिशत और मलेरिया के मामलों में 22 प्रतिशत की कमी आई है। गांधीनगर में 29 सितंबर 2026 को स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह जानकारी सामने आई। बैठक में राज्य भर में वेक्टर जनित बीमारियों की निगरानी को और सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए।
समीक्षा बैठक में क्या हुआ
स्वास्थ्य मंत्री पानशेरिया की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सभी जिलों और नगर निगम क्षेत्रों में बीमारी की निगरानी एवं जांच गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की गई। मंत्री ने राज्य के मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध 42 अस्पतालों में स्थापित जांच केंद्रों के कामकाज की, विशेषकर डेंगू की त्वरित जांच और सीरम सैंपल की परीक्षण क्षमता की, बारीकी से समीक्षा की।
मंत्री ने बताया, "इन 42 केंद्रों पर डेंगू के संदिग्ध मामलों के 1.35 लाख से अधिक सीरम सैंपल की जांच की गई, जिनमें से 2,099 सैंपल पॉजिटिव पाए गए।" यह आंकड़ा राज्य में जांच की व्यापक पहुंच और त्वरित निदान तंत्र की मजबूती को दर्शाता है।
मच्छर नियंत्रण और घर घर निगरानी अभियान
बैठक में वेक्टर जनित बीमारियों से बचाव के तहत राज्य भर में चलाए जा रहे घर घर निगरानी अभियान की प्रगति की भी समीक्षा की गई। पानशेरिया ने अधिकारियों को इस अभियान को और प्रभावी बनाने तथा मच्छरों के पनपने की संभावित जगहों की पहचान कर उन्हें समाप्त करने के स्पष्ट निर्देश दिए।
मंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव टोपनो को सभी कलेक्टरों, जिला विकास अधिकारियों और नगर आयुक्तों के साथ बैठक करने का निर्देश दिया, ताकि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में मच्छर जनित बीमारियों के विरुद्ध उपायों को और तीव्र किया जा सके।
प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति
मंत्री ने अलग से सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर बुखार एवं डेंगू की जांच और उपचार सुविधाओं की उपलब्धता की समीक्षा की। दवाओं और जांच किट की उपलब्धता का आकलन करने के बाद उन्होंने अधिकारियों को किसी भी केंद्र में पाई जाने वाली कमी को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए।
मंत्री ने नागरिकों को आश्वस्त करते हुए कहा, "गुजरात में मलेरिया और डेंगू की स्थिति नियंत्रण में है। नागरिकों को अफवाहों से घबराना नहीं चाहिए।" उन्होंने जनता से अपने घरों के आसपास साफ सफाई बनाए रखने और मच्छर जनित बीमारियों से बचाव के लिए आवश्यक सावधानी बरतने की अपील भी की।
आम जनता पर असर और सरकार की अपील
यह समीक्षा बैठक ऐसे समय में हुई है जब मानसून के बाद के महीनों में वेक्टर जनित बीमारियों का खतरा स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विभाग ने शुरुआती जांच, प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं में पर्याप्त आपूर्ति और मच्छरों के प्रजनन स्थलों को समाप्त करने पर विशेष जोर देते हुए निगरानी और बचाव के उपाय जारी रखे हुए हैं।
गौरतलब है कि पिछले वर्षों में मानसून के बाद डेंगू के मामलों में उछाल आम रहा है, इसलिए इस वर्ष दर्ज की गई 39.6 प्रतिशत की गिरावट को स्वास्थ्य विभाग की नीतिगत सफलता के रूप में देखा जा रहा है। आगे चलकर जिला स्तर पर अभियानों की प्रभावशीलता इस सुधार को बनाए रखने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।