रवनीत बिट्टू का भगवंत मान पर पलटवार: ईडी जांच को सियासी बताना सवालों से नहीं बचाता
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने 20 अगस्त को चंडीगढ़ में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की उस प्रतिक्रिया को सीधे चुनौती दी, जिसमें उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पत्र को राजनीतिक रूप से प्रेरित करार दिया था। बिट्टू ने स्पष्ट कहा कि संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति गंभीर जांच एजेंसी के सवालों को केवल सियासी विरोध बताकर नहीं टाल सकता।
मुख्य घटनाक्रम
बिट्टू ने कहा, 'ये आरोप किसी राजनीतिक दल या व्यवस्था से बाहर बैठे किसी व्यक्ति द्वारा नहीं लगाए गए हैं। प्रवर्तन निदेशालय देश की प्रमुख जांच एजेंसियों में से एक है।' उन्होंने कहा कि यदि ईडी ने पंजाब पुलिस से जानकारी मांगी है या किसी विशेष मामले पर सवाल उठाए हैं, तो मुख्यमंत्री को राजनीतिक बयानबाजी के बजाय सक्षम अधिकारियों को जांच करने देनी चाहिए।
बिट्टू की सीधी चुनौती
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'अगर सब कुछ झूठ है, तो तथ्यों और दस्तावेजों को सार्वजनिक कर दीजिए। अगर छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो जांच से डरने की कोई वजह नहीं होनी चाहिए। पंजाब की जनता को जांच एजेंसियों पर आरोप नहीं, जवाब चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की जिम्मेदारी और भी अधिक होती है।
जवाबदेही पर सवाल
बिट्टू ने मुख्यमंत्री मान को सीधे संबोधित करते हुए कहा, 'आप पंजाब के मुख्यमंत्री हैं। आप दूसरों से जवाबदेही की मांग कर सकते हैं, लेकिन अपनी ही सरकार को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब देने से इनकार नहीं कर सकते।' गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसियों के बीच टकराव सार्वजनिक हुआ हो।
जांच एजेंसियों की स्वायत्तता पर जोर
बिट्टू ने कहा कि जांच एजेंसियों को अपनी वैधानिक जिम्मेदारियों का स्वतंत्र रूप से निर्वहन करने दिया जाना चाहिए और किसी भी जांच का परिणाम सबूत और कानून के आधार पर निर्धारित होना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा, 'राजनीतिक बयानबाजी किसी आधिकारिक जांच के सवालों का विकल्प नहीं हो सकती।'
आगे क्या
बिट्टू ने अंत में कहा कि सार्वजनिक पद को जांच और सवालों से बचने के लिए ढाल के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता और मुख्यमंत्री की कुर्सी सवालों से बचने का लाइसेंस नहीं है। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पंजाब में केंद्र-राज्य संबंध और जांच एजेंसियों की भूमिका पर राजनीतिक बहस तेज होती जा रही है।